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भाग I · स्था. 11.2025 
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1,128 पवित्र उपवनों के दस्तावेजीकरण के लिए कन्नन सी.एस. वारियर को मिला अवॉर्ड

GS3अर्थव्यवस्था · विज्ञान-तकनीक · पर्यावरण · सुरक्षा· जैव प्रौद्योगिकी एवं स्वास्थ्य अनुसंधान· प्रीलिम्स·

जैव विविधता संरक्षण और संस्थागत अनुसंधान: GS3 विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पर्यावरण का एक केस स्टडी।

चर्चा में क्यों

केरल फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर कन्नन सी.एस. वारियर को 1,128 पवित्र उपवनों (Sacred Groves) के दस्तावेजीकरण और नमक-सहिष्णु क्लोन (Salt-tolerant clones) विकसित करने के उनके कार्यों के लिए इंटरनेशनल आइकॉनिक साइंटिस्ट अवार्ड से सम्मानित किया गया है।

पृष्ठभूमि

कन्नन सी.एस. वारियर केरल फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (KSCSTE-KFRI) के निदेशक हैं। उनके कार्यों में 139 'थैस्पेशिया पॉपुलनिया' (Thespesia populnea) और 155 'हल्डिना कॉर्डिफोलिया' (Haldina cordifolia) पेड़ों की पहचान करना और 1,128 पवित्र उपवनों (Sacred Groves) का दस्तावेजीकरण शामिल है।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • पदकन्नन सी.एस. वारियर केरल फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (KSCSTE-KFRI) के डायरेक्टर हैं।
  • तथ्यकन्नन सी.एस. वारियर ने 1,128 पवित्र उपवनों (Sacred Groves) का दस्तावेजीकरण किया।
  • विज्ञान-तकनीकवॉरियर ने Casuarina equisetifolia के नमक-सहिष्णु (salt-tolerant) क्लोन विकसित किए।
  • तथ्यवॉरियर ने 139 थेस्पेशिया पॉपुल्निया (Thespesia populnea) और 155 हलडिना कॉर्डिफोलिया (Haldina cordifolia) के पेड़ पहचाने।

प्रीलिम्स अभ्यास प्रश्न

कन्नन सी.एस. वारियर के कार्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. उन्होंने जैव विविधता संरक्षण के लिए 1,128 पवित्र उपवनों (Sacred Groves) को प्रलेखित किया।
  2. उन्होंने 155 Thespesia populnea और 139 Haldina cordifolia पेड़ों की पहचान की।
  3. वह केरल फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (Kerala Forest Research Institute) के डायरेक्टर हैं।
  1. (a)केवल 1
  2. (b)केवल 3
  3. (c)केवल 1 और 3
  4. (d)1, 2 और 3
उत्तर देखें

उत्तर: (c) केवल 1 और 3 — कथन 1 और 3 सही हैं। कथन 2 गलत है: उन्होंने 139 Thespesia populnea और 155 Haldina cordifolia पेड़ों की पहचान की।

मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत की जैव विविधता के संरक्षण में पवित्र उपवनों (Sacred Groves) के महत्व और पारंपरिक पारिस्थितिक ज्ञान के दस्तावेजीकरण में संस्थागत अनुसंधान की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।

उत्तर के आयाम

  • जैव विविधता संरक्षण: स्थानिक वनस्पति और वन्यजीवों के लिए इन-सिटु संरक्षण साइट के रूप में पवित्र उपवन
  • संस्थागत भूमिका: नमक-सहिष्णु वानिकी और वनस्पति संबंधी दस्तावेज़ीकरण में KFRI का योगदान
  • ज्ञान एकीकरण: पारंपरिक पारिस्थितिक ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक दस्तावेज़ीकरण के साथ जोड़ना

मुख्य शब्द: इन-सिटू कंजर्वेशन · जैव विविधता दस्तावेज़ीकरण · नमक-सहिष्णु क्लोन्स · पवित्र उपवन · पारिस्थितिक अनुसंधान

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँनोट्स कैसे बनते हैंस्रोत: द हिंदू ↗यह भी: GS3 · जैव विविधता एवं संरक्षणयह भी: GS1 · चर्चित स्थान / मानचित्र

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।