तेलंगाना हाई कोर्ट ने ज़िला परिषद टेरिटोरियल कॉन्स्टिट्यूएंसी (Zilla Parishad Territorial Constituencies) में अनुसूचित जातियों के लिए अनिवार्य 15% आरक्षण को लागू न करने के आरोपों के संबंध में भद्राद्री कोठागुडेम कलेक्टर को नोटिस जारी किया है
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चर्चा में क्यों
तेलंगाना हाई कोर्ट ने ज़िला परिषद टेरिटोरियल कॉन्स्टिट्यूएंसी (Zilla Parishad Territorial Constituencies) में अनुसूचित जातियों के लिए अनिवार्य 15% आरक्षण को लागू न करने के आरोपों के संबंध में भद्राद्री कोठागुडेम कलेक्टर को नोटिस जारी किया है।
पृष्ठभूमि
याचिकाकर्ता गडम रामू और मोडुगु जोगा राव ने आरोप लगाया कि जिला अधिकारियों ने अभ्यावेदन (representations) के बावजूद अनुसूचित जाति (SC) आरक्षण को लागू करने में विफलता दिखाई। याचिकाकर्ताओं ने सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के एक फैसले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि आरक्षण की 50% की सीमा संविधान की पांचवीं अनुसूची (Fifth Schedule) के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों पर लागू नहीं होती है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- स्थानभद्राद्री कोठागुडेम: तेलंगाना का एक जिला जहाँ रिट पिटीशन (writ petition) दायर की गई थी।
- संविधानपांचवीं अनुसूची: अनुसूचित क्षेत्रों (Scheduled Areas) के प्रशासन को नियंत्रित करने वाला संवैधानिक प्रावधान।
- तथ्यज़िला परिषद टेरिटोरियल कॉन्स्टिट्यूएंसीज़ (Zilla Parishad Territorial Constituencies) में अनुसूचित जातियों के लिए अनिवार्य आरक्षण की दर 15% है।
- संस्थातेलंगाना हाई कोर्ट: वह न्यायिक निकाय जो जिला कलेक्टर को नोटिस जारी करता है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: पाँचवीं अनुसूची के अंतर्गत अनुसूचित क्षेत्रों में आरक्षण नीतियों के संवैधानिक सूक्ष्मताओं और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने में स्थानीय निकायों की भूमिका का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- क्षेत्राधिकार की जटिलता: पांचवीं अनुसूची के संरक्षण और राज्य द्वारा निर्धारित आरक्षण कोटा के बीच संतुलन
- प्रशासनिक जवाबदेही: ग्रामीण स्थानीय निकायों में संवैधानिक आदेशों का जिला स्तर पर कार्यान्वयन सुनिश्चित करना
मुख्य शब्द: अनुसूचित क्षेत्र · पांचवीं अनुसूची · सामाजिक न्याय · आरक्षण नीति · स्थानीय शासन
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