तमिलनाडु भगदड़ पीड़ितों के नौकरी वाले मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाई
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चर्चा में क्यों
सुप्रीम कोर्ट ने करूर भगदड़ की पीड़ितों के परिजनों को रोजगार प्रदान करने के सरकार के निर्णय से संबंधित मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगा दी है।
पृष्ठभूमि
उच्चतम न्यायालय ने 14 अगस्त, 2026 को मद्रास उच्च न्यायालय के निर्णय पर रोक लगा दी है। उच्च न्यायालय ने पूर्व में तमिलनाडु सरकार के उन आदेशों को रद्द कर दिया था, जिनके माध्यम से 27 सितंबर, 2025 को हुई भगदड़ में मृत व्यक्तियों के परिजनों को रोजगार प्रदान किया गया था।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- संस्थाभारत का सर्वोच्च न्यायालय: भारत का सर्वोच्च न्यायिक मंच।
- तथ्यकरूर भगदड़ की घटना 27 सितंबर, 2025 को हुई थी।
- पदन्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला: मामले में करुणा के पक्ष में तर्क देने वाले पीठासीन न्यायाधीश।
मेन्स के लिए
Q. सार्वजनिक रोजगार में 'अवसर की समानता' के सिद्धांत और त्रासदियों के पीड़ितों को अनुकंपात्मक राहत प्रदान करने के राज्य के कर्तव्य के मध्य उत्पन्न होने वाले अंतर्विरोधों का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- Constitutional rights vs. compassionate grounds
- Administrative feasibility of job quotas
- Judicial review of executive orders
कीवर्ड: Judicial Review · Compassionate Appointment · Equality of Opportunity · Executive Discretion
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।