भारत सरकार ने चार लेबर कोड्स (Labour Codes) को लागू करने की घोषणा की है, जिससे नियोक्ताओं और ट्रेड यूनियनों के बीच बहस छिड़ गई है
GS3अर्थव्यवस्था · विज्ञान-तकनीक · पर्यावरण · सुरक्षा· रोज़गार एवं समावेशी विकास· प्रीलिम्स + मेन्स·
चर्चा में क्यों
भारत सरकार ने चार लेबर कोड्स (Labour Codes) को लागू करने की घोषणा की है, जिससे नियोक्ताओं और ट्रेड यूनियनों के बीच बहस छिड़ गई है। जहाँ नियोक्ता सरलीकरण के पक्ष में हैं, वहीं ट्रेड यूनियन श्रमिकों के अधिकारों में कटौती होने की आशंका जता रहे हैं।
पृष्ठभूमि
इन चार संहिताओं (Codes) में वेतन संहिता (Code on Wages), औद्योगिक संबंध संहिता (Industrial Relations Code), सामाजिक सुरक्षा संहिता (Code on Social Security) और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थितियाँ (Occupational Safety, Health and Working Conditions - OSHWC) संहिता शामिल हैं। राज्य सरकारों द्वारा अलग-अलग व्याख्याओं के कारण इनके कार्यान्वयन में देरी हुई है, जिसमें केरल और पश्चिम बंगाल ने इन संहिताओं का विरोध किया है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- अधिनियम / विधेयकCode on Wages: कार्यान्वयन के लिए घोषित चार नए labour codes में से एक।
- अधिनियम / विधेयकOSHWC Code: Occupational Safety, Health and Working Conditions Code (व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थितियां कोड)।
- तथ्यकेरल और पश्चिम बंगाल वे राज्य हैं जिन्होंने लेबर कोड्स (labour codes) के कार्यान्वयन का विरोध किया है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में विभिन्न श्रम कानूनों को चार संहिताओं में एकीकृत करने के औद्योगिक संबंधों और श्रमिक सुरक्षा पर पड़ने वाले निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- संघीय टकराव: लेबर रेगुलेशंस को लेकर केंद्र की विधायी मंशा और राज्य स्तर के विरोध के बीच विवाद
- वर्कर्स राइट्स ट्रेड-ऑफ: एम्प्लॉयर कंप्लायंस को आसान बनाने और इनफॉर्मल वर्कर्स के लिए मजबूत सोशल सिक्योरिटी बनाए रखने के बीच तनाव
- रेगुलेटरी सरलीकरण: ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस की संभावना बनाम सामूहिक सौदेबाजी के अधिकारों में कमी
मुख्य शब्द: लेबर रिफॉर्म · औद्योगिक संबंध · सामाजिक सुरक्षा · संघवाद · ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस
अर्थव्यवस्था पर और नोट्स
- कर्नाटक हाई कोर्ट ने शहरी विकास विभाग के पक्ष में फैसला सुनाया है · 6 दिसंबर 2025
- सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस राजेश बिंदल ने बुनियादी ढांचा परियोजनाओं (Infrastructure projects) में होने वाली देरी को रोकने के लिए मजबूत मध्यस्थता संस्थानों (Arbitral institutions) और विशेषज्ञों द्वारा तैयार किए गए अनुबंधों (Contracts) की आवश्यकता पर जोर दिया · 6 दिसंबर 2025
- सिस्टम फेलियर (System Failure) के कारण इंडिगो (IndiGo) एयरलाइन ने 1,000 से अधिक उड़ानों को रद्द कर दिया · 6 दिसंबर 2025
- ताइवान की एलेजेंस इंटरनेशनल कंपनी लिमिटेड (Allegiance International Co · 5 दिसंबर 2025
- तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के · 5 दिसंबर 2025
- RBI ने एडवांस टैक्स भुगतान के कारण पैदा हुई लिक्विडिटी की कमी (liquidity crunch) से निपटने के लिए दिसंबर में ₹1 लाख करोड़ का ओपन मार्केट ऑपरेशन (OMO) और $5 बिलियन का USD/INR स्वैप (swap) करने की घोषणा की · 5 दिसंबर 2025
कोई गलती या कोई कमी?
किसी नोट में गलती दिखे, या तैयारी के लिए कोई टॉपिक, फॉर्मेट या पीडीएफ चाहिए, तो हमें लिखें। हम हर मेल पढ़ते हैं और गलतियाँ जल्दी ठीक करते हैं।
यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।