सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस राजेश बिंदल ने बुनियादी ढांचा परियोजनाओं (Infrastructure projects) में होने वाली देरी को रोकने के लिए मजबूत मध्यस्थता संस्थानों (Arbitral institutions) और विशेषज्ञों द्वारा तैयार किए गए अनुबंधों (Contracts) की आवश्यकता पर जोर दिया
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चर्चा में क्यों
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस राजेश बिंदल ने बुनियादी ढांचा परियोजनाओं (Infrastructure projects) में होने वाली देरी को रोकने के लिए मजबूत मध्यस्थता संस्थानों (Arbitral institutions) और विशेषज्ञों द्वारा तैयार किए गए अनुबंधों (Contracts) की आवश्यकता पर जोर दिया।
पृष्ठभूमि
न्यायमूर्ति राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति तेजस करिया ने बुनियादी ढांचा क्षेत्र (Infrastructure Sector) में विशेष विवाद समाधान ढांचे की आवश्यकता पर जोर दिया। अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने निर्माण क्षेत्र के लिए समर्पित कानून और लॉ स्कूलों की बढ़ती भागीदारी का प्रस्ताव रखा।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- पदजस्टिस राजेश बिंदल: सुप्रीम कोर्ट जज।
- पदआर. वेंकटरमणी: अटॉर्नी जनरल ऑफ इंडिया।
- तथ्यललित भसीन: सोसाइटी ऑफ इंडियन लॉ फर्म्स (Society of Indian Law Firms) के प्रेसिडेंट।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत के बुनियादी ढांचा क्षेत्र में परियोजनाओं के समयबद्ध समापन को सुनिश्चित करने के लिए विवाद समाधान प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने हेतु आवश्यक संस्थागत और विधायी उपायों की चर्चा कीजिए।
उत्तर के आयाम
- संस्थागत बाधा: जटिल इंजीनियरिंग और कंस्ट्रक्शन कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए विशेष आर्बिट्रल बॉडीज की कमी
- विधायी अंतर: निर्माण क्षेत्र की खास बारीकियों के लिए समर्पित कानूनी ढांचे का अभाव
- तकनीकी जोखिम: आर्बिट्रेशन प्रक्रियाओं में AI एकीकरण से चुनौतियां और प्रक्रियात्मक अखंडता पर इसका प्रभाव
मुख्य शब्द: आर्बिट्रेशन · इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट · विवाद समाधान · कॉन्ट्रैक्टुअल इंटीग्रिटी · विधायी ढांचा
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