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भारत का जमीनी सत्य अभिलेख
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भाग I · स्था. 11.2025 
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उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का अधिकार एक संवैधानिक रूप से गारंटीकृत अधिकार है और आंदोलनों के दौरान इसका सामना लाठीचार्ज से नहीं किया जा सकता

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चर्चा में क्यों

उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का अधिकार एक संवैधानिक रूप से गारंटीकृत अधिकार है और आंदोलनों के दौरान इसका सामना लाठीचार्ज से नहीं किया जा सकता।

पृष्ठभूमि

20 जुलाई को, दिल्ली पुलिस ने संसद के समीप आयोजित 'संसद चलो' मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध लाठीचार्ज और आंसू गैस का प्रयोग किया। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत एवं अन्य न्यायाधीशों की पीठ, विरोध प्रदर्शनों के प्रबंधन हेतु अखिल भारतीय दिशा-निर्देशों पर विचार कर रही है तथा पुलिस की अतिचारिता की जाँच कर रही है।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • संविधानशांतिपूर्ण विरोध का अधिकार अनुच्छेद 19(1)(a) और 19(1)(b) से प्राप्त एक मौलिक अधिकार है।
  • तथ्य20 जुलाई को आयोजित 'Sansad Chalo' मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का प्रयोग किया।
  • संस्थाभारत का सर्वोच्च न्यायालय अखिल भारतीय विरोध प्रदर्शन प्रबंधन दिशानिर्देशों पर विचार करने वाला प्राधिकारी है।

मेन्स के लिए

प्रश्न: शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था एवं सुरक्षा बनाए रखने के राज्य के दायित्व के बीच संवैधानिक संतुलन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

पूरा कालक्रम (रिवीजन के लिए) →पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँनोट्स कैसे बनते हैंस्रोत: एनडीटीवी ↗यह भी: GS3 · सुरक्षा बल एवं एजेंसियां

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।