SEBI ने कड़े किए नियम, 2 मिलियन रुपये से ज़्यादा के कनेक्शन पर अधिकारियों को पीछे हटना होगा
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चर्चा में क्यों
SEBI ने हितों के टकराव को रोकने के लिए कड़े आचार संहिता प्रावधान पेश किए हैं, जिसके तहत अधिकारियों के लिए परिवार से संबंधित मामलों या ₹2 मिलियन से अधिक के भौतिक वित्तीय हितों वाले मामलों से स्वयं को अलग (recuse) करना अनिवार्य है।
पृष्ठभूमि
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने यह अनिवार्य किया है कि यदि किसी अधिकारी के हितों में पिछले तीन वर्षों के दौरान संबंधी, घनिष्ठ मित्र या सहयोगी शामिल हों, तो उन्हें संबंधित प्रक्रिया से स्वतः हट जाना होगा। महत्वपूर्ण वित्तीय हित के लिए निर्धारित सीमा ₹2 मिलियन या कुल निवेश का 5% तय की गई है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- संस्थाSEBI: SEBI Act, 1992 के तहत स्थापित एक वैधानिक निकाय, जिसका कार्य प्रतिभूति बाजार (securities market) को विनियमित करना है।
- तथ्यत्याग (Recusal) की सीमा: ₹2 मिलियन से अधिक के भौतिक वित्तीय हित या कुल निवेश का 5%।
- तथ्यलुक-बैक अवधि: अधिकारियों को पिछले तीन वर्षों से जुड़े सहयोगियों से संबंधित मामलों से स्वयं को अलग (recuse) करना होगा।
मेन्स के लिए
Q. सेबी (SEBI) जैसे स्वतंत्र नियामक निकायों की अखंडता सुनिश्चित करने में सुदृढ़ 'हितों के टकराव' (conflict-of-interest) संबंधी ढाँचों के महत्व पर चर्चा कीजिए।
उत्तर के आयाम
- Institutional integrity: Preventing 'regulatory capture' where private interests of officials influence public policy decisions.
- Transparency mechanism: Use of digital records and annual public disclosure to ensure accountability of high-ranking officials.
- Ethical oversight: Balancing the personal rights of officials with the necessity of impartial adjudication in capital markets.
कीवर्ड: Conflict of Interest · Regulatory Capture · Institutional Integrity · Transparency · Code of Conduct · Accountability
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।