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भारत का जमीनी सत्य अभिलेख
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भाग I · स्था. 11.2025 
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कलयत में बिजली ऑफिस पर हमले के मामले में कोर्ट का बड़ा फैसला

GS3अर्थव्यवस्था · विज्ञान-तकनीक · पर्यावरण · सुरक्षा· आतंकवाद एवं उग्रवाद (जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर)· मेन्स·

चर्चा में क्यों

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने 2017 के एक विरोध प्रदर्शन के दौरान राजद्रोह और आगजनी के आरोपों में आरोपित व्यक्तियों की दोषमुक्ति को बरकरार रखा और सरकार विरोधी नारों की कानूनी सीमाओं को स्पष्ट किया।

पृष्ठभूमि

25 अगस्त, 2017 को, एक सशस्त्र भीड़ ने कलायत में उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम के कार्यालय पर हमला कर सार्वजनिक संपत्ति को क्षति पहुँचाई थी। पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने 2 जुलाई, 2024 को राज्य की अपील को खारिज कर दिया और यह निर्णय दिया कि सरकार के विरुद्ध नारे लगाना राजद्रोह की श्रेणी में नहीं आता है।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • अधिनियम / विधेयकभारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 124A राजद्रोह के अपराध को परिभाषित करती है।
  • संस्थापंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय पंजाब और हरियाणा राज्यों के लिए मुख्य न्यायिक निकाय है।
  • तथ्ययह घटना 25 अगस्त, 2017 को गुरमीत राम रहीम सिंह की दोषसिद्धि के बाद हुई थी।

मेन्स के लिए

प्रश्न: एक लोकतंत्र में राष्ट्रीय सुरक्षा की सुरक्षा और असहमति के अधिकार के बीच संतुलन स्थापित करते हुए, 'राजद्रोह' की न्यायिक व्याख्या का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँनोट्स कैसे बनते हैंस्रोत: इंडियन एक्सप्रेस ↗यह भी: GS2 · न्यायपालिका एवं ऐतिहासिक फैसले

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।