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भारत का जमीनी सत्य अभिलेख
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भाग I · स्था. 11.2025 
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पासपोर्ट सरेंडर के मामले में मद्रास हाई कोर्ट ने विवेक सरवनमथु की याचिका सुनी

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चर्चा में क्यों

मद्रास उच्च न्यायालय ने श्रीलंका में जन्मे एक व्यक्ति को भारतीय दूतावास द्वारा जारी किए गए पासपोर्ट समर्पण नोटिस पर रोक लगा दी है, जो नागरिकता और राज्यविहीनता (statelessness) से जुड़ी कानूनी जटिलताओं को रेखांकित करता है।

पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता, विवेक सरवणमथु, का जन्म 1982 में कोलंबो में हुआ था और वे 1983 में तमिलनाडु चले गए थे। उन्होंने मार्च 2004 में भारतीय पासपोर्ट प्राप्त किया और वे 2014 से संयुक्त राज्य अमेरिका (US) में निवास कर रहे हैं। न्यायालय ने विदेश मंत्रालय (MEA) को 22 जुलाई, 2026 तक प्रति-शपथ पत्र (counter-affidavit) दाखिल करने का निर्देश दिया है।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • संस्थाMEA (Ministry of External Affairs) पासपोर्ट जारी करने और कांसुलर सेवाओं के लिए नोडल मंत्रालय है।
  • तथ्ययाचिकाकर्ता का जन्म 1982 में श्रीलंका में हुआ था और वे 1983 में भारत प्रवास कर गए।
  • स्थानरिट याचिका पर मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा विचार किया गया।

मेन्स के लिए

प्रश्न: विदेश में जन्मे उन व्यक्तियों के लिए नागरिकता निर्धारण में भारत के समक्ष आने वाली कानूनी और राजनयिक चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए, जो भारत में प्रवास करते हैं और जिनके संदर्भ में राज्यविहीनता (statelessness) की रोकथाम सुनिश्चित करना आवश्यक है। चर्चा कीजिए।

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँनोट्स कैसे बनते हैंस्रोत: द हिंदू ↗

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।