विमल मिश्रा और उर्मिन वेगड द्वारा किए गए एक अध्ययन में 1951 के बाद से पूर्वी सिंधु बेसिन की नदियों में वर्षा में 20% की गिरावट दर्ज की गई है
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चर्चा में क्यों
विमल मिश्रा और उर्मिन वेगड द्वारा किए गए एक अध्ययन में 1951 के बाद से पूर्वी सिंधु बेसिन की नदियों में वर्षा में 20% की गिरावट दर्ज की गई है, जो भारत को पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) पर पुन: बातचीत करने के लिए एक वैज्ञानिक आधार प्रदान करता है।
पृष्ठभूमि
यह अध्ययन वर्ष 1951 और 2024 के मध्य वर्षा के रुझानों का तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करता है, जिसमें पूर्वी नदियों में 20% की गिरावट दर्ज की गई है, जबकि पश्चिमी नदियों में यह गिरावट 6% रही है। यह अध्ययन सतलुज और रावी उप-जलग्रहण क्षेत्रों में भूजल के महत्वपूर्ण ह्रास की पहचान करता है, वहीं चेनाब, झेलम और सिंधु बेसिनों में जल की बेहतर उपलब्धता पर भी प्रकाश डालता है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- तथ्य1951 और 2024 के बीच पूर्वी सिंधु बेसिन नदियों में वर्षा में 20% की गिरावट आई।
- तथ्यउसी अवधि के दौरान सिंधु बेसिन की पश्चिमी नदियों में वर्षा में 6% की कमी देखी गई।
- स्थानसतलुज और रावी उप-जलग्रहण क्षेत्रों को महत्वपूर्ण भूजल ह्रास वाले क्षेत्रों के रूप में पहचाना गया है।
- संस्थासिंधु जल संधि (1960) तीन बारहमासी नदियों (Indus, Jhelum, Chenab) और तीन सहायक नदियों (Ravi, Beas, Sutlej) के वितरण को नियंत्रित करती है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: सिंधु बेसिन में जलवायु-प्रेरित जल-वैज्ञानिक परिवर्तनों के संदर्भ में यह चर्चा कीजिए कि न्यायसंगत जल-साझाकरण सुनिश्चित करने के लिए सिंधु जल संधि की समीक्षा क्यों आवश्यक है।
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