FPIs ने भारतीय बाजार में ₹14,000 करोड़ का निवेश किया
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चर्चा में क्यों
जून 2024 में, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भारतीय इक्विटी में ₹14,000 करोड़ से अधिक की पूंजी निवेश कर बहिर्वाह (outflows) के रुझान को उलट दिया, जो मुख्य रूप से FTSE जून '26 समीक्षा से प्रेरित था।
पृष्ठभूमि
FPIs ने बैंकिंग, वित्तीय, निर्माण, उपभोक्ता सेवाएँ और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्रों में शुद्ध खरीदार के रूप में कार्य किया। इसके विपरीत, वे ऑटोमोबाइल, पूंजीगत वस्तुएं, तेल एवं गैस, बिजली, तथा धातु एवं खनन क्षेत्रों में शुद्ध विक्रेता रहे।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- तथ्यजून 2024 की दो सप्ताह की अवधि में FPIs ने भारतीय इक्विटी में ₹14,000 करोड़ से अधिक का निवेश किया।
- संस्थाFTSE Russell: एक UK-आधारित इंडेक्स प्रदाता जिसकी समीक्षाएं उभरते बाजारों (emerging markets) में वैश्विक पूंजी प्रवाह को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करती हैं।
- तथ्यFPIs बैंकिंग और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में शुद्ध खरीदार (net buyers) थे, लेकिन ऑटोमोबाइल और धातु एवं खनन (metals & mining) क्षेत्रों में शुद्ध विक्रेता (net sellers) थे।
मेन्स के लिए
प्रश्न: वैश्विक सूचकांक समीक्षाओं और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश की अस्थिरता का भारत के पूंजी बाजारों की स्थिरता और घरेलू औद्योगिक विकास पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण कीजिए।
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