बॉम्बे उच्च न्यायालय ने एक SDPI नेता के विरुद्ध जारी किए गए एक्सटर्नमेंट (बाहर निकालने) के
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चर्चा में क्यों
बॉम्बे उच्च न्यायालय ने एक SDPI नेता के विरुद्ध जारी किए गए एक्सटर्नमेंट (बाहर निकालने) के आदेश को रद्द कर दिया है। न्यायालय ने निर्णय दिया कि सरकारी निर्णयों का विरोध करना आवाजाही के अधिकार से वंचित करने का आधार नहीं हो सकता।
पृष्ठभूमि
बॉम्बे उच्च न्यायालय ने यह निर्णय दिया कि नागरिकता अधिनियम जैसी सरकारी नीतियों के विरुद्ध विरोध प्रदर्शनों के आधार पर निष्कासन आदेश जारी नहीं किए जा सकते। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार की कार्रवाइयां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती हैं।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- संविधानअनुच्छेद 19(1)(a) भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गारंटी देता है।
- संविधानअनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार की गारंटी देता है, जिसमें स्वतंत्र रूप से घूमने का अधिकार भी शामिल है।
- संस्थाएक्सटर्नमेंट (Externment) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें किसी व्यक्ति को एक निर्दिष्ट अवधि के लिए किसी विशिष्ट क्षेत्र में प्रवेश करने से प्रतिबंधित कर दिया जाता है।
मेन्स के लिए
Q. लोकतंत्र में सरकारी नीतियों के विरुद्ध विरोध करने के अधिकार किस सीमा तक कार्यपालिका की निरंकुशता पर एक मौलिक नियंत्रण के रूप में कार्य करते हैं? न्यायपालिका की भूमिका के संदर्भ में चर्चा कीजिए।
उत्तर के आयाम
- Executive overreach: Potential for using externment orders to suppress political dissent and civil society activism.
- Judicial oversight: The role of High Courts in balancing public order against individual liberties under Article 19.
- Democratic safeguards: Ensuring that legislative protests do not equate to criminal activity warranting loss of liberty.
कीवर्ड: Fundamental Rights · Executive Overreach · Judicial Review · Civil Liberties · Right to Protest
राजव्यवस्था एवं संविधान पर और नोट्स
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