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भारत का जमीनी सत्य अभिलेख
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भाग I · स्था. 11.2025 
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कर-छूट और 'फुली एक्सेसिबल रूट' (FAR) के माध्यम से विस्तारित पहुंच के कारण

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चर्चा में क्यों

कर-छूट और 'फुली एक्सेसिबल रूट' (FAR) के माध्यम से विस्तारित पहुंच के कारण, जून माह में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) द्वारा भारतीय सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs) में ₹39,640 करोड़ का रिकॉर्ड निवेश दर्ज किया गया।

पृष्ठभूमि

सरकार और RBI ने पात्र संप्रभु ऋण निवेशों पर पूंजीगत लाभ को छूट प्रदान की है और 30-वर्षीय ऋण को शामिल करते हुए FAR पूल का विस्तार किया है। 12 जून तक, भारत के विदेशी मुद्रा भंडार $672 बिलियन पर रहे।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • तथ्यजून में भारतीय G-Secs में FPI का प्रवाह ₹39,640 करोड़ तक पहुंच गया।
  • तथ्य12 जून तक भारत के विदेशी मुद्रा भंडार $672 बिलियन थे।
  • संस्थाCCIL (Clearing Corporation of India Limited) बेंचमार्क यील्ड्स (benchmark yields) पर डेटा प्रदान करता है।
  • विज्ञान-तकनीकFully Accessible Route (FAR) FPIs को बिना किसी सीमा के सरकारी बॉन्ड में निवेश करने की अनुमति देता है।
  • तथ्यनीतिगत उपायों के बाद, 10-वर्षीय बेंचमार्क यील्ड (yield) 6.76% पर बंद हुई।

मेन्स के लिए

प्रश्न: वैश्विक बॉन्ड सूचकांकों (bond indices) में भारतीय संप्रभु ऋण (sovereign debt) के शामिल होने के महत्व और भारत के पूंजीगत खाते एवं मुद्रा स्थिरता पर इसके निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँस्रोत: इकोनॉमिक टाइम्स ↗यह भी: GS2 · दूसरे देशों की नीतियों का भारत पर असर

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।