भारत सरकार पश्चिमी घाट में पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों (ESAs) के सीमांकन को अंतिम रूप दे रही है
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चर्चा में क्यों
भारत सरकार पश्चिमी घाट में पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों (ESAs) के सीमांकन को अंतिम रूप दे रही है, ताकि विकासात्मक गतिविधियों को विनियमित किया जा सके और जैव विविधता का संरक्षण किया जा सके।
पृष्ठभूमि
पश्चिमी घाटों में प्रस्तावित पारिस्थितिक संवेदनशील क्षेत्र (ESAs) 56,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक के क्षेत्र को कवर करते हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) वर्तमान में हरियाणा के राखीगढ़ी हड़प्पा स्थल पर स्थित कंकाल अवशेषों पर DNA परीक्षण और चेहरे का पुनर्निर्माण कर रहा है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- स्थानपश्चिमी घाट: भारत के पश्चिमी तट पर छह राज्यों में फैला एक जैव विविधता हॉटस्पॉट।
- तथ्यपश्चिमी घाट में चिन्हित पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (ESAs) 56,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में फैले हुए हैं।
- स्थानराखीगढ़ी: हरियाणा राज्य में स्थित हड़प्पा सभ्यता का एक प्रमुख स्थल।
- संस्थाASI: Archaeological Survey of India पुरातात्विक अनुसंधान और संरक्षण के लिए प्रमुख संगठन है।
मेन्स के लिए
Q. पश्चिमी घाट के पारिस्थितिक महत्व पर चर्चा कीजिए और पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों (Ecologically Sensitive Areas) के संरक्षण तथा क्षेत्रीय विकासात्मक आकांक्षाओं के बीच संतुलन स्थापित करने में आने वाली चुनौतियों का मूल्यांकन कीजिए।
उत्तर के आयाम
- Federal friction: Conflict between state-led infrastructure projects and central environmental conservation mandates
- Regulatory bottleneck: Lack of clear, standardized criteria for demarcating ESAs across different ecological zones
- Biodiversity loss: Threat to endemic species due to unregulated mining and tourism in fragile corridors
कीवर्ड: Biodiversity conservation · Ecologically Sensitive Areas · Sustainable development · Federalism · Heritage preservation
पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी पर और नोट्स
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।