केरल वन विभाग ने केरल निजी वन (वेस्टिंग एंड असाइनमेंट) अधिनियम के अंतर्गत कोल्लुकुमलाई स्थित एक निजी चाय बागान से 42.72 हेक्टेयर पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील भूमि को पुन: प्राप्त कर लिया है
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चर्चा में क्यों
केरल वन विभाग ने केरल निजी वन (वेस्टिंग एंड असाइनमेंट) अधिनियम के अंतर्गत कोल्लुकुमलाई स्थित एक निजी चाय बागान से 42.72 हेक्टेयर पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील भूमि को पुन: प्राप्त कर लिया है।
पृष्ठभूमि
वन विभाग ने केरल के इडुक्की में हैरिसन्स मलयालम लिमिटेड से 42.72 हेक्टेयर भूमि पुन: प्राप्त कर ली है। यह भूमि मूल रूप से 1975 में कंपनी द्वारा अधिग्रहित की गई थी और अब वन्यजीवों, जैसे कि जंगली हाथियों और नीलगिरी मार्टन के संरक्षण हेतु इसे आरक्षित वन के रूप में नामित किया गया है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- स्थानकोल्लुकुमलाई (Kolukkumalai) केरल के इडुक्की जिले में स्थित एक उच्च-ऊंचाई वाली चोटी है।
- पर्यावरणनिलगिरी मार्टन (Martes gwatkinsii) पश्चिमी घाट में पाई जाने वाली एक दुर्लभ और लुप्तप्राय प्रजाति है।
- अधिनियम / विधेयकKerala Private Forests (Vesting and Assignment) Act राज्य सरकार को निजी वन भूमि वापस लेने के लिए कानूनी ढांचा प्रदान करता है।
- तथ्यपुनरुद्धारित क्षेत्र में ठीक 42.72 हेक्टेयर की पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील भूमि शामिल है।
मेन्स के लिए
Q. पश्चिमी घाट जैसे पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में संरक्षण हेतु निजी वन भूमि को पुनर्जीवित करने के कानूनी और पारिस्थितिक महत्व का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- Legal conflict: Balancing private property rights against the state's obligation to protect biodiversity under the Forest Conservation Act.
- Ecological integrity: Mitigating habitat fragmentation for endangered species like the Nilgiri marten in high-altitude tea plantation zones.
- Regulatory enforcement: The role of state-specific vesting acts in reversing historical land concessions for environmental restoration.
कीवर्ड: Ecologically sensitive zones · Habitat fragmentation · Biodiversity conservation · Land vesting · Western Ghats
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