सुप्रीम कोर्ट ने जांच में गंभीर खामियों और आपराधिक न्याय प्रणाली की व्यवस्थागत विफलताओं का हवाला देते हुए राकेश
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चर्चा में क्यों
सुप्रीम कोर्ट ने जांच में गंभीर खामियों और आपराधिक न्याय प्रणाली की व्यवस्थागत विफलताओं का हवाला देते हुए राकेश, कृष्णा और मनोज सहित कई मौत की सजा पाने वाले कैदियों को बरी कर दिया।
पृष्ठभूमि
सुप्रीम कोर्ट ने उन व्यक्तियों की सजा को रद्द कर दिया जिन्हें दशकों तक गलत तरीके से जेल में रखा गया था। कोर्ट ने अपर्याप्त कानूनी प्रतिनिधित्व और कानूनी सहायता संस्थानों के भीतर जवाबदेही की कमी जैसे मुद्दों पर प्रकाश डाला।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- संस्थासुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया: भारत की सर्वोच्च न्यायिक संस्था जो गलत सजाओं को पलटने के लिए जिम्मेदार है।
- तथ्यकोर्ट ने 'गंभीर जांच संबंधी कमियों' (grave investigative lapses) और 'साक्ष्य संबंधी मुद्दों' (evidentiary issues) को दोषमुक्ति के प्राथमिक कारणों के रूप में पहचाना।
- तथ्यकोर्ट ने गलत सजा को रोकने के लिए स्वतंत्र निगरानी और सख्त पुलिस प्रक्रियाओं की आवश्यकता को स्वीकार किया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली में उन प्रणालीगत विफलताओं का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए जो गलत दोषसिद्धि (wrongful convictions) का कारण बनती हैं और पुलिस जांच में जवाबदेही सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक उपायों का सुझाव दीजिए।
उत्तर के आयाम
- संस्थागत जवाबदेही: पुलिस जांच प्रक्रियाओं और सबूतों के रखरखाव में निगरानी की कमी
- कानूनी सहायता में कमी: गरीब आरोपियों का अपर्याप्त प्रतिनिधित्व जिससे प्रक्रियात्मक अन्याय हो रहा है
- सुधारात्मक न्याय: गलत तरीके से जेल में बंद पीड़ितों के लिए एक व्यवस्थित मुआवज़ा ढांचा ज़रूरी
मुख्य शब्द: न्यायिक समीक्षा · गलत दोषसिद्धि · कानूनी सहायता · पुलिस जवाबदेही · सिस्टम की विफलता · सुधारात्मक न्याय
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