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भारत का जमीनी सत्य अभिलेख
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भाग I · स्था. 11.2025 
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निर्वाचन आयोग और महाराष्ट्र एवं पश्चिम बंगाल के विधानसभा अध्यक्षों ने राजनीतिक दलों के विभाजन और गुटों की वैधता के समाधान में विधायी बहुमत को निर्णायक कारक के रूप में प्राथमिकता दी है

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चर्चा में क्यों

निर्वाचन आयोग और महाराष्ट्र एवं पश्चिम बंगाल के विधानसभा अध्यक्षों ने राजनीतिक दलों के विभाजन और गुटों की वैधता के समाधान में विधायी बहुमत को निर्णायक कारक के रूप में प्राथमिकता दी है।

पृष्ठभूमि

निर्वाचन आयोग ने दल के संविधान और विधायी शक्ति के आधार पर शिंदे गुट को वास्तविक शिवसेना के रूप में मान्यता प्रदान की। NCP के विभाजन में, विधानसभा में संख्यात्मक बहुमत के कारण अध्यक्ष ने अजीत गुट को वैध इकाई के रूप में मान्यता दी।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • संस्थाElection Commission of India (ECI) राजनीतिक दलों को मान्यता देने और उनके आंतरिक विभाजन की पहचान करने के लिए जिम्मेदार निकाय है।
  • संस्थाविधानसभा के अध्यक्ष के पास विधायकों की सदस्यता और राजनीतिक दलों की मान्यता पर निर्णय लेने का अधिकार होता है।
  • तथ्यवर्तमान में, महाराष्ट्र में गुटबाजी की वैधता निर्धारित करने के लिए EC और Speakers द्वारा विधायी बहुमत (Legislative majority) को प्राथमिक मानक के रूप में उपयोग किया जाता है।

मेन्स के लिए

प्रश्न: स्पष्ट वैधानिक दिशा-निर्देशों के अभाव में, राजनीतिक दलों के विभाजन की वैधता निर्धारित करने में निहित संवैधानिक और कानूनी जटिलताओं का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

पूरा कालक्रम (रिवीजन के लिए) →पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँस्रोत: इंडियन एक्सप्रेस ↗

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।