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भाग I · स्था. 11.2025 
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बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने महाराष्ट्र के जाति सत्यापन कानून की संवैधानिकता को बरकरार रखा है

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चर्चा में क्यों

बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने महाराष्ट्र के जाति सत्यापन कानून की संवैधानिकता को बरकरार रखा है। कोर्ट ने फैसला दिया कि राज्य में केंद्र सरकार के कर्मचारियों को राज्य के कानून के तहत प्रमाण पत्र प्राप्त करना होगा।

पृष्ठभूमि

इसने इस तर्क को खारिज कर दिया कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों की सेवा शर्तों को विनियमित करने के लिए राज्य के पास संघ सूची (Union List) की प्रविष्टि 70 के तहत विधायी अधिकार (Legislative Competence) की कमी है।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • तथ्यसातवीं अनुसूची की यूनियन लिस्ट की एंट्री 70 कर्मचारियों की सेवा शर्तों (service conditions) के नियमन से संबंधित है।
  • स्थानबॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच।

मेन्स के लिए

प्रश्न: संघीय शक्तियों के वितरण के आलोक में केंद्र सरकार के कर्मचारियों की सेवा शर्तों को विनियमित करने वाले राज्य-स्तरीय विधान की संवैधानिक वैधता का विश्लेषण कीजिए।

उत्तर के आयाम

  • संघीय टकराव: सेवा शर्तों को लेकर राज्य विधायी अधिकार और यूनियन लिस्ट एंट्री 70 के बीच विवाद
  • प्रशासनिक जटिलता: राज्य-विशिष्ट वेरिफिकेशन मैंडेट के तहत केंद्र के कर्मचारियों के लिए दोहरी कंप्लायंस ज़रूरतें

मुख्य शब्द: विधायी क्षमता · संघवाद · सातवीं अनुसूची · संवैधानिक वैधता · सेवा की शर्तें

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँनोट्स कैसे बनते हैंस्रोत: द हिंदू ↗यह भी: GS1 · सामाजिक विविधता, जाति एवं जनजातियां

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।