केंद्रीय कैबिनेट ने ईरान युद्ध के बीच पूंजी को आकर्षित करने के लिए भारतीय सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities) में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) द्वारा किए गए निवेश पर कैपिटल गेन्स टैक्स को खत्म करने वाले एक अध्यादेश को मंजूरी दी है
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चर्चा में क्यों
केंद्रीय कैबिनेट ने ईरान युद्ध के बीच पूंजी को आकर्षित करने के लिए भारतीय सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities) में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) द्वारा किए गए निवेश पर कैपिटल गेन्स टैक्स को खत्म करने वाले एक अध्यादेश को मंजूरी दी है।
पृष्ठभूमि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्रीय कैबिनेट ने इनकम टैक्स एक्ट (Income Tax Act) में संशोधन करने वाले एक अध्यादेश को मंजूरी दी है। यह कदम शेयर बाजार से होने वाले पूंजी के बहिर्वाह (outflows) को रोकने के लिए भारतीय सरकारी प्रतिभूतियों में FPI निवेश पर लगने वाले कैपिटल गेन्स टैक्स (Capital Gains Tax) को विशेष रूप से लक्षित करता है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- तथ्यFPI: Foreign Portfolio Investors टैक्स छूट के लिए टारगेट ग्रुप हैं।
- तथ्यइंडियन गवर्नमेंट सिक्योरिटीज (Indian government securities): यह वह विशिष्ट एसेट क्लास (asset class) है जो कैपिटल गेन्स टैक्स (capital gains tax) की छूट के लिए पात्र है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) को आकर्षित करने में राजकोषीय प्रोत्साहनों की भूमिका और वैश्विक भू-राजनीतिक संकटों के दौरान भारत के पूंजी बाजार की स्थिरता पर इसके निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- कैपिटल फ्लाइट रिस्क: भू-राजनीतिक अस्थिरता के दौरान भारतीय स्टॉक मार्केट से FPI की तेज़ी से निकासी को संबोधित करना
- फ़िस्कल ट्रेड-ऑफ़: टैक्स रेवेन्यू के नुकसान और विदेशी कैपिटल इनफ्लो की ज़रूरत के बीच संतुलन
- मार्केट सेंटीमेंट: यील्ड कर्व और घरेलू निवेश व्यवहार पर टैक्स-फ्री सरकारी सिक्योरिटीज का असर
मुख्य शब्द: कैपिटल गेन्स टैक्स · फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स · राजकोषीय नीति · पूंजी का पलायन · भू-राजनीतिक जोखिम
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