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भाग I · स्था. 11.2025 
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RBI की मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee) द्वारा 5 जून को अपनी मौजूदा नीतिगत स्थिति को बनाए रखने की उम्मीद है

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चर्चा में क्यों

RBI की मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee) द्वारा 5 जून को अपनी मौजूदा नीतिगत स्थिति को बनाए रखने की उम्मीद है, जिससे कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद ब्याज दरों में बढ़ोतरी को टालने की संभावना है।

पृष्ठभूमि

MPC कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और भू-राजनीतिक तनाव (geopolitical tensions) के महंगाई और विकास अनुमानों पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन करेगा। रिटेल महंगाई के कम स्तर और वैश्विक जोखिमों के प्रति सतर्क दृष्टिकोण के कारण, RBI से 'वेट-एंड-वॉच' (wait-and-watch) मोड बनाए रखने की उम्मीद है।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • संस्थाMPC: मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee) वह संस्था है जो RBI की मौद्रिक नीति निर्धारित करने के लिए जिम्मेदार है।
  • तथ्यRBI से 5 जून की मीटिंग में मौजूदा पॉलिसी स्टैंड (policy stance) को बरकरार रखने की उम्मीद है।
  • तथ्यकच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बावजूद, रिटेल महंगाई (Retail inflation) को वर्तमान में 'बेनाइन' (benign) बताया जा रहा है।

मेन्स के लिए

प्रश्न: वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच, विकास को बनाए रखते हुए महंगाई नियंत्रण के बीच संतुलन साधने में भारतीय रिज़र्व बैंक के समक्ष आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।

उत्तर के आयाम

  • मौनेटरी-फ़िस्कल कोऑर्डिनेशन: इंटरेस्ट रेट स्थिरता और इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ के लिए कैपिटल की ज़रूरत के बीच संतुलन
  • एक्सटर्नल शॉक की संवेदनशीलता: कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का घरेलू CPI और चालू खाता घाटा पर प्रभाव
  • पॉलिसी ट्रांसमिशन लैग: MPC के रेट फैसलों और रिटेल लेंडिंग रेट्स पर उनके असर के बीच का समय अंतराल

मुख्य शब्द: मौनेटरी पॉलिसी · महंगाई लक्ष्यीकरण · लिक्विडिटी मैनेजमेंट · मैक्रोइकोनॉमिक स्टेबिलिटी · ट्रांसमिशन मैकेनिज्म

पूरा कालक्रम (रिवीजन के लिए) →पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँनोट्स कैसे बनते हैंस्रोत: इंडियन एक्सप्रेस ↗यह भी: GS2 · दूसरे देशों की नीतियों का भारत पर असर

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।