सुप्रीम कोर्ट पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision
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चर्चा में क्यों
सुप्रीम कोर्ट पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है।
पृष्ठभूमि
ECI का दावा है कि SIR के दौरान तमिलनाडु के 95.65% और पश्चिम बंगाल के 99.77% मतदाताओं को पहले से भरे हुए गणना फॉर्म (enumeration forms) दिए गए थे। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि यह कवायद एक राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण में बदल गई है, जिससे मताधिकार से वंचित होने और राज्यविहीनता (statelessness) का जोखिम पैदा हो सकता है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- संस्थाECI: यह वह संस्था है जो वोटर रोल्स के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) के लिए जिम्मेदार है।
- तथ्यतमिलनाडु के 95.65% मतदाताओं को ECI द्वारा पहले से भरे हुए गणना फॉर्म (enumeration forms) दिए गए।
- तथ्यपश्चिम बंगाल के 99.77% मतदाताओं को ECI द्वारा पहले से भरे हुए गणना फॉर्म (enumeration forms) दिए गए।
मेन्स के लिए
प्रश्न: निर्वाचक नामा (voter list) में संशोधन के दौरान पात्र नागरिकों के मताधिकार के हनन को रोकने के लिए आवश्यक संवैधानिक सुरक्षा उपायों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- प्रशासनिक अतिरेक: मतदाता सूची के रखरखाव को व्यापक जनसांख्यिकीय सर्वे में बदलने का जोखिम
- डेटा इंटीग्रिटी: पहले से भरे हुए गणना फॉर्म के ज़रिए व्यवस्थित बहिष्कार की संभावना
- संवैधानिक आदेश: मतदाता सूची बनाए रखने के लिए ECI की शक्ति और वोट देने के अधिकार के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: अधिकारों से वंचित करना · संवैधानिक वैधता · मतदाता सूची पुनरीक्षण · प्रशासनिक पारदर्शिता · राज्यविहीनता
राजव्यवस्था एवं संविधान पर और नोट्स
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