केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने बिजली संशोधन विधेयक (Electricity Amendment Bill) में वितरण कंपनियों (discoms) के नुकसान को कम करने के लिए 'कॉस्ट-रिफ्लेक्टिव टैरिफ' (cost-reflective tariff) की अवधारणा को शामिल करने की घोषणा की
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चर्चा में क्यों
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने बिजली संशोधन विधेयक (Electricity Amendment Bill) में वितरण कंपनियों (discoms) के नुकसान को कम करने के लिए 'कॉस्ट-रिफ्लेक्टिव टैरिफ' (cost-reflective tariff) की अवधारणा को शामिल करने की घोषणा की।
पृष्ठभूमि
बिजली संशोधन विधेयक (Electricity Amendment Bill) का उद्देश्य बिजली आपूर्ति के सभी खर्चों को टैरिफ स्ट्रक्चर (tariff structure) में शामिल करना है। बिजली मंत्रालय ने ड्राफ्ट नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी 2026 (National Electricity Policy 2026) पर भी टिप्पणियाँ मांगी हैं, जो इन लागत-आधारित टैरिफ (cost-reflective tariffs) का समर्थन करती है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- विज्ञान-तकनीकPre-paid स्मार्ट मीटर: Discoms की वित्तीय स्थिति सुधारने और कमर्शियल लॉस (commercial losses) को कम करने के लिए प्रस्तावित तकनीक।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में बिजली वितरण कंपनियों की पुरानी वित्तीय संकट की स्थिति को दूर करने में लागत-आधारित टैरिफ (cost-reflective tariffs) और स्मार्ट मीटरिंग के कार्यान्वयन की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- वित्तीय स्थिरता: डिसकोम के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर और सर्विस क्वालिटी बनाए रखने के लिए ACS-ARR गैप को कम करना
- रेगुलेटरी बाधाएं: लागत के आधार पर तय कीमतों की ज़रूरत और उपभोक्ताओं के लिए सस्ती बिजली की आवश्यकता के बीच संतुलन
- तकनीकी एकीकरण: प्री-पेड स्मार्ट मीटरों को अनिवार्य रूप से अपनाकर कमर्शियल नुकसान को कम करना
मुख्य शब्द: लागत आधारित टैरिफ · AT&C घाटा · डिस्कॉम की वित्तीय स्थिति · स्मार्ट मीटरिंग · इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग
अर्थव्यवस्था पर और नोट्स
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