सुप्रीम कोर्ट बेनजीर हीना द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें उन्होंने 'तलाक-ए-हसन' (मुस्लिम तलाक का एक रूप) की संवैधानिकता को चुनौती दी है
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चर्चा में क्यों
सुप्रीम कोर्ट बेनजीर हीना द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें उन्होंने 'तलाक-ए-हसन' (मुस्लिम तलाक का एक रूप) की संवैधानिकता को चुनौती दी है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।
पृष्ठभूमि
यह याचिका संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 21 और 25 के तहत 'तलाक-ए-हसन' को असंवैधानिक घोषित करने की मांग करती है। कोर्ट ने उन वकीलों के संबंध में चिंता व्यक्त की जो अपने क्लाइंट्स की प्रत्यक्ष भागीदारी के बिना तलाक की प्रक्रिया पूरी कर देते हैं।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- संविधानअनुच्छेद 14: समानता का अधिकार (Right to Equality)।
- संविधानअनुच्छेद 15: भेदभाव का निषेध।
- तथ्यतलाक-ए-हसन: भारत में मुस्लिमों के बीच तलाक का एक विशिष्ट रूप जो ट्रिपल तलाक (Triple Talaq) से अलग है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में धार्मिक व्यक्तिगत कानूनों और लैंगिक समानता तथा व्यक्तिगत गरिमा की संवैधानिक गारंटी के बीच उत्पन्न होने वाले अंतर्विरोधों का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- संवैधानिक टकराव: आर्टिकल 25 (धार्मिक स्वतंत्रता) के साथ आर्टिकल 14 (समानता) और आर्टिकल 21 (व्यक्तिगत स्वतंत्रता) के बीच संतुलन
- न्यायिक निगरानी: आधुनिक मानवाधिकार मानकों के अनुरूप व्यक्तिगत कानूनों में सुधार में न्यायपालिका की भूमिका
मुख्य शब्द: पर्सनल लॉ · जेंडर जस्टिस · संवैधानिक नैतिकता · न्यायिक समीक्षा · मौलिक अधिकार
भारतीय समाज पर और नोट्स
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।