सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस यशवंत वर्मा द्वारा दायर एक याचिका को खारिज कर दिया है
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चर्चा में क्यों
सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस यशवंत वर्मा द्वारा दायर एक याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें लोकसभा स्पीकर द्वारा जले हुए नोटों के आरोपों की जांच के लिए 'एकतरफा' तरीके से बनाई गई जांच समिति को चुनौती दी गई थी।
पृष्ठभूमि
जस्टिस दिपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली एक बेंच ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा द्वारा दायर याचिका की समीक्षा की। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अपने परिसर में मिले जले हुए नोटों की जांच के लिए एक समिति का गठन किया।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- पदजस्टिस दिपांकर दत्ता: सुप्रीम कोर्ट की उस बेंच की अध्यक्षता की थी जिसने याचिका को खारिज कर दिया था।
- तथ्यसुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर जज को हटाने का निर्णय लेने का अंतिम अधिकार संसद के पास है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: संसदीय कार्यवाही में अध्यक्ष की विवेकाधीन शक्तियों की सीमा और ऐसे प्रशासनिक निर्णयों पर न्यायिक निरीक्षण के दायरे का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- संस्थागत स्वायत्तता: स्पीकर के आंतरिक अधिकार और प्रक्रियात्मक निष्पक्षता के सिद्धांत के बीच संतुलन
- जुडिशियल डिफरेंस: संसद के आंतरिक प्रशासनिक कार्यों पर जुडिशियल रिव्यू की सीमाएं
- जवाबदेही तंत्र: न्यायिक अधिकारियों वाले जांच कमेटियों के गठन में पारदर्शिता सुनिश्चित करना
मुख्य शब्द: न्यायिक समीक्षा · संसदीय विशेषाधिकार · प्रक्रियात्मक शुद्धता · शक्तियों का पृथक्करण · प्रशासनिक विवेकाधिकार
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।