बिहार के रानिवास माउंड को राष्ट्रीय महत्व की पुरातात्विक साइट घोषित किया
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चर्चा में क्यों
संस्कृति मंत्रालय ने एक राजपत्र अधिसूचना (Gazette Notification) के माध्यम से बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में स्थित रानीवास माउंड को राष्ट्रीय महत्व का पुरातात्विक स्थल घोषित किया है।
पृष्ठभूमि
रानीवास माउंड बिहार के पूर्वी चंपारण स्थित केसरिया में स्थित है और यह 1.63 एकड़ के क्षेत्र में फैला हुआ है। वर्ष 2021 की एक सिफारिश और 4 नवंबर, 2026 को जारी एक अधिसूचना के बाद इसे राष्ट्रीय महत्व का स्थल घोषित किया गया था।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- स्थानरानीवास माउंड बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में स्थित है।
- संस्थाआर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) वह संस्था है जो पूरे भारत में फैले 3,686 साइट्स की देखभाल के लिए जिम्मेदार है।
- अधिनियम / विधेयकप्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल और अवशेष (AMASR) Act, 1958, राष्ट्रीय महत्व के स्थलों की घोषणा को नियंत्रित करता है।
- तथ्यरानीवास माउंड साइट 1.63 एकड़ के क्षेत्र में फैली हुई है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में राष्ट्रीय महत्व के पुरातात्विक स्थलों की घोषणा के महत्व और इस प्रक्रिया में 'अमरावती स्मारक और पुरातत्व स्थल और अवशेष अधिनियम' (AMASR Act) की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- संरक्षण बनाम विकास: पुरातात्विक स्थलों की सुरक्षा और क्षेत्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर व भूमि उपयोग की जरूरतों के बीच संतुलन
- संस्थागत ढांचा: साइट सुरक्षा के लिए क्षेत्रीय ASI सर्कल की सिफारिशों से केंद्रीय गजट नोटिफिकेशन तक की प्रक्रियात्मक प्रक्रिया
मुख्य शब्द: सांस्कृतिक विरासत · आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया · AMASR एक्ट · हेरिटेज कंजर्वेशन · साइट संरक्षण
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।