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भारत का जमीनी सत्य अभिलेख
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भाग I · स्था. 11.2025 
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UNESCO ने भगवद गीता और नाट्यशास्त्र को मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर में शामिल किया

GS1इतिहास · समाज · भूगोल· कला, स्थापत्य एवं संस्कृति· प्रीलिम्स·

चर्चा में क्यों

UNESCO ने भगवद गीता और भरत मुनि के नाट्यशास्त्र की पांडुलिपियों को अपने 'मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड' रजिस्टर में शामिल किया है, जिससे भारत के कुल पंजीकरण की संख्या बढ़कर 14 हो गई है।

पृष्ठभूमि

UNESCO ने 17 अप्रैल को इन पांडुलिपियों को शामिल किया, जिससे रजिस्टर में दर्ज कुल संग्रहों की संख्या बढ़कर 570 हो गई। इस अपडेट में वैज्ञानिक क्रांति (Scientific Revolution) और बहुपक्षवाद (multilateralism) से संबंधित 72 देशों के प्रविष्टियों को भी शामिल किया गया।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • संस्थामेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर (Memory of the World Register): दस्तावेजी विरासत को संरक्षित करनेके लिए एक UNESCO पहल।
  • तथ्यमेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर (Memory of the World Register) में भारत की कुल प्रविष्टियां: 14।
  • तथ्यरजिस्टर में कुल दर्ज संग्रह: 570।
  • स्थाननाट्यशास्त्र: इसका श्रेय भरत मुनि को दिया जाता है।

मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और सॉफ्ट पावर को बढ़ावा देने में स्वदेशी पांडुलिपियों की अंतर्राष्ट्रीय मान्यता के महत्व पर चर्चा कीजिए।

उत्तर के आयाम

  • सांस्कृतिक डिप्लोमेसी: भारत की सभ्यतागत गहराई को वैश्विक स्तर पर दिखाने के लिए प्राचीन ग्रंथों का इस्तेमाल
  • संरक्षण नैतिकता: पवित्र पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण और उनकी भौतिक अखंडता के बीच संतुलन
  • सॉफ्ट पावर प्रोजेक्शन: मल्टीलैटरल फ़ोरम में भारत के सांस्कृतिक प्रभाव को बढ़ाने के लिए UNESCO की मान्यता का इस्तेमाल

मुख्य शब्द: सांस्कृतिक विरासत · सॉफ्ट पावर · अमूर्त विरासत · दस्तावेज़ीकरण · सभ्यतागत निरंतरता

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँनोट्स कैसे बनते हैंस्रोत: द हिंदू ↗यह भी: GS2 · अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं एवं एजेंसियां (UN, WTO, IMF...)

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।