ISRO ने NavIC में जोड़ा NVS-03 सैटेलाइट, भारत की सीमा से 1500 km बाहर तक कवरेज
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चर्चा में क्यों
ISRO ने क्षेत्रीय नेविगेशन क्षमताओं को बढ़ाने और व्यापक कवरेज के लिए NVS-03 सैटेलाइट को NavIC सिस्टम में सफलतापूर्वक शामिल किया है।
पृष्ठभूमि
NVS-03, भारतीय क्षेत्रीय नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (IRNSS) के लिए पांच अगली पीढ़ी के उपग्रहों में से तीसरा है। इस उपग्रह का पेलोड L1, L5 और एस. बैंड में काम करता है, जो भारत की सीमाओं से 1500 किमी आगे तक कवरेज प्रदान करता है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- विज्ञान-तकनीकNVS-03: NavIC सिस्टम में जोड़े गए पांच अगली पीढ़ी के सैटेलाइट्स में से तीसरा।
- तथ्यNavIC कवरेज: भारत की सीमाओं से 1500 किमी आगे तक विस्तृत है।
- विज्ञान-तकनीकNavIC पेलोड: यह L1, L5 और एस. बैंड्स में काम करता है।
- संस्थाIRNSS: इंडियन रीजनल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (Indian Regional Navigation Satellite System)।
मेन्स के लिए
प्रश्न: नविक (NavIC) जैसी क्षेत्रीय नेविगेशन प्रणालियों के विस्तार से भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और समुद्री सुरक्षा को मिलने वाले योगदान पर चर्चा कीजिए।
उत्तर के आयाम
- स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी: GPS या GLONASS जैसे विदेशी GNSS सिस्टम्स पर निर्भरता कम करना
- प्रिसिजन नेविगेशन: भारतीय महासागर क्षेत्र में आपदा प्रबंधन और समुद्री निगरानी के लिए सटीकता बढ़ाना
मुख्य शब्द: रणनीतिक स्वायत्तता · क्षेत्रीय नेविगेशन · सैटेलाइट पेलोड · समुद्री सुरक्षा · तकनीकी संप्रभुता
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर और नोट्स
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।