सेंट-गोबेन इंडिया और IIT-मद्रास मिलकर बनाएंगे 2 रिसर्च लैब
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सतत बुनियादी ढांचे (Sustainable Infrastructure) के लिए R&D में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-private partnerships): एक GS3 विज्ञान और प्रौद्योगिकी (Science & Technology) केस स्टडी।
चर्चा में क्यों
सेंट-गोबेन इंडिया और IIT-मद्रास टिकाऊ निर्माण सामग्री (sustainable construction materials) और डिजिटल तकनीकों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए दो अनुसंधान प्रयोगशालाएं (DRSTI और CAREN) स्थापित कर रहे हैं।
पृष्ठभूमि
यह परियोजना तीन साल की अवधि के लिए ₹3.8 करोड़ के अनुदान (Grant) द्वारा समर्थित है। प्रयोगशालाएं IIT-मैड्रस स्थित 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑन टेक्नोलॉजीज फॉर लो-कार्बन एंड लीन कंस्ट्रक्शन' में स्थापित की जाएंगी।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- संस्थाIIT-Madras, रिसर्च लैब्स स्थापित करने के लिए Saint-Gobain India के साथ सहयोग कर रहा है।
- तथ्यइस प्रोजेक्ट को तीन साल की अवधि के लिए ₹3.8 करोड़ के ग्रांट (grant) का समर्थन प्राप्त है।
- तथ्यइन लैब्स के नाम DRSTI और CAREN हैं।
- स्थानये लैब्स 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑन टेक्नोलॉजीज फॉर लो-कार्बन एंड लीन कंस्ट्रक्शन' (Centre of Excellence on Technologies for Low-carbon and Lean Construction) में स्थित होंगे।
प्रीलिम्स अभ्यास प्रश्न
Saint-Gobain India और IIT-Madras द्वारा स्थापित रिसर्च लैब्स (research labs) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- इन प्रयोगशालाओं के नाम DRSTI और CAREN हैं।
- इस प्रोजेक्ट को तीन साल की अवधि के लिए ₹5 करोड़ के ग्रांट (grant) से समर्थन दिया गया है।
- ये लैब्स 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑन टेक्नोलॉजीज फॉर हाई-कार्बन कंस्ट्रक्शन' (Centre of Excellence on Technologies for High-carbon Construction) में स्थित होंगे।
- (a)केवल 1
- (b)केवल 3
- (c)केवल 1 और 2
- (d)केवल 2 और 3
उत्तर देखें
उत्तर: (a) केवल 1 — कथन 1 सही है। कथन 2 गलत है: इस प्रोजेक्ट को ₹3.8 करोड़ के ग्रांट (grant) का समर्थन प्राप्त है। कथन 3 गलत है: ये लैब्स सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑन टेक्नोलॉजीज फॉर लो-कार्बन एंड लीन कंस्ट्रक्शन (Centre of Excellence on Technologies for Low-carbon and Lean Construction) में स्थित हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत के बुनियादी ढांचा क्षेत्र में सतत निर्माण सामग्री और डिजिटल प्रौद्योगिकियों को अपनाने में अनुसंधान एवं विकास (R&D) हेतु सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) किस प्रकार गति प्रदान कर सकती है, इसका विश्लेषण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- R&D सिनर्जी: मटेरियल एफिशिएंसी के लिए एकेडमिक रिसर्च और इंडस्ट्रियल एप्लीकेशन के बीच तालमेल
- सस्टेनेबिलिटी ट्रांज़िशन: लो-कार्बन मटेरियल इनोवेशन के ज़रिए कंस्ट्रक्शन में कार्बन फुटप्रिंट कम करना
- डिजिटल इंटीग्रेशन: डिजिटल टेक्नोलॉजी अपनाने से स्ट्रक्चरल ड्यूरेबिलिटी और प्रोडक्टिविटी को बढ़ावा देना
मुख्य शब्द: पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप · सस्टेनेबल कंस्ट्रक्शन · लो-कार्बन मैटेरियल्स · अनुसंधान और विकास · डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर और नोट्स
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।