आयरन ओर ट्रेड के लिए PTC इंडिया ने किया 65 करोड़ का निवेश
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खनिज शासन और बाजार का औपचारिकीकरण (Market Formalization): आर्थिक बुनियादी ढांचे से संबंधित एक प्रासंगिक GS3 विषय।
चर्चा में क्यों
खान मंत्रालय और इंडियन ब्यूरो ऑफ माइन्स ने लौह अयस्क जैसे खनिजों के इलेक्ट्रॉनिक डिलीवरी-आधारित व्यापार को सुगम बनाने के लिए खनिज एक्सचेंजों (mineral exchanges) हेतु एक नियामक ढांचा स्थापित किया है।
पृष्ठभूमि
PTC India ने खनिज व्यापार के लिए एक सहायक कंपनी में ₹65 करोड़ का निवेश किया है। वहीं, MCXI ने MCX Mineral Exchange of India Limited की स्थापना की है। ये प्लेटफॉर्म शुरुआत में लौह अयस्क (iron ore), बॉक्साइट, चूना पत्थर और मैंगनीज अयस्क का व्यापार करेंगे।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- संस्थाइंडियन ब्यूरो ऑफ माइन्स (IBM) वह संस्था है जो मिनरल एक्सचेंज रेगुलेटरी फ्रेमवर्क (mineral exchange regulatory framework) स्थापित करने के लिए जिम्मेदार है।
- अधिनियम / विधेयकMineral Exchange Rules, 2026 को Mines and Minerals (Development and Regulation) Act के तहत स्थापित किया गया था।
- तथ्यPTC India ने मिनरल एक्सचेंज प्लेटफॉर्म्स के लिए एक सब्सिडियरी (subsidiary) में ₹65 करोड़ का निवेश किया।
- तथ्यव्यापार के लिए शुरुआती खनिज में आयरन ओर (iron ore), बॉक्साइट (bauxite), लाइमस्टोन (limestone) और मैंगनीज ओर (manganese ore) शामिल हैं।
प्रीलिम्स अभ्यास प्रश्न
भारत में खनिज विनिमय नियामक ढांचे (mineral exchange regulatory framework) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- मिनरल एक्सचेंज रूल्स (Mineral Exchange Rules), 2026 को माइन्स एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट (Mines and Minerals (Development and Regulation) Act) के तहत स्थापित किया गया था।
- PTC India ने मिनरल एक्सचेंज प्लेटफॉर्म्स के लिए एक सब्सिडियरी में ₹100 करोड़ का निवेश किया।
- इंडियन ब्यूरो ऑफ माइन्स (Indian Bureau of Mines) वह संस्था है जो रेगुलेटरी फ्रेमवर्क (regulatory framework) स्थापित करने के लिए जिम्मेदार है।
- (a)केवल 1
- (b)केवल 3
- (c)केवल 1 और 3
- (d)केवल 2 और 3
उत्तर देखें
उत्तर: (c) केवल 1 और 3 — कथन 1 और 3 सही हैं। कथन 2 गलत है: PTC India ने ₹65 करोड़ का निवेश किया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में इलेक्ट्रॉनिक खनिज एक्सचेंजों की स्थापना किस प्रकार पारदर्शिता को बढ़ाने और खनिज व्यापार पारिस्थितिकी तंत्र को औपचारिक रूप देने में सहायक हो सकती है, चर्चा कीजिए।
उत्तर के आयाम
- मार्केट ट्रांसपेरेंसी: इलेक्ट्रॉनिक डिलीवरी-आधारित प्लेटफॉर्म के जरिए अपारदर्शी ऑफलाइन ट्रांजेक्शन को कम करना
- रेगुलेटरी ओवरसाइट: खनिज प्रवाह पर इंडियन ब्यूरो ऑफ माइन्स की निगरानी क्षमताओं को मजबूत करना
- सप्लाई चेन फॉर्मलाइजेशन: कारीगरों और छोटे पैमाने की माइनिंग आउटपुट को संगठित मार्केट स्ट्रक्चर में जोड़ना
मुख्य शब्द: बाज़ार में पारदर्शिता · रेगुलेटरी फ्रेमवर्क · औपचारिकीकरण · इलेक्ट्रॉनिक डिलीवरी · खनिज शासन
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।