वंदे मातरम पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया
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धर्मनिरपेक्षता और अल्पसंख्यक अधिकार: राज्य द्वारा अनिवार्य धार्मिक प्रतीकों पर GS1 और GS2 का एक केस स्टडी।
चर्चा में क्यों
सुप्रीम कोर्ट ने 2026 से लागू होने वाले उन सरकारी आदेशों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है, जिनमें 'वन्दे मातरम' के छह छंदों वाले संस्करण को अनिवार्य करने का निर्देश दिया गया है।
पृष्ठभूमि
ये याचिकाएं बी.डी. बोरकर और पूर्व आईएएस अधिकारी बालकृष्ण सत्यभामा मवोजी द्वारा 28 जनवरी और 9 जुलाई, 2026 के सरकारी आदेशों के खिलाफ दायर की गई हैं। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि 'आनंदमथ' का छह छंदों वाला संस्करण धर्मतंत्र (theocracy) को बढ़ावा देता है और अल्पसंख्यकों की धार्मिक भावनाओं को आहत करता है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- तथ्यछह छंदों वाला वंदे मातरम मूल रूप से बैंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा उनके उपन्यास 'आनंदमथ' में पेश किया गया था।
- तथ्यवंदे मातरम के दो छंदों वाले संस्करण का उपयोग स्वतंत्रता से लेकर 2026 के ऑर्डर्स (orders) तक शांतिपूर्ण तरीके से किया गया।
- संस्थासुप्रीम कोर्ट की बेंच की अध्यक्षता भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने की।
- तथ्ययाचिकाकर्ता तर्क देते हैं कि छह छंदों वाला संस्करण एक विशेष धर्म की देवियों के लिए एक 'सांप्रदायिक प्रार्थना' (sectarian prayer) है।
प्रीलिम्स अभ्यास प्रश्न
किस साहित्यिक कृति में मूल रूप से वंदे मातरम का छह छंदों वाला संस्करण पेश किया गया था?
- (a)आनंदमथ
- (b)सत्यर्थ प्रकाश
- (c)भारत की अर्थव्यवस्था में गिरावट
- (d)गीतांजलि
उत्तर देखें
उत्तर: (a) आनंदमथ — नोट के अनुसार, छह छंदों वाला संस्करण मूल रूप से बैंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा उनके उपन्यास आनंदमथ में पेश किया गया था।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत के धर्मनिरपेक्ष ढांचे और अल्पसंख्यक समुदायों के मौलिक अधिकारों पर राज्य द्वारा अनिवार्य धार्मिक प्रतीकों या ग्रंथों के संवैधानिक निहितार्थों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- संवैधानिक टकराव: राष्ट्रीय प्रतीकों को बढ़ावा देने के लिए राज्य के अधिकार और धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार के बीच संतुलन
- सामाजिक एकजुटता: जब सरकारी कार्रवाइयों को किसी प्रभावशाली समुदाय की धार्मिक भावनाओं के पक्ष में देखा जाता है, तो सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का खतरा पैदा होता है
- कानूनी व्याख्या: यह तय करना कि क्या किसी राष्ट्रीय गीत की सामग्री को धर्मनिरपेक्षता का उल्लंघन करने वाली 'सांप्रदायिक प्रार्थना' के रूप में कानूनी रूप से वर्गीकृत किया जा सकता है
मुख्य शब्द: धर्मनिरपेक्षता · मौलिक अधिकार · सांप्रदायिक सद्भाव · राज्य नीति · संवैधानिक वैधता
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।