सत्याधीशसत्याधीश
SatyaDheesh
भारत का जमीनी सत्य अभिलेख
ताज़ा करने के लिए खींचें
भाग I · स्था. 11.2025 
SatyaDheesh
सत्याधीश
भारत का जमीनी सत्य अभिलेख
लाइव

उत्तर भारत में बढ़ रही गर्मी और सूखा, इंडिया मेट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट की रिपोर्ट

GS3अर्थव्यवस्था · विज्ञान-तकनीक · पर्यावरण · सुरक्षा· जलवायु परिवर्तन एवं अंतर्राष्ट्रीय समझौते· प्रीलिम्स + मेन्स·

जलवायु परिवर्तन और ज़ोन शिफ्ट (Zone shifts): GS3 पर्यावरण और कृषि से संबंधित एक महत्वपूर्ण केस स्टडी।

चर्चा में क्यों

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने 'मौसम' में प्रकाशित एक अध्ययन में बताया है कि 1951-1980 और 1991-2020 के बीच उत्तर भारत की जलवायु अधिक गर्म और शुष्क होती गई है।

पृष्ठभूमि

अध्ययन 'Identifying the climate zones shifts of Indian meteorological subdivisions' में लगातार 30 वर्षों की अवधि के लिए भारत के जलवायु मानचित्र को फिर से तैयार करने हेतु IMD के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है। इस अध्ययन में चार प्राथमिक क्षेत्रों की पहचान की गई है: गर्म अर्ध-शुष्क (hot semi-arid), उष्णकटिबंधीय सवाना (tropical savannah), उष्णकटिबंधीय मानसून (tropical monsoon) और समशीतोष्ण (temperate)।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • तथ्यउसी अवधि के दौरान प्रायद्वीपीय भारत में गर्म अर्ध-शुष्क क्षेत्र (Hot semi-arid zone) 30% से घटकर 16% रह गया।
  • स्थानगर्म अर्ध-शुष्क क्षेत्र (hot semi-arid zone) पूर्व की ओर विस्तार पाकर पूर्वी उत्तर प्रदेश में फैल गया।
  • तथ्यट्रॉपिकल सवाना ज़ोन (Tropical savannah zone) अब प्रायद्वीपीय भारत के तीन-चौथाई हिस्से को कवर करता है।
  • संस्थाMausam, इंडिया मेट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट (IMD) की एक peer-reviewed जर्नल है।

प्रीलिम्स अभ्यास प्रश्न

IMD के अध्ययन के अनुसार, किस विशिष्ट क्षेत्र में हॉट सेमी-एरिड ज़ोन (hot semi-arid zone) का पूर्व की ओर विस्तार देखा गया?

  1. (a)पूर्वी गुजरात
  2. (b)पूर्वी उत्तर प्रदेश
  3. (c)दक्षिणी केरल
  4. (d)पश्चिमी राजस्थान
उत्तर देखें

उत्तर: (b) पूर्वी उत्तर प्रदेश — अध्ययन में पाया गया कि गर्म अर्ध-शुष्क क्षेत्र (semi-arid zone) पूर्व की ओर उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्से में फैल गया है।

मेन्स के लिए

प्रश्न: उत्तर भारत में बदलते जलवायु क्षेत्रों के कृषि उत्पादकता और जल सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभावों की चर्चा कीजिए।

उत्तर के आयाम

  • कृषि संवेदनशीलता: उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्से में गर्म अर्ध-शुष्क क्षेत्रों का विस्तार पारंपरिक बुवाई और कटाई चक्र के लिए खतरा
  • हाइड्रोलॉजिकल स्ट्रेस: उत्तर में सूखे क्षेत्रों के विस्तार के कारण मुख्य फसलों के लिए सिंचाई रणनीतियों में बदलाव ज़रूरी
  • क्षेत्रीय अंतर: प्रायद्वीपीय भारत में गीला होने के रुझान बनाम उत्तर में सूखने के रुझान असमान क्लाइमेट अडैप्टेशन जरूरतों को पैदा करते हैं

मुख्य शब्द: क्लाइमेट ज़ोन में बदलाव · अर्ध-शुष्क क्षेत्रों का विस्तार · मौसम विज्ञान उपखंड · कृषि लचीलापन · क्लाइमेट मैपिंग

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँनोट्स कैसे बनते हैंस्रोत: एनडीटीवी ↗यह भी: GS1 · भौतिक भूगोल (भू-आकृतियां, महासागर, जलवायु)यह भी: GS3 · फसल पैटर्न एवं सिंचाई

पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी पर और नोट्स

सभी पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी करेंट अफेयर्स →

कोई गलती या कोई कमी?

किसी नोट में गलती दिखे, या तैयारी के लिए कोई टॉपिक, फॉर्मेट या पीडीएफ चाहिए, तो हमें लिखें। हम हर मेल पढ़ते हैं और गलतियाँ जल्दी ठीक करते हैं।

गलती बताएँ →कुछ और चाहिए? बताएँ →[email protected]

यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।