RBI ने रेपो रेट बढ़ाकर 5.50% किया, EMI में 769 रुपये तक का इजाफा संभव
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मौद्रिक नीति और घरेलू ऋण की गतिशीलता पर इसका सीधा प्रभाव: एक GS3 अर्थव्यवस्था केस स्टडी।
चर्चा में क्यों
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने कर्ज की लागत और महंगाई को नियंत्रित करने के लिए रेपो रेट (repo rate) में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की है, जिससे यह अब 5.50% हो गया है।
पृष्ठभूमि
RBI ने अक्टूबर 2026 में रेपो रेट (repo rate) को 5.25% से बढ़ाकर 5.50% कर दिया। 8.75% की ब्याज दर पर 50 लाख रुपये के ऋण के लिए, EMI में होने वाली वृद्धि का अनुमान लगभग 769 रुपये लगाया गया है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- तथ्यRBI ने अक्टूबर 2026 में रेपो रेट (repo rate) को 25 बेसिस पॉइंट (basis points) बढ़ाकर 5.50% कर दिया।
- संस्थाभारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) वह सेंट्रल बैंक है जो मौद्रिक नीति (Monetary Policy) के लिए ज़िम्मेदार है।
- तथ्य8.75% ब्याज दर पर लिए गए 50 लाख रुपये के लोन की EMI, रेट हाइक के कारण 769 रुपये बढ़ गई।
प्रीलिम्स अभ्यास प्रश्न
अक्टूबर 2026 में RBI की पॉलिसी रेपो रेट में कितने बेसिस पॉइंट (basis point) की वृद्धि की गई थी?
- (a)50 बेसिस पॉइंट
- (b)75 बेसिस पॉइंट
- (c)25 बेसिस पॉइंट
- (d)15 बेसिस पॉइंट
उत्तर देखें
उत्तर: (c) 25 बेसिस पॉइंट — RBI ने रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50% के स्तर पर पहुँचा दिया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारतीय उधारकर्ताओं के लिए ऋण अवधि और ब्याज लागत के बीच के अंतर्विरोध तथा घरेलू ऋण की गतिशीलता पर रेपो रेट के उतार-चढ़ाव के प्रभाव का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- मौनेटरी ट्रांसमिशन: रेपो रेट से रिटेल होम लोन EMI तक ब्याज दर पहुँचने में देरी
- कर्ज चुकाने का दबाव: फ्लोटिंग इंटरेस्ट रेट्स का घरेलू विवेकाधीन खर्च और बचत पर असर
- लिक्विडिटी मैनेजमेंट: हाई EMI के जरिए कुल ब्याज कम करना या मंथली कैश फ्लो बनाए रखना
मुख्य शब्द: रेपो रेट · मौनेटरी पॉलिसी · ईएमआई · फ्लोटिंग इंटरेस्ट रेट · कर्ज की अदायगी · लिक्विडिटी
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।