बिना लिखित प्रोटोकॉल के 1,82,000 से ज़्यादा वोटरों के नाम हटाए गए
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चर्चा में क्यों
दिल्ली, UP, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल में चुनाव अधिकारियों ने भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) से लिखित प्रोटोकॉल प्राप्त किए बिना, ERONet सॉफ्टवेयर का उपयोग करके 1,82,000 से अधिक मतदाताओं को हटा दिया।
पृष्ठभूमि
अधिकारियों ने विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) के दौरान डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित फॉर्म 7 को ऑटो-जेनरेट करने के लिए ERONet सॉफ्टवेयर का उपयोग किया। इस प्रक्रिया के दौरान उत्तर प्रदेश में 87,000 से अधिक नाम और उत्तराखंड में 95,000 से अधिक नाम हटा दिए गए।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- तथ्यवोटर डिलीट करने के लिए डिजिटली साइन किए गए Form 7 को ऑटो-जेनरेट करने के लिए ERONet सॉफ्टवेयर का उपयोग किया गया।
- तथ्यदिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल में 1,82,000 से अधिक मतदाताओं के नाम हटा दिए गए।
- तथ्यनियमों के अनुसार, अधिकारी भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) से लिखित प्रोटोकॉल के बिना Form 7 फाइल नहीं कर सकते।
मेन्स के लिए
प्रश्न: मतदाता सूची के डिजिटल प्रबंधन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और अनधिकृत मतदाता विलोपन को रोकने के लिए आवश्यक प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- प्रक्रियात्मक चूक: चुनाव आयोग के आधिकारिक लिखित प्रोटोकॉल के बिना ऑटोमेटेड सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल
- डेटा इंटीग्रिटी: ऑटो-जेनरेटेड डिजिटल सिग्नेचर के जरिए मतदाता सूची से नाम हटाने के जोखिम
- अकाउंटेबिलिटी गैप: विशेष गहन पुनरीक्षण के राज्य-स्तरीय कार्यान्वयन में निगरानी की कमी
मुख्य शब्द: मतदाता सूची · पारदर्शिता · डिजिटल गवर्नेंस · प्रक्रियात्मक अखंडता · भारत निर्वाचन आयोग
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।