सत्याधीशसत्याधीश
SatyaDheesh
भारत का जमीनी सत्य अभिलेख
ताज़ा करने के लिए खींचें
भाग I · स्था. 11.2025 
SatyaDheesh
सत्याधीश
भारत का जमीनी सत्य अभिलेख
लाइव

पल्लिकरनई मार्शलैंड पर कंस्ट्रक्शन बैन से बचने के लिए TNSWA का प्रस्ताव

GS3अर्थव्यवस्था · विज्ञान-तकनीक · पर्यावरण · सुरक्षा· प्रदूषण (वायु, जल, प्लास्टिक)· प्रीलिम्स + मेन्स·

शहरी आर्द्रभूमि (Wetland) संरक्षण बनाम बुनियादी ढांचा विकास: एक GS3 पर्यावरण और पारिस्थितिकी (Environment and Ecology) केस स्टडी।

चर्चा में क्यों

तमिलनाडु स्टेट वेटलैंड्स अथॉरिटी (TNSWA) ने पल्लिकरनई मार्शलैंड के पास नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) द्वारा निर्माण पर लगाए गए प्रतिबंध के प्रभाव को कम करने के लिए 128.19 हेक्टेयर के एक अंतरिम ज़ोन ऑफ इन्फ्लुएंस (Zone of Influence) का प्रस्ताव दिया है।

पृष्ठभूमि

यह प्रस्ताव 36 सर्वे नंबरों में फैले 128.19 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करता है। यह रिपोर्ट राज्य सरकार के प्रतिनिधियों और CREDAI द्वारा मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्मधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की बेंच के समक्ष प्रस्तुत की गई थी।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • स्थानपल्लिकरनई मार्शलैंड (Pallikaranai marshland) तमिलनाडु में स्थित है।
  • संस्थाTNSWA: तमिलनाडु स्टेट वेटलैंड्स अथॉरिटी (Tamil Nadu State Wetlands Authority)।
  • तथ्यप्रस्तावित इंटरिम ज़ोन ऑफ इन्फ्लुएंस (Zone of Influence) 128.19 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करता है।
  • संस्थाNGT: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (National Green Tribunal)।

प्रीलिम्स अभ्यास प्रश्न

पल्लिकरनई मार्शलैंड (Pallikaranai marshland) और TNSWA के प्रस्ताव के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. TNSWA ने 150 हेक्टेयर को कवर करने वाले एक इंटरिम ज़ोन ऑफ इन्फ्लुएंस (Zone of Influence) का प्रस्ताव दिया।
  2. यह प्रस्ताव नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (National Green Tribunal) को भेजा गया था।
  3. पल्लिकरनई मार्शलैंड (Pallikaranai marshland) तमिलनाडु राज्य में स्थित है।
  1. (a)केवल 1
  2. (b)केवल 3
  3. (c)केवल 1 और 3
  4. (d)केवल 2 और 3
उत्तर देखें

उत्तर: (d) केवल 2 और 3 — कथन 2 और 3 सही हैं। कथन 1 गलत है: प्रस्तावित इंटरिम ज़ोन ऑफ़ इन्फ्लुएंस (Zone of Influence) 128.19 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करता है।

मेन्स के लिए

प्रश्न: तेजी से विस्तारित होते महानगरीय क्षेत्रों में शहरी बुनियादी ढांचे के विकास और शहरी आर्द्रभूमि एवं जैव विविधता के संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।

उत्तर के आयाम

  • रेगुलेटरी फ्रिक्शन: NGT के पर्यावरण संबंधी आदेश और शहरी रियल एस्टेट विकास की जरूरतों के बीच टकराव
  • पारिस्थितिक गिरावट: दलदली ज़मीनों पर अतिक्रमण के कारण कार्बन सिंक और बाढ़-निवारण क्षमता का नुकसान

मुख्य शब्द: शहरी वेटलैंड्स · पर्यावरण गवर्नेंस · सतत विकास · जैव विविधता संरक्षण

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँनोट्स कैसे बनते हैंस्रोत: द हिंदू ↗यह भी: GS1 · चर्चित स्थान / मानचित्र

पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी पर और नोट्स

सभी पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी करेंट अफेयर्स →

कोई गलती या कोई कमी?

किसी नोट में गलती दिखे, या तैयारी के लिए कोई टॉपिक, फॉर्मेट या पीडीएफ चाहिए, तो हमें लिखें। हम हर मेल पढ़ते हैं और गलतियाँ जल्दी ठीक करते हैं।

गलती बताएँ →कुछ और चाहिए? बताएँ →[email protected]

यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।