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भारत का जमीनी सत्य अभिलेख
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भाग I · स्था. 11.2025 
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2037 तक 230 वॉरशिप और सबमरीन बनाएगी इंडियन नेवी

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रक्षा बुनियादी ढांचा और आत्मनिर्भरता: स्वदेशी विनिर्माण और R&D पर GS3 केस स्टडी।

चर्चा में क्यों

भारतीय नौसेना ने 2037 तक 230 सरफेस कॉम्बैटेंट्स (surface combatants) और पनडुब्बियों के निर्माण का लक्ष्य रखा है, जिसके लिए आत्मनिर्भरता हासिल करने हेतु स्वदेशी मरीन प्रोपल्शन सिस्टम (marine propulsion systems) की ओर बदलाव आवश्यक है।

पृष्ठभूमि

भारतीय नौसेना का लक्ष्य 2037 तक 230 सतह के युद्धपोत (surface combatants) और पनडुब्बियों का निर्माण करना है। वर्तमान में, भारत गैस टर्बाइन, गियरबॉक्स और शाफ्टिंग जैसे महत्वपूर्ण घटकों के लिए विदेशी तकनीक पर निर्भर है।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • तथ्यलक्ष्य: 2037 तक 230 सरफेस कॉम्बैटेंट्स (surface combatants) और सबमरीन (submarines) का निर्माण करना।
  • विज्ञान-तकनीकKaveri Marine Gas Turbine: भारतीय नौसेना के लिए एक प्रमुख स्वदेशी प्रोपल्शन सिस्टम (propulsion system)।
  • संस्थाDRDO: कावेरी मरीन गैस टरबाइन और IEP सिस्टम्स के लिए R&D का नेतृत्व करने का प्रस्ताव।

प्रीलिम्स अभ्यास प्रश्न

Kaveri Marine Gas Turbine और IEP सिस्टम्स के लिए R&D का नेतृत्व करने के लिए किस संगठन का प्रस्ताव है?

  1. (a)ISRO
  2. (b)DRDO
  3. (c)BHEL
  4. (d)BARC
उत्तर देखें

उत्तर: (b) DRDO — DRDO को कावेरी मरीन गैस टर्बाइन और IEP सिस्टम्स के लिए R&D का नेतृत्व करने का प्रस्ताव है।

मेन्स के लिए

प्रश्न: उच्च-स्तरीय समुद्री प्रणोदन प्रणालियों (marine propulsion systems) में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने में आने वाली चुनौतियों और भारत के नौसैनिक बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँनोट्स कैसे बनते हैंस्रोत: एनडीटीवी ↗यह भी: GS3 · रक्षा तकनीक

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।