कर्नाटक सरकार ने केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अरलेकर से 'मलयालम भाषा विधेयक, 2025' (Malayalam Bhasha Bill, 2025) को खारिज करने का आग्रह किया है
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चर्चा में क्यों
कर्नाटक सरकार ने केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अरलेकर से 'मलयालम भाषा विधेयक, 2025' (Malayalam Bhasha Bill, 2025) को खारिज करने का आग्रह किया है। सरकार ने आरोप लगाया है कि यह विधेयक कन्नड़ भाषी भाषाई अल्पसंख्यकों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।
पृष्ठभूमि
कर्नाटक बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी के एक प्रतिनिधिमंडल ने केरल के राज्यपाल को मलयालम भाषा विधेयक, 2025 के खिलाफ एक याचिका सौंपी है। इस याचिका में विशेष रूप से कासरगोड जिले और कन्नड़ छात्रों के लिए मलयालम भाषा सीखने के अनिवार्य प्रावधानों के संबंध में चिंताओं पर प्रकाश डाला गया है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- संविधानअनुच्छेद 350: अल्पसंख्यक भाषाओं में निर्देश के लिए विशेष निर्देश प्रदान करता है।
- स्थानकसारगोड: केरल का वह जिला जहाँ कन्नड़ बोलने वाले भाषाई अल्पसंख्यक (linguistic minorities) रहते हैं।
- तथ्यमलयालम भाषा बिल, 2025: आपत्ति के तहत विशिष्ट विधायी प्रस्ताव।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए प्रदान किए गए संवैधानिक सुरक्षा उपायों का परीक्षण कीजिए और राज्य-स्तरीय भाषा नीतियों के संघीय निहितार्थों पर चर्चा कीजिए।
उत्तर के आयाम
- संवैधानिक टकराव: राज्य स्तर पर भाषा को बढ़ावा देने और भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए आर्टिकल 350A के संरक्षण के बीच तनाव
- संघीय टकराव: प्रवासी भाषाई आबादी के अधिकारों को लेकर अंतर-राज्यीय अधिकार क्षेत्र की चिंताएं
- शैक्षिक समानता: क्षेत्रीय भाषा के नियमों और मातृभाषा में शिक्षा के अधिकार के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: भाषाई अल्पसंख्यक · संघवाद · अनुच्छेद 350A · सांस्कृतिक बहुलवाद · संवैधानिक सुरक्षा उपाय
राजव्यवस्था एवं संविधान पर और नोट्स
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।