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भाग I · स्था. 11.2025 
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सत्याधीश
भारत का जमीनी सत्य अभिलेख
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Justice B.V. Nagarathna: 1978 का फैसला पलटने से कंपनियों को फायदा और वर्कर्स को नुकसान हो सकता है

GS2राजव्यवस्था · शासन · अंतर्राष्ट्रीय संबंध· Bills, Acts & ordinances· Mains·

चर्चा में क्यों

न्यायमूर्ति बी.वी. नागरथ्ना ने औद्योगिक संबंध संहिता 2020 के अंतर्गत 'उद्योग' की परिभाषा के संबंध में नौ न्यायाधीशों की पीठ के निर्णय में असहमति व्यक्त की और श्रम अधिकारों के संभावित क्षरण के प्रति चेतावनी दी।

पृष्ठभूमि

यह असहमति 1978 के 'बैंगलोर वाटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड बनाम आर. राजप्पा' के निर्णय को पलटने से संबंधित है। यह निर्णय औद्योगिक संबंध संहिता (IRC) 2020 और श्रम कानून की प्रयोज्यता हेतु 'उद्योग' की परिभाषा को प्रभावित करता है।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • अधिनियम / विधेयकIndustrial Relations Code (IRC) 2020: Industrial Disputes Act 1947 जैसे पुराने कानूनों को प्रतिस्थापित करने वाला एक समेकित श्रम कानून।
  • संस्थाभारत का सर्वोच्च न्यायालय: नौ न्यायाधीशों की पीठ श्रम संरक्षण के लिए 'industry' के दायरे की व्याख्या कर रही है।
  • तथ्य1978 बैंगलोर वाटर सप्लाई निर्णय: श्रमिक कल्याण की रक्षा के लिए 'उद्योग' की व्यापक परिभाषा स्थापित की।

मेन्स के लिए

Q. उदारीकरण के युग में 'उद्योग' की पुनर्व्याख्या ने निगमों और श्रमिकों के बीच सौदेबाजी की शक्ति (bargaining power) पर पड़ने वाले प्रभावों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

उत्तर के आयाम

  • erosion of labor protections
  • corporate bargaining power
  • state's welfare obligations
  • judicial precedent vs statutory change

कीवर्ड: bargaining power · labor welfare · judicial precedent · industrial relations · liberalization

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँस्रोत: The Hindu ↗यह भी: GS2 · Judiciary & landmark judgments

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।