सुप्रीम कोर्ट ने एक आरोपी को जमानत देने से इनकार करने की कार्रवाई की आलोचना की, जिसमें 'सबक के तौर पर जेल का स्वाद चखने' की बात कही गई थी
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चर्चा में क्यों
सुप्रीम कोर्ट ने एक आरोपी को जमानत देने से इनकार करने की कार्रवाई की आलोचना की, जिसमें 'सबक के तौर पर जेल का स्वाद चखने' की बात कही गई थी। कोर्ट ने इस फैसले के जरिए निर्दोष होने के अनुमान (Presumption of innocence) के सिद्धांत को फिर से स्पष्ट किया।
पृष्ठभूमि
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि किसी भी अंडरट्रायल (undertrial) के लिए निर्दोष होने की धारणा (presumption of innocence) स्थिर रहती है, चाहे कथित अपराध की गंभीरता कुछ भी हो। कोर्ट ने इस बात को दोहराया कि जमानत एक मौलिक अधिकार है और जेल को नियम के बजाय अपवाद होना चाहिए।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- संविधाननिर्दोषता की धारणा (Presumption of innocence): एक कानूनी सिद्धांत जहाँ एक आरोपी को तब तक निर्दोष माना जाता है जब तक कि वह दोषी साबित न हो जाए।
- तथ्यजेल नहीं, बेल (Bail) नियम है और जेल अपवाद है: यह प्री-ट्रायल डिटेंशन (Pre-trial detention) को नियंत्रित करने वाला एक न्यायिक सिद्धांत है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: सार्वजनिक सुरक्षा के लिए राज्य की कारावास की शक्ति और दोषसिद्धि से पूर्व व्यक्ति के स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार के बीच उत्पन्न तनाव का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- न्यायिक निगरानी: 'बेल नियम है' सिद्धांत और समाज के लिए खतरे या फरार होने के जोखिम को रोकने की ज़रूरत के बीच संतुलन
- कानूनी सुरक्षा: यह सुनिश्चित करना कि गंभीर अपराधों के लिए ट्रायल से पहले जेल में रखना पूर्व-निवारक सजा न बन जाए
मुख्य शब्द: निर्दोष होने की धारणा · स्वतंत्रता का अधिकार · प्री-ट्रायल डिटेंशन · न्यायिक समीक्षा · मौलिक अधिकार
राजव्यवस्था एवं संविधान पर और नोट्स
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