एडवोकेट आकाश वशिष्ठ द्वारा दायर एक PIL के बाद, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में विरासत स्थलों (Heritage sites) की जर्जर स्थिति के संबंध में केंद्र सरकार
चर्चा में क्यों: एडवोकेट आकाश वशिष्ठ द्वारा दायर एक PIL के बाद, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में विरासत स्थलों (Heritage sites) की जर्जर स्थिति के संबंध में केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और ASI को नोटिस जारी किया है।
कोर्ट ने केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय, पर्यटन मंत्रालय, आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय, ASI, नेशनल मॉन्यूमेंट्स अथॉरिटी और राज्य पुरातत्व विभाग को नोटिस जारी किए हैं। याचिका में उपेक्षित संरचनाओं के संबंध में इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (INTACH) के आंकड़ों का हवाला दिया गया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
- संस्थाINTACH: इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (Indian National Trust for Art and Cultural Heritage) हेरिटेज कंजर्वेशन (heritage conservation) के लिए एक नॉन-प्रॉफिट ऑर्गनाइजेशन है।
- संस्थानेशनल मॉन्यूमेंट्स अथॉरिटी (National Monuments Authority): स्मारकों के संरक्षण और सुरक्षा के लिए जिम्मेदार संस्था।
- स्थानइलाहाबाद हाई कोर्ट: उत्तर प्रदेश में याचिका की निगरानी करने वाली न्यायिक संस्था।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत की क्षय होती विरासत स्थलों के संरक्षण में आने वाली संस्थागत और रसद संबंधी चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए तथा उनके दीर्घकालिक संरक्षण सुनिश्चित करने हेतु उचित उपाय सुझाइए। चर्चा कीजिए।
- एजेंसियों के बीच टकराव: ASI, राज्य पुरातत्व विभागों और शहरी विकास निकायों के बीच ओवरलैपिंग अधिकार क्षेत्र
- फंडिंग की कमी: गैर-स्मारक विरासत संरचनाओं के रखरखाव के लिए बजट आवंटन अपर्याप्त
- शहरी अतिक्रमण: तेज़ी से होता शहरीकरण और बफर ज़ोन की कमी ऐतिहासिक स्थलों की संरचनात्मक मजबूती के लिए खतरा
मुख्य शब्द: हेरिटेज कंजर्वेशन · जनहित याचिका · सांस्कृतिक संरक्षण · संस्थागत जवाबदेही · शहरी अतिक्रमण