यूपीएससी सिविल सेवा GS2 (राजव्यवस्था · शासन · अंतर्राष्ट्रीय संबंध) के राजव्यवस्था एवं संविधान भाग से जुड़ी हर ख़बर, परीक्षा के नज़रिए से: चर्चा में क्यों, पृष्ठभूमि, प्रीलिम्स के तथ्य, अभ्यास प्रश्न और मेन्स प्रश्न। अब तक 1,007 नोट्स, रोज़ अपडेट।
पाठ्यक्रम के विषय: चुनाव, चुनाव आयोग एवं चुनाव सुधार (362) · न्यायपालिका एवं ऐतिहासिक फैसले (279) · संविधान, संशोधन एवं मूल ढांचा (101) · संसद एवं राज्य विधानमंडल (57) · मौलिक अधिकार, नीति निदेशक तत्व एवं कर्तव्य (42) · पंचायती राज एवं शहरी स्थानीय निकाय (37) · संघवाद एवं केंद्र-राज्य संबंध (35) · वैधानिक, नियामक एवं अर्ध-न्यायिक संस्थाएं (35) · कार्यपालिका (राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री) (31) · संवैधानिक संस्थाएं (CAG, UPSC, वित्त आयोग, NCSC...) (28)
चर्चा में क्यों: तेलंगाना विधानसभा सचिवालय ने दानम नागेंद्र को खैराबाद MLA के पद से अयोग्य घोषित कर दिया है। उन्होंने भारत राष्ट्र समिति (BRS) के साथ सीट रखते हुए कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था।
यह अयोग्यता 18 सितंबर, 2026 को तेलंगाना हाई कोर्ट के एक आदेश और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट में दी गई चुनौती के खारिज होने के बाद हुई। खैरतबाद निर्वाचन क्षेत्र की सीट अब खाली हो गई है, जिसके कारण चुनाव आयोग द्वारा उपचुनाव कराना आवश्यक है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थातेलंगाना लेजिस्लेटिव असेंबली सेक्रेटेरिएट (Telangana Legislative Assembly Secretariat): वह निकाय जो MLA की अयोग्यता (disqualification) की अधिसूचना जारी करने के लिए जिम्मेदार है।
तथ्यदनाम नागेंडर: खैराबाद निर्वाचन क्षेत्र से अयोग्य घोषित विधायक।
तथ्यभारत राष्ट्र समिति (BRS): वह राजनीतिक पार्टी जिससे विधायक को अयोग्य घोषित किए जाने के समय संबद्धता प्राप्त थी।
मेन्स के लिए
प्रश्न: राजनीतिक स्थिरता बनाए रखने में दल-बदल विरोधी कानूनों की भूमिका और विधायी सीटों के रिक्त होने के संवैधानिक निहितार्थों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
चर्चा में क्यों: सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने मध्य प्रदेश से अपने राज्यसभा नामांकन को रद्द किए जाने को चुनौती दी थी। यह नामांकन एक आपराधिक शिकायत का खुलासा न करने के कारण खारिज किया गया था।
रिटर्निंग ऑफिसर ने नामांकन को खारिज कर दिया क्योंकि उम्मीदवार फॉर्म 26 में लंबित आपराधिक शिकायत का खुलासा करने में विफल रहा। सुप्रीम कोर्ट ने इस अस्वीकृति को चुनौती देने वाली बाद की याचिकाको खारिज कर दिया।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थारिटर्निंग ऑफिसर (Returning Officer): नामांकन को स्वीकार/अस्वीकार करने और चुनाव आयोजित करने के लिए जिम्मेदार अधिकारी।
तथ्यफॉर्म 26: नामांकन पत्रों में आपराधिक antecedentes (antecedents) का खुलासा करने के लिए उपयोग किया जाने वाला विशिष्ट फॉर्म।
स्थानमध्य प्रदेश: वह राज्य जिससे राज्यसभा नामांकन की मांग की गई थी।
मेन्स के लिए
प्रश्न: निर्वाचन नामा में आपराधिक पूर्ववृत्त के अनिवार्य प्रकटीकरण के महत्व का विश्लेषण कीजिए, जो चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और लोकतांत्रिक मूल्यों की अखंडता को बनाए रखने के लिए आवश्यक है। चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की आलोचना तब हुई जब चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने दिल्ली SIR प्रक्रिया में विसंगतियों के संबंध में कैबिनेट सचिव को औपचारिक असहमति नोट (dissent notes) सौंपे।
चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीने की अवधि के दौरान दिल्ली SIR प्रक्रिया में विसंगतियों (anomalies) को रेखांकित किया है। इन आयुक्तों की नियुक्ति 2023 के चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून (Law for Appointment of Election Commissioners) के तहत की गई थी।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
अधिनियम / विधेयकचुनाव आयुक्त की नियुक्ति के लिए 2023 का कानून (Law for Appointment of Election Commissioners) आयुक्तों के चयन को नियंत्रित करता है।
पदसुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने दिल्ली SIR प्रोसेस के दौरान इलेक्शन कमिश्नर के रूप में कार्य किया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत निर्वाचन आयोग के लिए संस्थागत स्वायत्तता के महत्व और चुनावी अखंडता सुनिश्चित करने में आंतरिक मतभेदों के निहितार्थों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
चर्चा में क्यों: भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में कहा कि न्यायपालिका छात्रों के शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। इस दौरान उन्होंने कॉलेजियम की पारदर्शिता (Transparency) से जुड़ी चिंताओं पर भी चर्चा की।
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने पटना स्थित चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में छात्रों के साथ संवाद किया। इस संवाद के दौरान विरोध प्रदर्शनों के प्रति पुलिस की प्रतिक्रिया और कॉलेजियम सिस्टम (Collegium System) की पारदर्शिता जैसे विषयों पर चर्चा की गई।
प्रीलिम्स बिंदु (1)
पदसूर्यकांत: भारत के मुख्य न्यायाधीश।
मेन्स के लिए
प्रश्न: शैक्षणिक संस्थानों में शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के बीच संवैधानिक संतुलन का विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने बिहार में पहले विक्टिम राइट्स सेंटर (VRC) और एक ट्रांसजेंडर हेल्पलाइन का उद्घाटन किया। इसका उद्देश्य अपराध के पीड़ितों को सिंगल-विंडो एक्सेस (single-window access) प्रदान करना है।
इन पहलों की शुरुआत 26 सितंबर, 2026 को बिहार स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (BSLSA) के परिसर में की गई। इस परियोजना में एक ट्रांसजेंडर हेल्पलाइन, मल्टी-यूटिलिटी वाहन और दूरदराज के क्षेत्रों में कानूनी जागरूकता बढ़ाने के लिए VRC पर एक समर्पित पुस्तक शामिल है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाBSLSA: बिहार स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (Bihar State Legal Services Authority) वह संस्था है जो विक्टिम राइट्स सेंटर (Victim Rights Centre) की मेजबानी करती है।
तथ्यVRC को अपराध के पीड़ितों के लिए सिंगल-विंडो एक्सेस (single-window access) प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
पदजस्टिस सूर्यकांत: सितंबर 2026 तक भारत के मुख्य न्यायाधीश।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में हाशिए पर रहने वाले और संवेदनशील समुदायों के लिए न्याय तक पहुँच सुनिश्चित करने में समर्पित 'पीड़ित अधिकार केंद्रों' (Victim Rights Centres) की स्थापना के महत्व पर चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने दिल्ली में विशेष मतदाता पंजीकरण शिविरों की घोषणा की है, ताकि ड्राफ्ट मतदाता सूची (draft electoral roll) से छूटे हुए पात्र नागरिकों को इसमें शामिल किया जा सके।
निर्वाचन आयोग (ECI) को 31 अगस्त और 24 सितंबर के बीच फॉर्म-6 के माध्यम से 1,21,224 आवेदन प्राप्त हुए। अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर, 2026 को प्रकाशित होने वाली है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यफॉर्म-6: वोटर एनरोलमेंट (voter enrolment) के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला विशिष्ट आवेदन फॉर्म।
तथ्ययुवा मतदाताओं (18-25 वर्ष की आयु) के लिए 29 और 30 सितंबर को स्पेशल कैंप्स आयोजित किए जाएंगे।
तथ्यअंतिम मतदाता सूची प्रकाशन की तारीख: 4 नवंबर, 2026।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को सुदृढ़ करने में एक समावेशी और अद्यतन मतदाता सूची सुनिश्चित करने के महत्व पर चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: एक जांच में यह सामने आया है कि दो चुनाव आयुक्तों ने दस महीनों के दौरान 14 बार लिखित रूप में आपत्ति जताई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) के दौरान कई निर्णय उनकी जानकारी के बिना लिए गए थे।
यह जांच चुनाव आयोग (ECI) के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision), फॉर्म 6 से जुड़े विवादों और ERONet के केंद्रीकरण से संबंधित मुद्दों को कवर करती है। इन प्रक्रियाओं ने राज्य चुनावों से पहले पश्चिम बंगाल में 27 लाख मतदाताओं के विलोपन (deletion) को प्रभावित किया।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
तथ्यविशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान पश्चिम बंगाल में 27 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए।
तथ्यदो Election Commissioners ने दस महीने की अवधि में 14 आपत्तियां (objections) दर्ज कीं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: मतदाता सूची की शुचिता सुनिश्चित करने में भारत निर्वाचन आयोग की संस्थागत स्वायत्तता और आंतरिक शासन का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
चर्चा में क्यों: सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि POCSO एक्ट के तहत झूठी यौन उत्पीड़न की शिकायतों वाले वैवाहिक विवादों में बच्चे के मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन (psychological evaluation) के बिना तत्काल गिरफ्तारी नहीं की जानी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि ऐसे मामलों में गिरफ्तारी से पहले विशेषज्ञों द्वारा बच्चों का मनोवैज्ञानिक या मनोरोग मूल्यांकन (psychiatric evaluation) किया जाना अनिवार्य है। यह फैसला बेंगलुरु के एक मामले के बाद आया है, जिसमें झूठे आरोपों की पहचान होने के बाद एक पिता को बच्चे की कस्टडी वापस दिला दी गई थी।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
अधिनियम / विधेयकPOCSO Act: यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण के लिए बनाया गया कानून।
तथ्यकोर्ट ने आदेश दिया कि वैवाहिक विवाद से जुड़े POCSO शिकायतों में गिरफ्तारी से पहले विशेषज्ञों द्वारा मनोवैज्ञानिक या मनोरोग संबंधी मूल्यांकन (psychiatric evaluations) किया जाए।
मेन्स के लिए
प्रश्न: वैवाहिक विवादों में पोक्सो (POCSO) अधिनियम जैसे कठोर आपराधिक कानूनों के दुरुपयोग को रोकने के साथ-साथ बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक न्यायिक उपायों पर चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर अलग-अलग राय दी है कि क्या 2023 के उस कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं को बड़ी बेंच (Larger Bench) के पास भेजा जाना चाहिए, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों (ECs) के चयन से भारत के मुख्य न्यायाधीश को बाहर रखा गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसी याचिका पर विभाजित फैसला सुनाया है, जिसमें 2023 के उस कानून को चुनौती दी गई है जो मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों (ECs) की चयन प्रक्रिया से भारत के मुख्य न्यायाधीश को बाहर करता है। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता ने केंद्र सरकार के तर्क को खारिज कर दिया, जबकि न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा इससे असहमत रहे। इस मतभेद के कारण मामले को भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के पास भेज दिया गया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थामुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्त (ECs) चुनाव आयोजित करने के लिए जिम्मेदार मुख्य निकाय हैं।
तथ्यCEC और ECs के चयन की प्रक्रिया से भारत के मुख्य न्यायाधीश को बाहर करने के लिए 2023 में एक कानून बनाया गया।
पदरेफरल डिसीजन (referral decision) के लिए वर्तमान में चीफ जस्टिस सूर्यकांत मुख्य अधिकारी हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति पर कार्यपालिका के प्रभाव का चुनावी प्रक्रिया की स्वायत्तता पर पड़ने वाले निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्यों की समीक्षा और योजना बनाने के लिए कैबिनेट मंत्रियों के साथ दो दिवसीय 'चिंतन शिविर' की अध्यक्षता कर रहे हैं।
'चिंतन शिविर' का आयोजन 23 और 24 सितंबर को दिल्ली के सेवा तीर्थ में किया जाएगा। इसमें विशेष रूप से केवल कैबिनेट मंत्रियों को शामिल किया गया है, ताकि Vision@2047 रोडमैप के लिए स्थिति का आकलन करने, योजना बनाने और आवश्यक सुधारों की पहचान करने पर ध्यान केंद्रित किया जा सके।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
पदकेंद्रीय मंत्रिपरिषद (Union Council of Ministers) की अध्यक्षता प्रधानमंत्री द्वारा की जाती है।
तथ्य'चिन्तन शिविर' 2047 के विजन (Vision@2047) का ड्राफ्ट तैयार करनेके लिए 2021 से चल रही एक प्रक्रिया का हिस्सा है।
स्थानयह कार्यक्रम दिल्ली में सेवा तीर्थ में आयोजित किया जा रहा है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्यों की प्राप्ति में दीर्घकालिक रणनीतिक नियोजन के महत्व और इस प्रक्रिया में केंद्रीय मंत्रिपरिषद की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: ओडिशा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) के पूरा होने की घोषणा की है, जिसके परिणामस्वरूप 20 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं।
ओडिशा में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) की प्रक्रिया 30 मई, 2026 को 31.4 मिलियन मतदाताओं के साथ शुरू हुई। इस प्रक्रिया के परिणामस्वरूप, मृत्यु और स्थानांतरण के कारण 20.56 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए। साथ ही, दावों और आपत्तियों की सुनवाई के बाद 24,777 मतदाताओं को अपात्र पाया गया।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यओडिशा SIR: मई और सितंबर 2026 के बीच मतदाता सूची से 20.56 लाख मतदाताओं को हटाया गया।
तथ्यSIR के बाद ओडिशा में मतदाता सूची की अंतिम संख्या: 31.63 मिलियन मतदाता।
तथ्यमतदाता सूची को निरंतर अपडेट करने के लिए फॉर्म 6, 7 और 8 का उपयोग किया जाता है।
पदचीफ इलेक्टोरल ऑफिसर (CEO) वह अथॉरिटी है जो विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) प्रक्रिया के लिए जिम्मेदार है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: लोकतांत्रिक प्रक्रिया की अखंडता सुनिश्चित करने में आवधिक मतदाता सूची संशोधन के महत्व और सटीक मतदाता डेटा बनाए रखने में आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: केंद्र सरकार द्वारा सात नए न्यायाधीशों की नियुक्ति के बाद, दिल्ली हाई कोर्ट ने अपनी न्यायिक शक्ति (judicial strength) को बढ़ाकर 50 न्यायाधीश कर दिया है।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने सोमवार को सात नए न्यायाधीशों को शपथ दिलाई। इन नियुक्तियों में दो स्थायी न्यायाधीश (निवेदिता अनिल शर्मा, निशा सहाय सक्सेना) और पांच अतिरिक्त न्यायाधीश शामिल हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यदिल्ली हाई कोर्ट की कुल संख्या बढ़ाकर 50 जजों कर दी गई है।
पदचीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने शपथ दिलाई।
संस्थानियुक्तियाँ सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम (Collegium) की सिफारिश के आधार पर की गईं।
तथ्यकेंद्र सरकार ने 19 सितंबर को नियुक्तियों की अधिसूचना जारी की।
मेन्स के लिए
प्रश्न: उच्च न्यायालयों में न्याय की प्रभावी सुपुर्दगी सुनिश्चित करने में न्यायिक शक्ति और कॉलेजियम प्रणाली के महत्व की चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: सुप्रीम कोर्ट ने लंबित अपीलों के दौरान वादी की जमा राशि के प्रबंधन को मानकीकृत करने के लिए कानून बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया है, ताकि ब्याज दरों में विसंगति और फैसले के बाद होने वाले मुकदमों को रोका जा सके।
न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिंह और आलोक अराधे ने टिप्पणी की कि वर्तमान में नियमों में विसंगति के कारण जमा की गई राशि विभिन्न वित्तीय साधनों (financial instruments) में उलझ जाती है। कोर्ट ने जमा राशि को एक एकीकृत योजना में जोड़ने के लिए यू.एस. कोर्ट रजिस्ट्री इन्वेस्टमेंट सिस्टम (CRIS) मॉडल को एक संभावित ढांचे के रूप में सुझाया।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थालॉ कमीशन ऑफ इंडिया (Law Commission of India): इस बॉडी को नए कानून के लिए अंतरराष्ट्रीय उदाहरणों (precedents) की जांच करने और मंत्रालयों से परामर्श करने का निर्देश दिया गया है।
स्थानकोर्ट रजिस्ट्री इन्वेस्टमेंट सिस्टम (CRIS): एक यू.एस. मॉडल जहाँ डिपॉजिट्स को एक यूनिफाइड स्कीम में पूल किया जाता है।
तथ्यसुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि वर्तमान में असंगत नियम जमा फंड पर अलग-अलग इंटरेस्ट रेट (interest rates) का कारण बनते हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: न्यायालयों में जमा की गई धनराशि के प्रबंधन हेतु एक मानकीकृत कानूनी ढांचे की आवश्यकता, पारदर्शिता सुनिश्चित करने और मुकदमों से जुड़े पक्षों के लिए वित्तीय निष्पक्षता बनाए रखने के संदर्भ में चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: चुनाव आयोग ने ड्राफ्ट वोटर रोल में 80.62 लाख से अधिक मतदाताओं को स्थानांतरित या अनुपस्थित पाया है, लेकिन 19 सितंबर तक उसे केवल 6.66 लाख फॉर्म-6 (Form-6) आवेदन प्राप्त हुए हैं।
चुनाव आयोग ने अनुपस्थिति या स्थानांतरण के कारण ड्राफ्ट वोटर रोल से 80.62 लाख नाम हटा दिए हैं। 19 सितंबर तक, अंतिम रोल को अपडेट करने के लिए केवल 6.66 लाख Form-6 आवेदन प्राप्त हुए हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
संस्थाभारत निर्वाचन आयोग वोटर रोल्स (voter rolls) को बनाए रखने और अपडेट करने के लिए जिम्मेदार संस्था है।
तथ्यड्राफ्ट वोटर रोल में 80.62 लाख नामों को शिफ्टेड (shifted) या एब्सेंट (absent) के रूप में मार्क किया गया।
तथ्य19 सितंबर तक 6.66 लाख Form-6 आवेदन प्राप्त हुए।
तथ्यफॉर्म-6 मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए उपयोग किया जाने वाला आवेदन है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: एक गतिशील जनसंख्या के संदर्भ में सटीक और समावेशी मतदाता सूची बनाए रखने में चुनाव आयोग के समक्ष आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि विदेश मंत्री एस जयशंकर सहित प्रमुख मतदाताओं को जारी किए गए नोटिस।
चुनाव आयोग ने दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) के तहत मतदाताओं को नोटिस जारी किए हैं। 4 नवंबर की अंतिम मतदाता सूची में शामिल होनेसुनिश्चित करने के लिए इन सत्यापन प्रक्रियाओं पर अंतिम निर्णय 29 अक्टूबर तक लेना आवश्यक है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाचुनाव आयोग: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) के लिए जिम्मेदार संस्था।
तथ्यअंतिम रोल डेट: 4 नवंबर।
तथ्यवेरिफिकेशन की डेडलाइन: 29 अक्टूबर।
मेन्स के लिए
प्रश्न: मतदाता सूची के शुद्धिकरण के महत्व और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की अखंडता सुनिश्चित करने में चुनाव आयोग की भूमिका पर चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: कोइम्बतोर में आयोजित इंडियन एसोसिएशन ऑफ लॉयर्स के नौवें स्टेट कॉन्फ्रेंस में जस्टिस एन. आनंद वेंकटेश ने निष्पक्षता बहाल करने के लिए न्यायिक आत्म-मंथन (Judicial Introspection) का आह्वान किया।
मद्रास हाई कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एन. आनंद वेंकटेश ने इंडियन एसोसिएशन ऑफ लॉयर्स के नौवें राज्य सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने कानूनी शिक्षा का व्यावसायीकरण, अधिवक्ताओं के राजनीतिक जुड़ाव, निर्णयों का राजनीतिकरण और कॉलेजियम सिस्टम में पारदर्शिता की कमी को प्रमुख मुद्दों के रूप में रेखांकित किया।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
पदजस्टिस एन. आनंद वेंकटेश: मद्रास हाई कोर्ट के जज।
संस्थाइंडियन एसोसिएशन ऑफ लॉयर्स (Indian Association of Lawyers): कोयंबटूर में नौवां स्टेट कॉन्फ्रेंस आयोजित किया।
तथ्यपहचानी गई समस्याएं: कानूनी शिक्षा का व्यावसायीकरण (commercialisation), अधिवक्ताओं के राजनीतिक जुड़ाव, फैसलों का राजनीतिकरण और Collegium सिस्टम में पारदर्शिता की कमी।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में न्यायिक तटस्थता के समक्ष आने वाली चुनौतियों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए और कॉलेजियम प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए आवश्यक उपायों का सुझाव दीजिए।
चर्चा में क्यों: केंद्र सरकार और लद्दाख नेतृत्व (लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस) संवैधानिक सुरक्षा उपायों और एक 'सुई जेनेरिस' (sui generis) शासन मॉडल पर एक अनौपचारिक समझौते पर पहुँचे हैं।
केंद्र सरकार ने लद्दाख के लिए अनुच्छेद 371 के तहत संवैधानिक सुरक्षा प्रदान करने पर सहमति व्यक्त की है। क्षेत्र के शासन के लिए एक निर्वाचित निकाय स्थापित करने हेतु एक विशिष्ट 'सुई जेनेरिस' (sui generis) मॉडल का उपयोग किया जाएगा।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
तथ्यलेह एपेक्स बॉडी (Leh Apex Body) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (Kargil Democratic Alliance): लद्दाख के हितों का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रमुख राजनीतिक समूह।
पदआशिष कुंद्रा: लद्दाख के चीफ सेक्रेटरी जिन्होंने आर्टिकल 371 में संशोधनों की पुष्टि की।
तथ्यSui generis: लद्दाख की प्रशासनिक संरचना के लिए प्रस्तावित एक अनूठा गवर्नेंस मॉडल (governance model)।
मेन्स के लिए
प्रश्न: संघीय अखंडता को बनाए रखते हुए केंद्र शासित प्रदेशों की विशिष्ट आकांक्षाओं को संबोधित करने में 'सुई जेनेरिस' (sui generis) शासन मॉडलों के महत्व की चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस गुट ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के उस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें उनकी पार्टी के चुनाव चिह्न को फ्रीज कर दिया गया है और प्रतिद्वंद्वी गुटों को नए नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए गए हैं।
निर्वाचन आयोग (ECI) ने 17 सितंबर, 2026 को होने वाले विधानसभा उपचुनावों में मूल नाम और चुनाव चिह्न के उपयोग पर रोक लगा दी है। ममता बनर्जी के गुट को 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'फुटबॉल खिलाड़ी' का चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है, जबकि ऋतब्रत बनर्जी के समूह को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'लिफाफा' का चुनाव चिह्न दिया गया है।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
तथ्यममता बनर्जी के गुट को नया नाम ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (Mamata All India Trinamool Congress) आवंटित किया गया है।
तथ्यDemocratic Trinamool Congress: रितब्रत बनर्जी के समूह को दिया गया नया नाम।
तथ्यफुटबॉल प्लेयर: ममता बनर्जी के गुट को आवंटित प्रतीक।
तथ्यलिफाफा (Envelope): रिटब्रत बनर्जी के ग्रुप को आवंटित प्रतीक।
मेन्स के लिए
प्रश्न: राजनीतिक दलों के प्रतीकों के आवंटन और उन्हें फ्रीज करने के संबंध में चुनाव आयोग की शक्तियों तथा आंतरिक पार्टी लोकतंत्र पर इसके निहितार्थों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
चर्चा में क्यों: सुप्रीम कोर्ट ने नवोदय विद्यालयों के लिए भूमि से संबंधित अंतरिम आदेश को वापस लेने के लिए तमिलनाडु द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया। साथ ही, कोर्ट ने राज्य सरकार से हिंदी भाषा को शामिल करने के प्रति सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) का दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया।
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु को तीन महीने की समय सीमा के भीतर प्रत्येक जिले में नवोदय विद्यालयों के लिए भूमि की पहचान करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने राज्य और केंद्र के बीच भाषा से जुड़े विवादों को सुलझाने में सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) के सिद्धांत पर जोर दिया।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
तथ्यसुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु को स्कूलों के लिए जमीन खोजने के लिए तीन महीने की समय सीमा तय की है।
स्थानतमिलनाडु: राज्य सरकार शिक्षा प्रणाली में हिंदी के वर्चस्व का विरोध कर रही है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच भाषाई और सांस्कृतिक विवादों के समाधान में सहकारी संघवाद के महत्व की चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: सुप्रीम कोर्ट ने अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करने की सहमति दी है। इस याचिका में मांग की गई है कि मतदाताओं के लिए स्पष्टता सुनिश्चित करने हेतु राजनीतिक दलों के चुनाव घोषणापत्रों (Election Manifestos) के लिए एक कानूनी रूप से लागू होने वाला और मानकीकृत फॉर्मेट तैयार किया जाए।
याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि घोषणापत्र 'विज़न डॉक्यूमेंट' (vision documents) हैं और उन्हें कोर्ट की कॉज़लिस्ट (causelists) की तरह कानूनी रूप से लागू करने योग्य होना चाहिए। इस याचिका में भारत निर्वाचन आयोग (ECI) से आग्रह किया गया है कि वह घोषणापत्र की जवाबदेही के लिए दिशा-निर्देश तैयार करने हेतु अपनी पूर्ण संवैधानिक शक्ति का उपयोग करे।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाभारत निर्वाचन आयोग (ECI) को एक समान घोषणापत्र (manifesto) फॉर्मेट अपनाने का आग्रह किया गया है।
तथ्ययाचिकाकर्ता ने चुनाव प्रतीकों को जब्त करने या 'essential rational' वादों को पूरा करने में विफल रहने वाली पार्टियों का पंजीकरण रद्द करने की शक्ति मांगी।
पदयह याचिका भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने रखी गई।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारतीय चुनावी प्रक्रिया में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए राजनीतिक घोषणापत्रों को कानूनी रूप से बाध्यकारी बनाने की आवश्यकता पर चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक पहुंच को बेहतर बनाने के उद्देश्य से हिंदी दिवस पर 'जन सूचना सेवा' शुरू की। इसके माध्यम से सरल हिंदी कानूनी बुलेटिन और महत्वपूर्ण फैसलों के मल्टीमीडिया सारांश उपलब्ध कराए जाएंगे।
'जन सूचना सेवा' एक सार्वजनिक सूचना सेवा है जो महत्वपूर्ण निर्णयों के सरल सारांश और ऑडियो/वीडियो बुलेटिन प्रदान करती है। इसे सुप्रीम कोर्ट द्वारा 14 सितंबर, 2026 को शुरू किया गया था, और इसे अन्य भारतीय भाषाओं में विस्तारित करने की योजना है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थाजन सूचना सेवा (Jan Soochna Seva): भारत के सुप्रीम कोर्ट द्वारा शुरू की गई एक सार्वजनिक सूचना सेवा।
तथ्ययह सर्विस महत्वपूर्ण फैसलों (judgments) के सरल सारांश और ऑडियो/वीडियो बुलेटिन प्रदान करती है।
तथ्यइस पहल की शुरुआत हिंदी दिवस (14 सितंबर, 2026) पर की गई थी।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में हाशिए पर रहने वाले वर्गों के लिए 'न्याय तक पहुँच' के सिद्धांत को सुदृढ़ करने में कानूनी भाषा के सरलीकरण और निर्णयों के बहुभाषी प्रसार की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसन ने 13 सितंबर, 2026 को जस्टिस वी. कामेश्वर राव को पटना हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त किया।
न्यायमूर्ति वी. कामेश्वर राव ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की उपस्थिति में लोक भवन में शपथ ली। इससे पहले वे एक स्थायी न्यायाधीश के रूप में कार्यरत थे, जिन्हें 2015 में पदोन्नत किया गया था और उन्होंने कर्नाटक हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में भी अपनी सेवाएँ दी थीं।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
पदजस्टिस वी. कामेश्वर राव: सितंबर 2026 तक पटना हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस।
तथ्यजस्टिस राव को 2015 में स्थायी जज के रूप में पदोन्नत किया गया था।
मेन्स के लिए
प्रश्न: हाई कोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्ति और शपथ ग्रहण में राज्यपाल की संवैधानिक भूमिका तथा न्यायिक स्वतंत्रता पर इसके निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने NCERT की कक्षा 8 की पाठ्यपुस्तक विवाद में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप का हवाला देते हुए न्यायिक जवाबदेही में पारदर्शिता और जनता के भरोसे की मांग की।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने 14 सितंबर, 2026 को राम जेठमलानी मेमोरियल लेक्चर में संबोधन दिया। इस विषय में NCERT की कक्षा 8 की पाठ्यपुस्तक से एक अध्याय को हटाए जाने से संबंधित बात सामने आई, जिसमें न्यायपालिका का 'लापरवाह' चित्रण किया गया था।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
पदचीफ जस्टिस सूर्यकांत: सुप्रीम कोर्ट के प्रेसिडिंग हेड।
तथ्यकोर्ट ने शुरू में न्यायपालिका के लापरवाह चित्रण के कारण एक चैप्टर को वापस लेने का आदेश दिया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारतीय न्यायपालिका की अखंडता को बनाए रखने में न्यायिक पारदर्शिता और सार्वजनिक विश्वास के महत्व पर चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक कानून के छात्र की नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत हिरासत को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने जिला मजिस्ट्रेट की कार्रवाई को एक 'गढ़ी हुई कहानी' बताते हुए इसकी आलोचना की और याचिकाकर्ता को मुआवजा देने का आदेश दिया।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय की कानून की छात्रा आकृति चौधरी की हिरासत को रद्द कर दिया है। यह हिरासत गौतम बुद्ध नगर के जिला मजिस्ट्रेट (DM) मेधा रूपम के आदेश द्वारा लगाई गई थी। अदालत ने शपथ का उल्लंघन करने के कारण जिला मजिस्ट्रेट और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के वेतन से ₹5 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
अधिनियम / विधेयकNational Security Act (NSA): निवारक निरोध (preventive detention) का प्रावधान करने वाला कानून।
तथ्यमुआवजे की राशि: DM के वेतन से ₹5 लाख काटने का आदेश।
पदडिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (DM): भारत में एक जिले का कार्यकारी प्रमुख (Executive head)।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम जैसे निवारक निरोध कानूनों के दुरुपयोग को रोकने के लिए आवश्यक न्यायिक सुरक्षा उपायों का समालोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
चर्चा में क्यों: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने गुजरात विश्वविद्यालय में चुनावी पारदर्शिता और सटीक मतदाता सूची बनाए रखने में बूथ स्तर के अधिकारियों (BLOs) की भूमिका पर बल दिया।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ने मतदाता सूची से लेकर मतों की गणना तक, निरंतर सत्यापन की महत्ता पर प्रकाश डाला। इस सम्मेलन का मुख्य केंद्र 'ECINET' ऐप के माध्यम से युवाओं के बीच चुनावी साक्षरता को सुदृढ़ करना रहा।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
संस्थाCEC: भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त।
पदज्ञानेश कुमार: भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त।
विज्ञान-तकनीकECINET: चुनावी साक्षरता को सुदृढ़ करने के लिए उपयोग किया जाने वाला एक ऐप।
तथ्यBLOs: मतदाता सूची को सटीक बनाए रखने के लिए मतदाताओं के साथ सीधे संवाद करने के लिए उत्तरदायी होते हैं।
मेन्स के लिए
प्रश्न: निर्वाचन नामा की अखंडता सुनिश्चित करने और युवाओं के बीच चुनावी साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए भारत निर्वाचन आयोग द्वारा किए गए उपायों की चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: गुवाहाटी High Court ने यह टिप्पणी की कि मुस्लिम व्यक्तिगत कानून के अंतर्गत 'तलाक-ए-हसन' विवाह विच्छेद का एक वैध रूप है और न्यायालय ने एक याचिकाकर्ता को इसे 'असम अनिवार्य मुस्लिम विवाह और तलाक पंजीकरण अधिनियम' के तहत पंजीकृत करने का निर्देश दिया।
गुवाहाटी उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अरुण देव चौधरी ने वर्ष 2026 की तीन तिथियों पर घोषित तलाक के पंजीकरण की मांग करने वाले एक असमिया व्यक्ति की याचिका पर निर्णय सुनाया। न्यायालय ने याचिकाकर्ता को बारपेटा 'विवाह और तलाक' रजिस्ट्रार से संपर्क करने का निर्देश दिया।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
अधिनियम / विधेयकअसम मुस्लिम विवाह और तलाक का अनिवार्य पंजीकरण अधिनियम, 2024।
स्थानबरपेटा, असम।
तथ्यतलाक-ए-हसन मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत तलाक का एक पारंपरिक रूप है।
पदगुवाहाटी उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अरुण देव चौधरी।
मेन्स के लिए
प्रश्न: व्यक्तिगत कानूनों के अंतर्गत महिलाओं के अधिकारों के संरक्षण और कानूनी निश्चितता सुनिश्चित करने में विवाह और तलाक के अनिवार्य पंजीकरण के महत्व पर चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: कर्नाटक उच्च न्यायालय ने सिनेमाघरों और मल्टीप्लेक्सों पर 2% कल्याण उपकर (welfare cess) के संग्रहण को रद्द कर दिया है। न्यायालय ने यह निर्णय देते हुए स्पष्ट किया कि 'कर्नाटक सिने एंड कल्चरल एक्टिविस्ट्स (वेलफेयर) एक्ट, 2024' अभी तक लागू नहीं हुआ है।
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने नियामक अधिकारियों द्वारा 2% कल्याण उपकर (welfare cess) के संबंध में जारी किए गए परिपत्रों और सूचनाओं को रद्द कर दिया है। न्यायालय ने यह टिप्पणी की कि यद्यपि राज्यपाल ने 23 सितंबर, 2024 को 'कर्नाटक सिने एंड कल्चरल एक्टिविस्ट्स (वेलफेयर) एक्ट, 2024' को अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी थी, किंतु इसे लागू करने हेतु कोई राजपत्र अधिसूचना (gazette notification) जारी नहीं की गई थी।
प्रीलिम्स बिंदु (4)
संस्थाकर्नाटक उच्च न्यायालय: वह न्यायिक निकाय जिसने सेस (cess) संग्रह को रद्द कर दिया।
तथ्य2% कल्याणकारी सेस (Welfare Cess): यह विशिष्ट लेवी मल्टीप्लेक्स और सिनेमा थिएटरों से एकत्र की जाने वाली कर राशि है।
अधिनियम / विधेयककर्नाटक सिने एंड कल्चरल एक्टिविस्ट्स (वेलफेयर) एक्ट, 2024: वह विधान जिसके तहत सेस (cess) का प्रस्ताव दिया गया था।
तथ्य23 सितंबर, 2024: वह तिथि जब राज्यपाल ने अधिनियम को स्वीकृति प्रदान की।
मेन्स के लिए
प्रश्न: किसी अधिनियम के प्रारंभ के लिए राजपत्र अधिसूचना की संवैधानिक आवश्यकता और निजी संस्थाओं के लिए कानूनी निश्चितता सुनिश्चित करने में इसके महत्व पर चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय दिल्ली में अवैध इमारतों को ध्वस्त करने का आदेश दे सकता है, किंतु उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि विस्थापित निवासियों के लिए वैकल्पिक आवास प्रदान किया जाए।
यह वक्तव्य दिल्ली में हाल ही में हुई एक भवन दुर्घटना के बाद आया, जिसमें कम से कम सात व्यक्तियों की मृत्यु हो गई। साल्वे ने जनसंख्या वृद्धि और किफायती आवास के लिए योजना बनाने में दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) की विफलता को रेखांकित किया।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
संस्थादिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA): दिल्ली में योजना और विकास के लिए प्राथमिक रूप से जिम्मेदार संस्था।
तथ्यदिल्ली में हाल ही में हुई एक इमारत के ढहने से कम से कम सात लोगों की मृत्यु हो गई।
मेन्स के लिए
प्रश्न: शहरी सुरक्षा नियमों को लागू करने के लिए न्यायपालिका की शक्तियों और विस्थापित आबादी के लिए किफायती आवास प्रदान करने के राज्य के दायित्व के बीच संतुलन का विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना द्वारा न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र सिंह भाटी को जम्मू एवं कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ दिलाई गई।
न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र सिंह भाटी का जन्म वर्ष 1970 में हुआ था। वे पूर्व में राजस्थान उच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में कार्यरत रहे हैं। शपथ ग्रहण समारोह SKUAST के शालीमार सभागार में संपन्न हुआ।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
पदन्यायमूर्ति पुष्पेंद्र सिंह भाटी: जम्मू एवं कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश।
स्थानSKUAST का शालिमार ऑडिटोरियम: शपथ ग्रहण समारोह का स्थल।
तथ्यन्यायमूर्ति भाटी पूर्व में राजस्थान उच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में कार्यरत रहे।
मेन्स के लिए
प्रश्न: जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में संघीय संतुलन और न्यायिक निरीक्षण बनाए रखने में उच्च न्यायालय की भूमिका के महत्व पर चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आर.एन. रवि द्वारा न्यायमूर्ति रविंद्र विठलराव घुगे को कलकत्ता उच्च न्यायालय के 45वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ दिलाई गई।
न्यायमूर्ति रविंद्र विठलराव घुगे, जो पूर्व में बॉम्बे उच्च न्यायालय के न्यायाधीश और कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश रहे हैं, ने 9 सितंबर, 2026 को पदभार ग्रहण किया। वे कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश तपब्रत चक्रवर्ती का स्थान लेंगे, जिन्होंने 20 जून को सुजोय पॉल की सेवानिवृत्ति के पश्चात कार्यभार संभाला था।
प्रीलिम्स बिंदु (2)
पदजस्टिस रविंद्र विठलराव घुगे: कलकत्ता उच्च न्यायालय के 45वें मुख्य न्यायाधीश।
तथ्यन्यायमूर्ति घुगे पूर्व में बॉम्बे हाई कोर्ट के न्यायाधीश और कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यरत रहे।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारतीय न्यायिक प्रणाली की सुलभता और दक्षता को बढ़ाने में तकनीकी एकीकरण की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।
चर्चा में क्यों: मद्रास उच्च न्यायालय ने थप्पु वेंकटाचलम द्वारा पेरुन्दुरई विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में एस. जयकुमार की विजय को चुनौती देने के लिए दायर चुनावी याचिका को खारिज कर दिया है।
न्यायमूर्ति डी. भरत चक्रवर्ती की अध्यक्षता में मद्रास उच्च न्यायालय ने 9,693 मतों के अंतर से प्राप्त जीत को रद्द करनेकी मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। यह निर्णय भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की उन योजनाओं को प्रभावित करता है, जिनके अंतर्गत तमिलनाडु के पांच निर्वाचन क्षेत्रों में उपचुनाव आयोजित किए जाने हैं, जो वर्तमान में चुनाव याचिकाओं के निपटान की प्रतीक्षा में हैं।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
स्थानपेरुंदुरई तमिलनाडु की एक विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र है।
तथ्यS. Jayakumar ने 9,693 मतों के अंतर से पेरुंडराई विधानसभा सीट जीती।
संस्थाभारत निर्वाचन आयोग (ECI) उपचुनाव आयोजित करने के लिए जिम्मेदार निकाय है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारतीय निर्वाचन प्रक्रिया में न्यायिक निरीक्षण के महत्व और उपचुनावों के समयबद्ध संचालन पर इसके प्रभाव की चर्चा कीजिए।
चर्चा में क्यों: सत्य निकेतन में हुई एक घातक इमारत गिरने की घटना के पश्चात, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने 50 वर्ष से अधिक पुरानी दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) की इमारतों के लिए नियमित सुरक्षा ऑडिट और पुनर्विकास कोष की योजना की घोषणा की।
प्रस्ताव में 50 वर्ष से अधिक पुराने DDA भवनों के लिए प्रत्येक तीन से दस वर्षों में सुरक्षा ऑडिट का प्रावधान शामिल है। इन संरचनाओं के सक्रिय रखरखाव और पुनर्निर्माण की सुविधा हेतु एक पुनर्विकास कोष (Redevelopment Fund) प्रस्तावित किया गया है।
प्रीलिम्स बिंदु (3)
संस्थादिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA): दिल्ली में नियोजन और विकास के लिए उत्तरदायी निकाय।
तथ्य50 वर्ष से अधिक पुरानी इमारतों के लिए सुरक्षा ऑडिट का प्रस्ताव।
तथ्यऑडिट की आवृत्ति प्रत्येक तीन से दस वर्ष में प्रस्तावित है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: दिल्ली जैसे तेजी से विस्तारित होते महानगरीय क्षेत्रों में पुराने शहरी बुनियादी ढांचे की संरचनात्मक अखंडता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक संस्थागत तंत्रों का विश्लेषण कीजिए।