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भाग I · स्था. 11.2025 
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अर्थव्यवस्था करेंट अफेयर्स — यूपीएससी

यूपीएससी सिविल सेवा GS3 (अर्थव्यवस्था · विज्ञान-तकनीक · पर्यावरण · सुरक्षा) के अर्थव्यवस्था भाग से जुड़ी हर ख़बर, परीक्षा के नज़रिए से: चर्चा में क्यों, पृष्ठभूमि, प्रीलिम्स के तथ्य, अभ्यास प्रश्न और मेन्स प्रश्न। अब तक 2,293 नोट्स, रोज़ अपडेट।

पाठ्यक्रम के विषय: बुनियादी ढांचा (ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, रेलवे) (510) · उद्योग, निवेश एवं MSME (467) · पूंजी बाज़ार एवं SEBI (296) · मौद्रिक नीति, RBI एवं बैंकिंग (295) · विकास, महंगाई एवं वृहद आर्थिक संकेतक (277) · राजकोषीय नीति, बजट एवं कर (GST) (189) · रोज़गार एवं समावेशी विकास (142) · बाहरी क्षेत्र, व्यापार एवं FDI (117)

GS3अर्थव्यवस्था › बुनियादी ढांचा (ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, रेलवे)प्रीलिम्स

मुख्यमंत्री एन

चर्चा में क्यों: मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में ₹1.35 लाख करोड़ ($15 बिलियन) के Google हाइपरस्केल AI डेटा सेंटर के लिए आधारशिला रखी।

इस परियोजना के अंतर्गत विशाखपट्टनम के तारलुवाड़ा में 601.4 एकड़ क्षेत्र में 1-गीगावाट का हाइपरस्केल AI डेटा सेंटर बनाया जाएगा। यह गूगल (Google), अडानी इन्फ्रा (Adani Infra) और अन्य भागीदारों के बीच एक सहयोगात्मक प्रयास है, जिसका उद्घाटन सितंबर 2028 में होने की उम्मीद है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • तथ्यगूगल (Google) का विशाखापट्टनम AI डेटा सेंटर में निवेश $15 बिलियन (₹1.35 लाख करोड़) आंका गया है।
  • तथ्ययह सुविधा 1-Gigawatt हाइपरस्केल AI डेटा सेंटर (hyperscale AI data center) के रूप में डिजाइन की गई है।
  • स्थानयह प्रोजेक्ट आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में तारलुवाड़ा में स्थित है।
  • तथ्ययह प्रोजेक्ट 601.4 एकड़ के क्षेत्र को कवर करता है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: हाइपरस्केल एआई डेटा केंद्रों का विकास किस प्रकार भारत को एक वैश्विक डिजिटल केंद्र के रूप में स्थापित कर सकता है, तथा इस प्रक्रिया में ऊर्जा की खपत और डेटा संप्रभुता से संबंधित चिंताओं के समाधान की आवश्यकता का विश्लेषण कीजिए।

  • एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर: स्थिर ग्रिड इंटीग्रेशन की ज़रूरत वाले 1-गीगावाट पावर डिमांड वाले फैसिलिटी
  • डिजिटल संप्रभुता: इंटरनेशनल डेटा गेटवे स्टेटस और घरेलू डेटा प्रोटेक्शन नॉर्म्स के बीच संतुलन
  • इकोनॉमिक मल्टीप्लायर: आंध्र प्रदेश में नौकरियों का सृजन और क्षेत्रीय औद्योगिक विकास

मुख्य शब्द: हाइपरस्केल डेटा सेंटर · आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस · डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर · विदेशी प्रत्यक्ष निवेश · डेटा गेटवे

GS3अर्थव्यवस्था › मौद्रिक नीति, RBI एवं बैंकिंगप्रीलिम्स

एक्सिस बैंक और UCO बैंक सहित कई भारतीय बैंकों ने Q4 में ब्याज दरों में बढ़ोतरी और RBI द्वारा नुकसान के परिशोधन (loss amortization) के अनुरोधों को खारिज किए जाने के कारण महत्वपूर्ण ट्रेजरी नुकसान दर्ज किए हैं

चर्चा में क्यों: एक्सिस बैंक और UCO बैंक सहित कई भारतीय बैंकों ने Q4 में ब्याज दरों में बढ़ोतरी और RBI द्वारा नुकसान के परिशोधन (loss amortization) के अनुरोधों को खारिज किए जाने के कारण महत्वपूर्ण ट्रेजरी नुकसान दर्ज किए हैं।

एक्सिस बैंक, AU स्मॉल फाइनेंस बैंक और UCO बैंक को अपने बॉन्ड होल्डिंग्स पर मार्क-टू-मार्केट (mark-to-market) नुकसान उठाना पड़ा। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने चौथी तिमाही में इन नुकसानों को पूरी तरह से मान्यता देने का निर्देश दिया।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यMark-to-market losses: मौजूदा मार्केट कीमतों के आधार पर बॉन्ड होल्डिंग्स का मूल्यांकन।
  • संस्थाRBI: सेंट्रल बैंक ने ट्रेजरी लॉस (Treasury losses) को अमोर्टाइज (Amortize) करने के अनुरोधों को खारिज कर दिया।
  • तथ्यनुकसान को प्रभावित करने वाले कारक: बढ़ते ब्याज दरें और फॉरेन एक्सचेंज मार्केट (foreign exchange market) की पाबंदियां।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारतीय वाणिज्यिक बैंकों के ट्रेजरी पोर्टफोलियो पर बढ़ती ब्याज दरों के प्रभाव और बैंकों की लाभप्रदता पर भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के विनियामक रुख के निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।

  • एसेट-लायबिलिटी मिसमैच: इंटरेस्ट रेट में उतार-चढ़ाव से फिक्स्ड-इनकम सिक्योरिटीज की वैल्यूएशन प्रभावित हो रही है
  • रेगुलेटरी ओवरसाइट: फाइनेंशियल रिपोर्टिंग में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए लॉस एमोरटाइजेशन पर RBI का रुख
  • क्रेडिट कॉन्ट्रैक्शन: सतर्क लेंडिंग प्रैक्टिस के कारण लोन ग्रोथ में संभावित सुस्ती

मुख्य शब्द: मार्क-टू-मार्केट · ट्रेजरी मैनेजमेंट · इंटरेस्ट रेट में उतार-चढ़ाव · मौनेटरी पॉलिसी · एसेट-लायबिलिटी मैनेजमेंट

GS3अर्थव्यवस्था › पूंजी बाज़ार एवं SEBIप्रीलिम्स

जुलाई 2019 और मार्च 2026 के बीच, निफ्टी REIT-InvIT इंडेक्स ने 12% वार्षिक रिटर्न के साथ इक्विटी और फिक्स्ड इनकम दोनों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन दर्ज किया

चर्चा में क्यों: जुलाई 2019 और मार्च 2026 के बीच, निफ्टी REIT-InvIT इंडेक्स ने 12% वार्षिक रिटर्न के साथ इक्विटी और फिक्स्ड इनकम दोनों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन दर्ज किया।

Nifty REIT-InvIT इंडेक्स ने छह साल की अवधि में 12% का वार्षिक रिटर्न दिया। इसमें शामिल प्रमुख इंस्ट्रूमेंट्स में Embassy Office Parks REIT, Brookfield India Real Estate Trust और Nexus Select Trust शामिल हैं।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • तथ्यNifty REIT-InvIT इंडेक्स ने जुलाई 2019 और मार्च 2026 के बीच 12% का एनुअलाइज्ड रिटर्न (annualized return) दिया।
  • तथ्यREITs और InvITs की विशेषता अन्य एसेट क्लास (asset classes) के साथ कम कोरिलेशन (correlation) और प्रेडिक्टेबल कैश फ्लो (predictable cash flows) है।
  • तथ्यसंशोधित टैक्स फ्रेमवर्क के तहत REIT और InvIT यूनिट्स पर होने वाले कैपिटल गेन्स को इक्विटी इन्वेस्टमेंट (equity investments) के समान माना जाता है।
  • तथ्यएक्टिव ट्रस्ट के उदाहरणों में Embassy Office Parks REIT, Brookfield India Real Estate Trust और Nexus Select Trust शामिल हैं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में खुदरा निवेश पोर्टफोलियो में विविधता लाने और बुनियादी ढांचा वित्तपोषण को सुदृढ़ करने में 'रीट्स' (REITs) और 'इन्विट्स' (InvITs) की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।

  • एसेट डाइवर्सिफिकेशन: ट्रेडिशनल इक्विटी और डेट के साथ कम कोरिलेशन मार्केट वोलाटिलिटी के खिलाफ हेज प्रदान करता है
  • लिक्विडिटी डायनेमिक्स: रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर एसेट्स से मिलने वाला कैश फ्लो लॉन्ग-टर्म रिटर्न को स्थिर करता है
  • फ़िस्कल पॉलिसी: इक्विटी निवेश के साथ टैक्स पैरिटी से इंफ्रास्ट्रक्चर में इंस्टिट्यूशनल और रिटेल कैपिटल का प्रवाह बढ़ता है

मुख्य शब्द: एसेट एलोकेशन · कैपिटल मार्केट्स · इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग · यील्ड स्टेबिलिटी · विविधता

GS3अर्थव्यवस्था › पूंजी बाज़ार एवं SEBIप्रीलिम्स

वैल्यूएशन (Valuation) में अंतर और बाजार की अनिश्चितता के कारण कंपनियाँ D-Street पर अपना IPO डेब्यू टाल रही हैं

चर्चा में क्यों: वैल्यूएशन (Valuation) में अंतर और बाजार की अनिश्चितता के कारण कंपनियाँ D-Street पर अपना IPO डेब्यू टाल रही हैं, जबकि मंजूरी चाहने वाली कंपनियों की एक लंबी सूची तैयार है।

प्राइम डेटाबेस (Prime Database) के आंकड़ों के अनुसार, 146 कंपनियां ₹2.11 लाख करोड़ जुटाने के लिए मंजूरी की मांग कर रही हैं। SEBI ने दिसंबर तिमाही के डेटा वाली कंपनियों को जून तक IPO लॉन्च करने की अनुमति देने के लिए मंजूरी की समय सीमा में अस्थायी विस्तार दिया है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • तथ्यवर्तमान में 146 कंपनियाँ IPO अप्रूवल के लिए पाइपलाइन में हैं।
  • तथ्यपाइपलाइन में कंपनियों द्वारा मांगी गई कुल पूंजी ₹2.11 लाख करोड़ है।
  • संस्थाSEBI (Securities and Exchange Board of India) ने IPO अप्रूवल्स (approvals) पर टेम्परेरी एक्सटेंशन (temporary extensions) दिए।
  • तथ्यदिसंबर तिमाही के डेटा वाली कंपनियां जून तक IPO लॉन्च करने की अनुमति प्राप्त करती हैं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारतीय आईपीओ (IPO) बाजार में मूल्यांकन संबंधी विसंगतियों के लिए उत्तरदायी कारकों और पूंजी निर्माण पर उनके प्रभाव का विश्लेषण कीजिए।

  • वैल्यूएशन गैप: प्राइवेट फंडिंग राउंड और पब्लिक मार्केट प्राइसिंग की उम्मीदों के बीच का अंतर
  • रेगुलेटरी इंटरवेंशन: इन्वेस्टर प्रोटेक्शन और समय पर कैपिटल इन्फ्यूजन की ज़रूरत के बीच संतुलन
  • मार्केट सेंटीमेंट: प्राइमरी मार्केट लिस्टिंग के समय पर मैक्रोइकोनॉमिक अनिश्चितता का असर

मुख्य शब्द: कैपिटल मार्केट्स · IPO · वैल्यूएशन में अंतर · SEBI · प्राइमरी मार्केट · लिक्विडिटी

IBM के CIO लोवेलॉक ने AI-आधारित मैनेज्ड सर्विसेज (Managed Services) में भारत के अवसर पर जोर दिया

चर्चा में क्यों: IBM के CIO लोवेलॉक ने AI-आधारित मैनेज्ड सर्विसेज (Managed Services) में भारत के अवसर पर जोर दिया, साथ ही ओवरबिल्डिंग (Overbuilding) और मानकीकृत मुद्रीकरण (Standardized Monetization) की कमी के कारण निकट भविष्य में मार्जिन पर पड़ने वाले दबाव के प्रति आगाह किया।

गार्टनर (Gartner) के अनुमान के अनुसार, AI के प्रभाव से वैश्विक IT खर्च 6.31 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँचने की संभावना है। IBM के CIO लोवेलॉक (Lovelock) ने उल्लेख किया कि भारत का गहरा टैलेंट बेस (talent base) इसे मैनेज्ड सर्विसेज (managed services) में AI और एजेंटिक ऑटोमेशन (agentic automation) के लिए एक मजबूत स्थिति में रखता है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यAI के कारण ग्लोबल IT खर्च $6.31 ट्रिलियन तक पहुँचने का अनुमान है।
  • पदलवलॉक IBM के CIO हैं।
  • तथ्यभारत की गहरी टैलेंट बेस (talent base) के कारण, मैनेज्ड सर्विसेज (managed services) और एजेंटिक ऑटोमेशन (agentic automation) में भारत के पास अवसर मौजूद हैं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: जेनरेटिव एआई (Generative AI) और एजेंटिक ऑटोमेशन (Agentic Automation) के युग में भारतीय आईटी क्षेत्र के समक्ष मौजूद संरचनात्मक चुनौतियों और अवसरों का विश्लेषण कीजिए।

  • मार्जिन कंप्रेशन: AI-इनेबल्ड सेवाओं पर कम कीमत की क्लाइंट डिमांड बनाम भारी इंफ्रास्ट्रक्चर लागत
  • मोनेटाइजेशन गैप: गहरी टैलेंट उपलब्धता के बावजूद AI डिलीवरी के लिए स्टैंडर्डाइज्ड स्ट्रैटेजी की कमी
  • इंफ्रास्ट्रक्चर डायनेमिक्स: अमेरिका केंद्रित डेटा सेंटर निर्माण में शामिल हुए बिना रिमोट AI डिलीवरी देने की भारत की क्षमता

मुख्य शब्द: मैनेज्ड सर्विसेज · एजेंटिक ऑटोमेशन · मार्जिन स्क्वीज़ · संरचनात्मक बाधाएं · मुद्रीकरण रणनीतियां

GS3अर्थव्यवस्था › बुनियादी ढांचा (ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, रेलवे)प्रीलिम्स

महाराष्ट्र स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MSRDC) ने खंडाला घाट पर ट्रैफिक की समस्या को कम करने के लिए 1 मई को मुंबई-पुणे मिसिंग लिंक (Missing Link) के उद्घाटन की घोषणा की है

चर्चा में क्यों: महाराष्ट्र स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MSRDC) ने खंडाला घाट पर ट्रैफिक की समस्या को कम करने के लिए 1 मई को मुंबई-पुणे मिसिंग लिंक (Missing Link) के उद्घाटन की घोषणा की है।

यह परियोजना खोपोली को कुसगाँव से जोड़ती है, जिससे इन दोनों स्थानों के बीच की दूरी 19 किमी से घटकर 13.3 किमी रह जाएगी।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • तथ्यमुंबई-पुणे मिसिंग लिंक (Missing Link) खोपोली और कुसगांव के बीच की दूरी को घटाकर 13.3 किमी कर देता है।
  • तथ्यप्रोजेक्ट की लागत ₹6,695 करोड़ आंकी गई थी।
  • संस्थामहाराष्ट्र स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MSRDC) कार्यान्वयन निकाय (executing body) है।
  • स्थानयह प्रोजेक्ट मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे को जोड़ने के लिए खंडाला घाट को बाईपास करता है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: मुंबई-पुणे मिसिंग लिंक जैसी बुनियादी ढांचा परियोजनाएं भारत में क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण और लॉजिस्टिक दक्षता में किस प्रकार योगदान देती हैं, इसका विश्लेषण कीजिए।

  • लॉजिस्टिक एफिशिएंसी: यात्रा के समय और दूरी में कमी से सामान और सेवाओं की आवाजाही तेज़ होती है
  • जाम कम करना: खंडाला घाट जैसे भौगोलिक बॉटलनैक्स को बायपास करने से सड़क सुरक्षा और विश्वसनीयता में सुधार होता है
  • प्रोजेक्ट लाइफसाइकिल: बड़े पैमाने के इंफ्रास्ट्रक्चर टाइमलाइन्स पर COVID-19 और मौसम जैसे बाहरी झटकों का असर

मुख्य शब्द: लॉजिस्टिक कुशलता · क्षेत्रीय कनेक्टिविटी · इंफ्रास्ट्रक्चर विकास · ट्राफ़िक की भीड़ कम करना · प्रोजेक्ट मैनेजमेंट

GS3अर्थव्यवस्था › बाहरी क्षेत्र, व्यापार एवं FDIप्रीलिम्स + मेन्स

भारत और न्यूजीलैंड 27 अप्रैल, 2026 को एक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर करने के लिए तैयार हैं

चर्चा में क्यों: भारत और न्यूजीलैंड 27 अप्रैल, 2026 को एक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर करने के लिए तैयार हैं, जिससे भारतीय निर्यातकों को न्यूजीलैंड के बाजार में 100% शुल्क-मुक्त (duty-free) पहुंच मिलेगी।

यह FTA भारत से न्यूजीलैंड जाने वाले 100% निर्यात पर लगने वाले टैरिफ (Tariffs) को हटा देता है और न्यूजीलैंड से होने वाले वर्तमान आयात के 95% पर टैरिफ को कम या समाप्त कर देता है। इस समझौते में छात्र गतिशीलता (Student Mobility), प्रोफेशनल वीजा और भारत में न्यूजीलैंड के निवेश के लिए विशिष्ट प्रावधान शामिल हैं।

प्रीलिम्स बिंदु (5)
  • तथ्ययह FTA न्यूजीलैंड को भारतीय एक्सपोर्ट्स के लिए 100% ड्यूटी-फ्री एक्सेस प्रदान करता है।
  • तथ्ययह समझौता न्यूज़ीलैंड से होने वाले वर्तमान आयात के 95% पर टैरिफ (tariffs) को कम करता है या समाप्त करता है।
  • तथ्यइस FTA में छात्र गतिशीलता (student mobility) और प्रोफेशनल वीजा (professional visas) के लिए प्रावधान शामिल हैं।
  • पदपीयूष गोयल भारत के वाणिज्य मंत्री हैं।
  • पदटॉड मैक्ले (Todd McClay) न्यूजीलैंड के ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट मिनिस्टर (Minister for Trade & Investment) हैं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने में मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) की भूमिका का विश्लेषण कीजिए, साथ ही घरेलू उद्योगों के संरक्षण और श्रम गतिशीलता से संबंधित चिंताओं के संदर्भ में भी चर्चा कीजिए।

  • ट्रेड इम्बैलेंस: घरेलू मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर ड्यूटी-फ्री एक्सेस का संभावित असर
  • लेबर मोबिलिटी: प्रोफेशनल वीज़ा में आसानी और घरेलू रोजगार सुरक्षा के बीच संतुलन
  • इन्वेस्टमेंट फ्लो: इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी के लिए न्यूजीलैंड की कैपिटल का इस्तेमाल

मुख्य शब्द: व्यापार उदारीकरण · निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता · मार्केट एक्सेस · द्विपक्षीय व्यापार · स्टूडेंट मोबिलिटी

GS3अर्थव्यवस्था › विकास, महंगाई एवं वृहद आर्थिक संकेतकप्रीलिम्स

केंद्र सरकार ने सुमन के.बेरी की जगह अशोक कुमार लाहिरी को नीति आयोग का उपाध्यक्ष नियुक्त किया है

चर्चा में क्यों: केंद्र सरकार ने सुमन के.बेरी की जगह अशोक कुमार लाहिरी को नीति आयोग का उपाध्यक्ष नियुक्त किया है।

पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार और पश्चिम बंगाल के विधायक अशोक कुमार लाहिरी को 25 अप्रैल, 2026 को नीति आयोग का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वह सुमन के. बेरी का स्थान लेंगे, जो मई 2022 से इस पद पर कार्यरत थे।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • पदअशोक कुमार लाहिड़ी: अप्रैल 2026 में नीति आयोग के वाइस-चेयरपर्सन (Vice-Chairperson) के रूप में नियुक्त।
  • संस्थानीति आयोग: सुमन के. बेरी की जगह नए वाइस-चेयरपर्सन की नियुक्ति।
  • तथ्यनीति आयोग के पैनल सदस्यों में के.वी. राजू, एम. श्रीनिवास, अभय करंडिकर, गोवर्धन दास, राजीव गौबा, विजय कुमार सारस्वत, रमेश चंद, विनोद कुमार पॉल और अरविंद विरमी शामिल हैं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: नीति आयोग की नीतिगत परामर्श संरचना के माध्यम से सहकारी संघवाद को बढ़ावा देने और भारत के आर्थिक सुधारों को गति देने में इसकी भूमिका का विश्लेषण कीजिए।

  • पॉलिसी कोऑर्डिनेशन: केंद्र के रिफॉर्म एजेंडा और राज्यों की इम्प्लीमेंटेशन प्रायोरिटी के बीच संतुलन
  • संस्थागत भूमिका: प्लानिंग कमीशन से साक्ष्य-आधारित नीति के लिए 'थिंक टैंक' में बदलाव

मुख्य शब्द: सहकारी संघवाद · पॉलिसी एडवाइजरी · आर्थिक सुधार · थिंक टैंक · नीति आयोग

GS3अर्थव्यवस्था › पूंजी बाज़ार एवं SEBIमेन्स

SEBI के चेयरमैन तुहिन कांता पांडे ने बाजार में नवाचार (Innovation) और निवेशकों की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने के लिए नियमों को सरल बनाने और तकनीक आधारित निगरानी (Tech-led oversight) की आवश्यकता पर जोर दिया

चर्चा में क्यों: SEBI के चेयरमैन तुहिन कांता पांडे ने बाजार में नवाचार (Innovation) और निवेशकों की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने के लिए नियमों को सरल बनाने और तकनीक आधारित निगरानी (Tech-led oversight) की आवश्यकता पर जोर दिया।

SEBI ने ओपन क्राई सिस्टम (Open Outcry System) से तकनीक-आधारित और पारदर्शी बाजार की ओर कदम बढ़ाया है। बाजार की दक्षता बढ़ाने के लिए डिमैटेरियलाइजेशन (Dematerialization) और स्क्रीन-आधारित ट्रेडिंग जैसे प्रमुख सुधारों का उल्लेख किया गया है।

प्रीलिम्स बिंदु (1)
  • तथ्यस्क्रीन-आधारित ट्रेडिंग (Screen-based trading): एक ऐसी प्रणाली जहाँ ऑर्डर्स को ओपन क्राई (open outcry) के बजाय इलेक्ट्रॉनिक स्क्रीन्स के माध्यम से निष्पादित किया जाता है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत के पूंजी बाजारों में नवाचार को बढ़ावा देने के साथ-साथ बाजार की अखंडता सुनिश्चित करने में प्रौद्योगिकी-आधारित निगरानी के महत्व पर चर्चा कीजिए।

  • रेगुलेटरी आर्बिट्रेज: तेज़ी से होते फिनटेक इनोवेशन और कड़े इन्वेस्टर प्रोटेक्शन फ्रेमवर्क के बीच संतुलन
  • मार्केट ट्रांसपेरेंसी: जानकारी की असमानता कम करने के लिए मैनुअल आउटक्राई से ऑटोमेटेड स्क्रीन-आधारित सिस्टम की ओर बदलाव

मुख्य शब्द: मार्केट इंटीग्रिटी · रेगुलेटरी ओवरसाइट · डीमैटरियलाइजेशन · निवेशक संरक्षण · तकनीकी बदलाव

GS3अर्थव्यवस्था › पूंजी बाज़ार एवं SEBIप्रीलिम्स

अप्रैल 2026 में फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) द्वारा 43,967 करोड़ रुपये का शुद्ध बहिर्वाह (net outflow) दर्ज किया गया

चर्चा में क्यों: अप्रैल 2026 में फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) द्वारा 43,967 करोड़ रुपये का शुद्ध बहिर्वाह (net outflow) दर्ज किया गया, जो लगातार 10वें महीने है जब इन्होंने बिकवाली की है।

शुक्रवार को FIIs द्वारा घरेलू शेयरों की बिकवाली के कारण निफ्टी और सेंसेक्स में भारी गिरावट दर्ज की गई। अप्रैल तक 2026 में FIIs द्वारा किए गए कुल बहिर्गमन (Exodus) की राशि 1.75 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • तथ्यअप्रैल 2026 में FII नेट आउटफ्लो: 43,967 करोड़ रुपये।
  • तथ्य2026 में कुल FII एग्जोडस (Exodus): 1.75 लाख करोड़ रुपये।
  • तथ्यFII सेलिंग ट्रेंड: अप्रैल 2026 तक लगातार 10वां महीना।
  • तथ्यNifty और Sensex: FII आउटफ्लो से प्रभावित होने वाले प्राथमिक भारतीय स्टॉक मार्केट इंडेक्स।
मेन्स के लिए

प्रश्न: विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा पूंजी की निकासी के कारण भारतीय पूंजी बाजारों में बढ़ती अस्थिरता के कारकों का विश्लेषण कीजिए और घरेलू निवेश को सुदृढ़ करने हेतु आवश्यक उपायों का सुझाव दीजिए। विश्लेषण कीजिए।

  • ग्लोबल लिक्विडिटी शिफ्ट: उभरते बाजारों में कैपिटल फ्लो पर FOMC के फैसलों का असर
  • सेक्टोरल लीडरशिप गैप: स्पष्ट लीडरशिप के लिए FII की प्राथमिकता बनाम घरेलू रिटेल इन्वेस्टर की भागीदारी
  • जियोपॉलिटिकल रिस्क प्रीमियम: ग्लोबल एसेट एलोकेशन स्ट्रैटेजीज पर अमेरिका-ईरान बातचीत का प्रभाव

मुख्य शब्द: पूंजी का पलायन · लिक्विडिटी डायनेमिक्स · मार्केट में उतार-चढ़ाव · एसेट एलोकेशन · मौनेटरी पॉलिसी ट्रांसमिशन

GS3अर्थव्यवस्था › रोज़गार एवं समावेशी विकासमेन्स

आंध्र प्रदेश सरकार ने कौशल विभागों को एकीकृत करने और संस्थागत समन्वय को बढ़ावा देने के लिए 'कमिश्नरेट ऑफ स्किल

चर्चा में क्यों: आंध्र प्रदेश सरकार ने कौशल विभागों को एकीकृत करने और संस्थागत समन्वय को बढ़ावा देने के लिए 'कमिश्नरेट ऑफ स्किल, एम्प्लॉयमेंट एंड ट्रेनिंग' (Commissionerate of Skill, Employment and Training) बनाने की घोषणा की है।

इस पहल के अंतर्गत जिला-केंद्रित जिला कौशल विकास योजनाओं (District Skill Development Plans) को लागू करने के लिए कौशल, रोजगार और प्रशिक्षण आयुक्तालय (Commissionerate of Skill, Employment and Training) का गठन किया जाएगा। इसमें जिला रोजगार और कौशल अधिकारी और ग्राम कौशल अधिकारियों सहित एक बहु-स्तरीय अधिकारी संरचना का उपयोग किया जाएगा, जिसे 'नipunyam' प्लेटफॉर्म का समर्थन प्राप्त होगा।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थाकमिश्नरेट ऑफ स्किल, एम्प्लॉयमेंट एंड ट्रेनिंग: आंध्र प्रदेश में कौशल विकास के लिए एक नया प्रस्तावित एकीकृत निकाय।
  • तथ्यडिस्ट्रिक्ट स्किल डेवलपमेंट प्लान्स (District Skill Development Plans): स्थानीय आर्थिक क्षमता के अनुरूप प्राथमिकता वाले क्षेत्रों और रोजगार के अवसरों की पहचान करने के लिए तैयार किए गए प्लान।
  • तथ्यनाइपुन्य (Naipunyam): आंध्र प्रदेश में मोबिलाइजेशन, ट्रेनिंग, एम्प्लॉयर एंगेजमेंट और प्लेसमेंट ट्रैकिंग के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक प्लेटफॉर्म।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में क्षेत्रीय आर्थिक असमानताओं को दूर करने और युवाओं की रोजगार क्षमता में सुधार करने के लिए कौशल विकास के प्रति जिला-केंद्रित दृष्टिकोण किस प्रकार प्रभावी हो सकता है, चर्चा कीजिए।

  • संस्थागत तालमेल: ट्रेनिंग और प्लेसमेंट ट्रैकिंग को आसान बनाने के लिए प्रशासनिक साइलो्स को कम करना
  • स्थानीय आर्थिक तालमेल: कौशल विकास को विशिष्ट जिला-स्तरीय औद्योगिक क्षमता से जोड़ना
  • लास्ट-माइल कनेक्टिविटी: ग्रामीण युवाओं और फॉर्मल एम्प्लॉयमेंट के बीच की दूरी कम करने के लिए विलेज स्किल ऑफिसर्स का उपयोग

मुख्य शब्द: संस्थागत कन्वर्जेंस · डिस्ट्रिक्ट-सेंट्रिक अप्रोच · कौशल विकास · युवा सशक्तिकरण · आर्थिक विकास

GS3अर्थव्यवस्था › बुनियादी ढांचा (ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, रेलवे)प्रीलिम्स

ऊर्जा मंत्री गोटिपति रवि कुमार ने चित्तूर जिले के पुथलापट्टू में PM सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना शुरू की

चर्चा में क्यों: ऊर्जा मंत्री गोटिपति रवि कुमार ने चित्तूर जिले के पुथलापट्टू में PM सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना शुरू की। इस योजना के तहत 4,200 SC/ST परिवारों को 2 किलोवाट (kW) के मुफ्त सोलर रूफटॉप सिस्टम प्रदान किए जाएंगे।

इस पहल के अंतर्गत पुथलपट्टु निर्वाचन क्षेत्र के SC/ST परिवारों के लिए 2 kW के सोलर रूफटॉप सिस्टम का निःशुल्क इंस्टॉलेशन किया जाएगा। इस परियोजना की अनुमानित लागत ₹54 करोड़ है और इसका मुख्य उद्देश्य किफायती एवं गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • योजनाPM सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना: घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम प्रदान करनेकी एक केंद्रीय पहल।
  • तथ्यपुथलपट्टू निर्वाचन क्षेत्र में 4,200 SC/ST परिवारों को सोलर इनिशिएटिव (solar initiative) से लाभान्वित करने का लक्ष्य रखा गया है।
  • तथ्यनिर्वाचन क्षेत्र में सोलर रूफटॉप इंस्टॉलेशन की अनुमानित लागत ₹54 करोड़ है।
  • तथ्यलगाए जा रहे सोलर रूफटॉप सिस्टम की विशिष्ट क्षमता 2 किलोवाट (kW) है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना जैसी विकेंद्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा पहल किस प्रकार भारत के ऊर्जा सुरक्षा और सामाजिक न्याय के लक्ष्यों को प्राप्त करने में योगदान दे सकती हैं, चर्चा कीजिए।

  • एनर्जी इक्विटी: पिछड़े SC/ST समुदायों को मुफ्त सोलर इंफ्रास्ट्रक्चर देकर ग्रामीण-शहरी बिजली की दूरी को कम करना
  • ग्रिड स्टेबिलिटी: डिस्ट्रिब्यूटेड रूफटॉप सोलर जनरेशन के जरिए सेंट्रल ग्रिड पर पीक डिमांड कम करना
  • राजकोषीय ट्रेड-ऑफ: मुफ्त इंस्टॉलेशन के लिए भारी शुरुआती कैपिटल एक्सपेंडिचर और प्रति व्यक्ति बिजली लागत में लंबी अवधि की कमी के बीच संतुलन

मुख्य शब्द: विकेंद्रीकृत ऊर्जा · रिन्यूएबल एनर्जी ट्रांज़िशन · ऊर्जा इक्विटी · डिस्ट्रीब्यूटेड जनरेशन · सामाजिक समावेश

GS3अर्थव्यवस्था › मौद्रिक नीति, RBI एवं बैंकिंगप्रीलिम्स + मेन्स

RBI की मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee) ने अप्रैल 2026 में नीतिगत दरों (policy rates) को यथावत रखा है

चर्चा में क्यों: RBI की मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee) ने अप्रैल 2026 में नीतिगत दरों (policy rates) को यथावत रखा है। समिति ने विकास और महंगाई (inflation) के लिए पश्चिम एशिया संघर्ष को एक प्रमुख कारक बताया है।

मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee), जिसमें गवर्नर संजय मल्होत्रा और बाहरी सदस्य राम सिंह एवं इंद्रनिल भट्टाचर्या शामिल हैं, ने पश्चिम एशिया संघर्ष की अवधि, एल निनो (El Nino) और सप्लाई चेन में व्यवधान को प्राथमिक जोखिमों के रूप में पहचाना है। समिति ने टिप्पणी की कि हालांकि कमोडिटी की कीमतें और निर्यात संबंधी चुनौतियां नीचे की ओर जोखिम (downside risks) पैदा करती हैं, फिर भी भारतीय अर्थव्यवस्था लचीली बनी हुई है।

प्रीलिम्स बिंदु (2)
  • तथ्यRBI ने अप्रैल 2026 की मीटिंग में पॉलिसी रेट्स को यथावत (status quo) रखा।
  • तथ्यएल निनो (El Nino) और वेस्ट एशिया संघर्ष को महंगाई की अनिश्चितता के प्राथमिक कारकों के रूप में उद्धृत किया गया।
मेन्स के लिए

प्रश्न: पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक संघर्ष भारत की मौद्रिक नीति और व्यापक आर्थिक स्थिरता को किस प्रकार प्रभावित करते हैं? इस संदर्भ में, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) बाहरी आपूर्ति श्रृंखला के झटकों को कम करनेके लिए किन उपायों को अपना सकता है? चर्चा कीजिए।

  • एक्सटर्नल शॉक ट्रांसमिशन: वैश्विक कमोडिटी कीमतों में बढ़ोतरी का घरेलू हेडलाइन महंगाई पर असर
  • मौनेटरी पॉलिसी की दुविधा: भू-राजनीतिक बाधाओं से होने वाली सप्लाई-साइड महंगाई के मुकाबले ब्याज दर स्थिरता को संतुलित करना
  • सप्लाई चेन की कमजोरी: पश्चिम एशिया में समुद्री और लॉजिस्टिक्स रुकावटों से एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड सेक्टरों को खतरा

मुख्य शब्द: मौनेटरी पॉलिसी · भू-राजनीतिक जोखिम · सप्लाई चेन में रुकावट · महंगाई लक्ष्यीकरण · मैक्रोइकोनॉमिक रेजिलिएंस

GS3अर्थव्यवस्था › पूंजी बाज़ार एवं SEBIप्रीलिम्स

SEBI विशेषज्ञ पैनल ने लंबे समय से चले आ रहे नियामक अवरोधों (regulatory hurdles) को दूर करने के लिए नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के प्रस्ताव को मंजूरी दी है

चर्चा में क्यों: SEBI विशेषज्ञ पैनल ने लंबे समय से चले आ रहे नियामक अवरोधों (regulatory hurdles) को दूर करने के लिए नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस प्रस्ताव के तहत, कोलोकेशन और डार्क फाइबर मामलों को लगभग ₹1,800 करोड़ में निपटाया जाएगा।

सेबी (SEBI) के विशेषज्ञ पैनल ने को-लोकेशन (colocation) और डार्क फाइबर (dark fibre) मामलों से जुड़े NSE के सेटलमेंट आवेदन को मंजूरी दे दी है। यह सेटलमेंट लगभग ₹1,800 करोड़ का है, जिसका उद्देश्य गवर्नेंस और टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी चिंताओं का समाधान करना है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थाSEBI: भारत में सिक्योरिटीज और कैपिटल मार्केट्स के लिए प्राथमिक रेगुलेटर।
  • तथ्यNSE सेटलमेंट अमाउंट: कोलोकेशन (colocation) और डार्क फाइबर (dark fibre) मामलों के लिए लगभग ₹1,800 करोड़।
  • तथ्यNSE: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (National Stock Exchange of India), भारत का एक प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत के पूंजी बाजारों की अखंडता बनाए रखने में सुदृढ़ कॉर्पोरेट प्रशासन और विनियामक निरीक्षण के महत्व पर चर्चा कीजिए।

  • रेगुलेटरी ओवरसाइट: मार्केट मैनिपुलेशन रोकने के लिए टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा हैंडलिंग में पारदर्शिता सुनिश्चित करना
  • संस्थागत अखंडता: ऐतिहासिक शिकायतों के त्वरित निपटान और शासन के कड़े नियमों के बीच संतुलन

मुख्य शब्द: कॉरपोरेट गवर्नेंस · रेगुलेटरी कंप्लायंस · कैपिटल मार्केट इंटीग्रिटी · मार्केट ओवरसाइट

GS3अर्थव्यवस्था › मौद्रिक नीति, RBI एवं बैंकिंगप्रीलिम्स + मेन्स

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने सुप्रीम कोर्ट के 13 फरवरी के उस फैसले के खिलाफ अपील की है

चर्चा में क्यों: स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने सुप्रीम कोर्ट के 13 फरवरी के उस फैसले के खिलाफ अपील की है, जिसमें कहा गया था कि 'स्पेक्ट्रम' को इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्ट्सी कोड (IBC) की कार्यवाही में एक एसेट (Asset) के रूप में नहीं माना जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया है कि स्पेक्ट्रम एक दुर्लभ प्राकृतिक संसाधन है जो भारत सरकार के स्वामित्व में है, न कि दूरसंचार सेवा प्रदाताओं (Telecom Service Providers - TSPs) की संपत्ति। SBI का तर्क है कि यह फैसला दिवालियापन के मामलों में ऋणदाताओं के लिए बैंक फाइनेंसिंग और जोखिम मूल्यांकन (Risk Assessment) को प्रभावित करता है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यसुप्रीम कोर्ट का फैसला: 13 फरवरी।
  • संस्थाSBI: स्टेट बैंक ऑफ इंडिया।
  • तथ्यस्पेक्ट्रम (Spectrum): इसे भारत सरकार के स्वामित्व वाले एक सीमित सार्वजनिक संसाधन (finite public resource) के रूप में परिभाषित किया गया है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में दूरसंचार कंपनियों के दिवाला ढांचे (insolvency framework) पर स्पेक्ट्रम को निजी संपत्ति के बजाय एक सार्वजनिक संसाधन के रूप में मानने के निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।

  • लेंडर रिस्क: इन्सोल्वेंसी के दौरान बैंक लोन के लिए स्पेक्ट्रम को कोलैटरल बनाना मुश्किल
  • रेगुलेटरी फ्रिक्शन: सार्वजनिक संसाधनों पर सरकारी स्वामित्व और निजी वाणिज्यिक अधिकारों के बीच टकराव
  • वैल्यूएशन गैप: दिवालियापन में नॉन-ट्रांसफरेबल लाइसेंस के आर्थिक मूल्य का आकलन करने में चुनौतियां

मुख्य शब्द: इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्ट्सी कोड · सार्वजनिक संसाधन · कोलेटरलाइजेशन · जोखिम मूल्यांकन · स्पेक्ट्रम लाइसेंसिंग

GS3अर्थव्यवस्था › बुनियादी ढांचा (ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, रेलवे)प्रीलिम्स

केंद्रीय रेलवे मंत्रालय ने केरल राज्य सरकार को सिल्वरलाइन (SilverLine) सेमी-हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट की DPR (Detailed Project Report) में बदलाव करने का निर्देश दिया है, ताकि स्टैंडर्ड गेज के बजाय ब्रॉड गेज ट्रैक का उपयोग किया जा सके

चर्चा में क्यों: केंद्रीय रेलवे मंत्रालय ने केरल राज्य सरकार को सिल्वरलाइन (SilverLine) सेमी-हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट की DPR (Detailed Project Report) में बदलाव करने का निर्देश दिया है, ताकि स्टैंडर्ड गेज के बजाय ब्रॉड गेज ट्रैक का उपयोग किया जा सके।

रेलवे बोर्ड गुजरात में सरखेज-धोलेरा परियोजना के आधार पर सेमी-हाई-स्पीड ब्रॉड गेज (BG) कॉरिडोर के लिए मानक विकसित कर रहा है। सिल्वरलाइन (SilverLine) परियोजना केरल में एक लंबे समय से लंबित सेमी-हाई-स्पीड रेल पहल है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यसिल्वरलाइन (SilverLine): केरल में एक सेमी-हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट।
  • तथ्यसरखेज–धोलेरा: गुजरात में एक प्रोजेक्ट जिसे सेमी-हाई-स्पीड BG कॉरिडोर मानकों के लिए आधार के रूप में उपयोग किया गया है।
  • तथ्यब्रॉड गेज (BG): सिल्वरलाइन प्रोजेक्ट के रिवीजन के लिए रेलवे मंत्रालय द्वारा अनिवार्य किया गया ट्रैक स्टैंडर्ड।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में विभिन्न राज्यों की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में रेल गेज के मानकीकरण के तार्किक और आर्थिक निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।

  • अंतर-राज्य समन्वय: राज्य-आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर को नेशनल रेलवे स्टैंडर्ड्स के साथ जोड़ना
  • तकनीकी मानकीकरण: राज्य द्वारा वित्तपोषित रेल और राष्ट्रीय ब्रॉड गेज नेटवर्क के बीच इंटरऑपरेबिलिटी सुनिश्चित करना

मुख्य शब्द: इंटरऑपरेबिलिटी · इंफ्रास्ट्रक्चर मानकीकरण · संघीय समन्वय · लॉजिस्टिक कुशलता

नेशनल इंश्योरेंस कंपनी, ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी अपनी सॉल्वेंसी रेश्यो (solvency ratios) में सुधार करने और लगातार हो रहे नुकसान को दूर करने के लिए NSE IPO पर विचार कर रही हैं

चर्चा में क्यों: नेशनल इंश्योरेंस कंपनी, ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी अपनी सॉल्वेंसी रेश्यो (solvency ratios) में सुधार करने और लगातार हो रहे नुकसान को दूर करने के लिए NSE IPO पर विचार कर रही हैं।

संभावित IPO के माध्यम से मौजूदा शेयरधारकों द्वारा हिस्सेदारी कम करने (dilution of stakes) के जरिए ₹20,000 करोड़ से अधिक जुटाने का अनुमान है। कमजोर अंडरराइटिंग प्रदर्शन के कारण, वर्तमान में ये तीनों कंपनियाँ रेगुलेटरी सॉल्वेंसी मैंडेट (regulatory solvency mandates) से नीचे काम कर रही हैं।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यसंभावित IPO से होने वाली आय ₹20,000 करोड़ से अधिक होने का अनुमान है।
  • संस्थानेशनल इंश्योरेंस कंपनी, ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (PSUs) हैं।
  • तथ्यIPO रणनीति में एक्सचेंज द्वारा नए इक्विटी जारी करने के बजाय मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी को कम (dilute) करना शामिल है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: बीमा क्षेत्र में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) के समक्ष आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए और उनकी वित्तीय सुदृढ़ता में सुधार करने में पूंजी बाजार सूचीकरण (capital market listings) की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।

  • सॉल्वेंसी संकट: कमजोर अंडरराइटिंग परफॉरमेंस और लगातार ऑपरेशनल लॉस से दबाव
  • कैपिटल इन्फ्यूजन: रेगुलेटरी सॉल्वेंसी मैंडेट्स को पूरा करने के लिए सरकारी हिस्सेदारी में कमी
  • बाज़ार में प्रतिस्पर्धा: प्राइवेट इंश्योरेंस सेक्टर की गतिशीलता पर PSU लिस्टिंग का असर

मुख्य शब्द: सॉल्वेंसी रेशियो · अंडरराइटिंग परफॉरमेंस · कैपिटल डाइल्यूशन · सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम · कैपिटल मार्केट्स

GS3अर्थव्यवस्था › मौद्रिक नीति, RBI एवं बैंकिंगमेन्स

इंडिया रेटिंग्स (India Ratings) की रिपोर्ट के अनुसार, NBFC वर्गीकरण पर RBI का ड्राफ्ट कोर इन्वेस्टमेंट कंपनियों (CICs) को असमान रूप से प्रभावित करता है

चर्चा में क्यों: इंडिया रेटिंग्स (India Ratings) की रिपोर्ट के अनुसार, NBFC वर्गीकरण पर RBI का ड्राफ्ट कोर इन्वेस्टमेंट कंपनियों (CICs) को असमान रूप से प्रभावित करता है, क्योंकि यह उन्हें संभावित रूप से उच्च अनुपालन लागत (compliance costs) और लिस्टिंग आवश्यकताओं के दायरे में ला सकता है।

RBI के ड्राफ्ट में NBFC-UL के रूप में वर्गीकरण के लिए प्रबंधन के तहत परिसंपत्तियों (Assets Under Management - AUM) की एक सीमा 1 लाख रुपये प्रस्तावित की गई है। इस राशि से अधिक की समेकित परिसंपत्तियों (Consolidated Assets) वाले CICs को, भले ही वे प्रमोटर-स्तर पर पूंजी आवंटन के लिए संरचित हों, अधिक रेगुलेटरी बोझ (Regulatory Burdens) का सामना करना पड़ सकता है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थाभारतीय रिज़र्व बैंक (RBI): भारतीय रिज़र्व बैंक भारत में NBFCs के लिए प्राथमिक रेगुलेटर है।
  • तथ्यNBFC-UL: Assets under management (AUM) के आधार पर प्रस्तावित वर्गीकरण की सीमा 1 लाख रुपये है।
  • तथ्यCICs: Core Investment Companies वे संस्थाएं हैं जो मुख्य रूप से प्रमोटर-लेवल (promoter-level) पर कैपिटल एलोकेशन (capital allocation) के लिए बनाई जाती हैं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: कोर इन्वेस्टमेंट कंपनियों (CICs) पर कड़े विनियामक वर्गीकरण के निहितार्थों और वित्तीय निरीक्षण तथा प्रवर्तक-आधारित पूंजी आवंटन के बीच संतुलन पर चर्चा कीजिए।

  • अनुपालन का बोझ: गैर-सार्वजनिक रूप से उन्मुख प्रमोटर संस्थाओं के लिए बढ़ी हुई ऑपरेशनल लागत और लिस्टिंग की ज़रूरतें
  • रेगुलेटरी आर्बिट्रेज: सिस्टमिक रिस्क की निगरानी और CICs के अनोखे कैपिटल स्ट्रक्चर के बीच संतुलन

मुख्य शब्द: रेगुलेटरी ओवरसाइट · अनुपालन लागत · पूंजी आवंटन · सिस्टमैटिक रिस्क · NBFC वर्गीकरण

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विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि 2014 से मेट्रो नेटवर्क में भारी निवेश के बावजूद

चर्चा में क्यों: विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि 2014 से मेट्रो नेटवर्क में भारी निवेश के बावजूद, खराब मांग के पूर्वानुमान और एकीकृत परिवहन (Integrated Transport) की कमी के कारण कई शहरों में कम राइडरशिप (Ridership) देखी जा रही है।

भारत ने 2014 से मेट्रो विस्तार में अरबों डॉलर का निवेश किया है। जहाँ दिल्ली ने यात्रियों की संख्या के अनुमानों को पार कर लिया है, वहीं मुंबई की एक्वा लाइन (Aqua Line) सामर्थ्य और फीडर बसों की कमी के कारण कम यात्रियों की संख्या से जूझ रही है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यभारत में मेट्रो विस्तार (Metro expansion) में निवेश 2014 से निरंतर जारी है।
  • स्थानमुंबई की Aqua Line को विशेष रूप से कम राइडरशिप (ridership) वाले प्रोजेक्ट के रूप में उद्धृत किया गया है।
  • तथ्यदिल्ली को एक ऐसे शहर के रूप में नोट किया गया है जिसने अपने मेट्रो राइडरशिप प्रोजेक्शन (ridership projections) को पार कर लिया है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत के तेजी से शहरीकरण की ओर बढ़ते शहरों में मेट्रो रेल बुनियादी ढांचे के इष्टतम उपयोग में बाधा डालने वाले संरचनात्मक और आर्थिक अवरोधों का विश्लेषण कीजिए।

  • डिमांड फोरकास्टिंग गैप: राइडरशिप के गलत अनुमानों से इंफ्रास्ट्रक्चर का कम इस्तेमाल और एसेट्स का नुकसान
  • इंटरमॉडल फ्रिक्शन: एकीकृत बस सिस्टम की कमी और खराब लास्ट-माइल कनेक्टिविटी से यात्रियों के लिए पहुंच में बाधा
  • किफायत बनाम निवेश: मेट्रो सेवाओं की पहुंच कम आय वाले यात्रियों के लिए सीमित करने वाले ऊंचे किराया स्ट्रक्चर

मुख्य शब्द: इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग · लास्ट-माइल कनेक्टिविटी · डिमांड फोरकास्टिंग · अर्बन मोबिलिटी · इंटरमॉडल इंटीग्रेशन

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कॉर्डेलिया क्रूज़ (Cordelia Cruises) विशाखापट्टनम से अपनी पहली अंतरराष्ट्रीय यात्रा शुरू कर रहा है

चर्चा में क्यों: कॉर्डेलिया क्रूज़ (Cordelia Cruises) विशाखापट्टनम से अपनी पहली अंतरराष्ट्रीय यात्रा शुरू कर रहा है, जिसका उद्देश्य इस शहर को एक प्रमुख क्रूज पर्यटन केंद्र (Cruise Tourism Hub) के रूप में स्थापित करना है।

14 दिनों की यह यात्रा 15 जुलाई से शुरू होने वाली है। शुरुआत में यह घरेलू रूटों पर चलेगी और उसके बाद कुआला लुंपुर और सिंगापुर जैसे अंतरराष्ट्रीय पड़ावों पर जाएगी। इस पहल का उद्देश्य चेन्नई, विशाखापट्टनम और दक्षिण-पूर्वी एशियाई गंतव्यों को जोड़ने वाला एक टिकाऊ क्रूज सर्किट (cruise circuit) बनाना है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • स्थानविशाखापट्टनम इस क्रूज इनिशिएटिव (cruise initiative) के लिए आंध्र प्रदेश का प्राथमिक पोर्ट सिटी है।
  • तथ्यक्रूज यात्रा 15 जुलाई से शुरू होकर 14 दिनों की अवधि के लिए निर्धारित है।
  • तथ्यसरकार इन क्रूज़ से होने वाली केबिन बिक्री पर 18% GST लगाने का इरादा रखती है।
  • स्थानइंटरनेशनल रूट में कुआला लुंपुर (मलेशिया) और सिंगापुर के स्टॉप्स शामिल हैं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारत में क्रूज पर्यटन बुनियादी ढांचे का विकास क्षेत्रीय आर्थिक विकास और समुद्री कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने में किस प्रकार योगदान दे सकता है, चर्चा कीजिए।

  • लॉजिस्टिक्स सिनर्जी: समुद्री पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट का एकीकरण
  • राजकोषीय प्रभाव: GST के ज़रिए राजस्व और हॉस्पिटैलिटी और मैरीटाइम सेक्टर में स्थानीय रोज़गार

मुख्य शब्द: समुद्री कनेक्टिविटी · क्रूज़ टूरिज्म · इंफ्रास्ट्रक्चर विकास · क्षेत्रीय आर्थिक विकास · GST राजस्व

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भारतीय म्यूचुअल फंड क्षेत्र में एक संरचनात्मक बदलाव देखा जा रहा है

चर्चा में क्यों: भारतीय म्यूचुअल फंड क्षेत्र में एक संरचनात्मक बदलाव देखा जा रहा है, क्योंकि निवेशकों की प्राथमिकता अब मिड और स्मॉल कैप इक्विटी और मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड्स (Multi-Asset Allocation Funds - MAAFs) की ओर बढ़ रही है।

SIP निवेश ₹32,087 करोड़ तक पहुंच गया है, जो हाल के वर्षों के कुल इक्विटी निवेश से अधिक है। सोने और चांदी में मजबूत प्रदर्शन के कारण मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड्स (MAAFs) ने पारंपरिक हाइब्रिड फंड्स को पीछे छोड़ दिया है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यSIP इनफ्लो (inflows) ₹32,087 करोड़ तक पहुंच गया, जो हाल के वर्षों के कुल इक्विटी इनफ्लो से अधिक है।
  • तथ्यMAAFs ने ग्रोथ में ट्रेडिशनल हाइब्रिड फंड्स को पीछे छोड़ दिया है।
  • तथ्यMid Cap और Small Cap इक्विटी में ग्रोथ देखी गई है, जबकि Large-cap इक्विटी AUM में गिरावट आई है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: भारतीय खुदरा निवेशकों की प्राथमिकताओं में पारंपरिक लार्ज-कैप निवेशों के बजाय मिड-कैप इक्विटी और मल्टी-एसेट फंड्स की ओर बढ़ते झुकाव को प्रभावित करने वाले कारकों का विश्लेषण कीजिए।

  • रिस्क-रिटर्न ट्रेड-ऑफ: बढ़ी हुई वोलाटिलिटी के बावजूद हाई-अल्फा मिड-कैप रिटर्न के लिए निवेशकों की दिलचस्पी
  • डाइवर्सिफिकेशन स्ट्रैटेजी: इक्विटी मार्केट के उतार-चढ़ाव से बचने के लिए MAAFs के जरिए कीमती धातुओं की बढ़ती मांग

मुख्य शब्द: एसेट एलोकेशन · कैपिटल मार्केट ट्रेंड्स · रिटेल इन्वेस्टमेंट · SIP इनफ्लो · मार्केट में उतार-चढ़ाव

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तेल मंत्रालय के पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) की रिपोर्ट के अनुसार

चर्चा में क्यों: तेल मंत्रालय के पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) की रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण आपूर्ति में आए व्यवधान की वजह से मार्च 2026 में भारत में LPG की खपत में 13% की गिरावट दर्ज की गई है।

मार्च 2026 में, घरेलू एलपीजी (LPG) की बिक्री में 8.1% की गिरावट दर्ज की गई और गैर-घरेलू बिक्री में लगभग 48% की कमी आई। आपूर्ति में आने वाली बाधाओं से निपटने के लिए, सरकार ने रिफाइनरियों को निर्देश दिए कि वे पेट्रोकेमिकल उत्पादन से फीडस्टॉक (feedstock) को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के लिए डायवर्ट करें।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • संस्थापेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC), पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय का एक विंग है।
  • तथ्यमार्च 2026สิ้น होने वाले वित्त वर्ष के लिए भारत की कुल LPG खपत में 6% की वृद्धि हुई।
  • तथ्यमार्च 2026 में नॉन-डोमेस्टिक LPG की बिक्री में लगभग 48% की गिरावट देखी गई।
मेन्स के लिए

प्रश्न: पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक संघर्षों का भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभावों और घरेलू एलपीजी (LPG) उत्पादन के लिए फीडस्टॉक स्रोतों के विविधीकरण के रणनीतिक महत्व का विश्लेषण कीजिए।

  • सप्लाई चेन की कमजोरी: वेस्ट एशिया समुद्री और व्यापार गलियारों के कारण घरेलू LPG की उपलब्धता पर अत्यधिक संवेदनशीलता
  • इंडस्ट्रियल ट्रेड-ऑफ: सप्लाई शॉक के दौरान पेट्रोकेमिकल उत्पादन और घरेलू ऊर्जा जरूरतों के बीच संतुलन
  • स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी: बाहरी भू-राजनीतिक बाधाओं को कम करने के लिए घरेलू रिफाइनिंग क्षमता बढ़ाना ज़रूरी

मुख्य शब्द: ऊर्जा सुरक्षा · सप्लाई चेन में रुकावट · फीडस्टॉक विविधीकरण · भू-राजनीतिक जोखिम · पेट्रोकेमिकल उत्पादन

GS3अर्थव्यवस्था › बुनियादी ढांचा (ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, रेलवे)प्रीलिम्स

केंद्रीय कैबिनेट ने उच्च घनत्व वाले रेलवे नेटवर्क पर भीड़ कम करने के लिए उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश में मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स (multi-tracking projects) के लिए ₹24,815 करोड़ को मंजूरी दी है

चर्चा में क्यों: केंद्रीय कैबिनेट ने उच्च घनत्व वाले रेलवे नेटवर्क पर भीड़ कम करने के लिए उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश में मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स (multi-tracking projects) के लिए ₹24,815 करोड़ को मंजूरी दी है।

ये परियोजनाएं भारतीय रेलवे नेटवर्क को 601 किमी तक बढ़ाएंगी और इन्हें 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इनका उद्देश्य दिल्ली-गुवाहाटी और हावड़ा-चेन्नई के उच्च-घनत्व वाले कॉरिडोर (high-density corridors) को विकसित करना है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • तथ्यउत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश में मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स के लिए कुल स्वीकृत आउटले (outlay) ₹24,815 करोड़ है।
  • तथ्यये प्रोजेक्ट्स मौजूदा इंडियन रेलवे नेटवर्क को 601 किमी तक बढ़ाएंगे।
  • तथ्यइन प्रोजेक्ट्स के पूरा होने की अपेक्षित तारीख 2030-31 है।
  • तथ्यअनुमानित अतिरिक्त फ्रेट ट्रैफिक: उत्तर प्रदेश में 35.72 मिलियन टन प्रति वर्ष और आंध्र प्रदेश में 29.04 मिलियन टन प्रति वर्ष।
मेन्स के लिए

प्रश्न: बहु-मार्गी परियोजनाओं के माध्यम से रेलवे बुनियादी ढांचे के विस्तार से भारत की लॉजिस्टिक्स दक्षता में कैसे सुधार हो सकता है और राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने में यह किस प्रकार सहायक सिद्ध होगा, चर्चा कीजिए।

  • लॉजिस्टिक्स एफिशिएंसी: रोड ट्रांसपोर्ट के मुकाबले फ्रेट ट्रांजिट समय और लागत में कमी
  • नेटवर्क क्षमता: दिल्ली-गुवाहाटी और हावड़ा-चेन्नई जैसे हाई-डेंसिटी कॉरिडोर पर भीड़ कम करना

मुख्य शब्द: लॉजिस्टिक्स लागत · इंफ्रास्ट्रक्चर विकास · माल ढुलाई ट्रैफिक · मल्टी-ट्रैकिंग · हाई-डेंसिटी नेटवर्क

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तेलंगाना सरकार ने सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए साउथ सेंट्रल रेलवे (SCR) से MMTS सबअर्बन ट्रेनों में मुफ्त यात्रा की सुविधा प्रदान करने का अनुरोध किया है

चर्चा में क्यों: तेलंगाना सरकार ने सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए साउथ सेंट्रल रेलवे (SCR) से MMTS सबअर्बन ट्रेनों में मुफ्त यात्रा की सुविधा प्रदान करने का अनुरोध किया है।

तेलंगाना के मुख्य सचिव के. रामकृष्ण राव और SCR के महाप्रबंधक संजय कुमार श्रीवास्तव ने इस प्रस्ताव पर चर्चा करने के लिए बैठक की। राज्य सरकार ने इस पहल को सुगम बनाने के लिए विस्तारित अवधि के लिए टिकट का किराया वहन करने की पेशकश की।

प्रीलिम्स बिंदु (2)
  • संस्थाSCR: साउथ सेंट्रल रेलवे (South Central Railway) वह रेलवे ज़ोन है जो MMTS सबअर्बन नेटवर्क के लिए ज़िम्मेदार है।
  • तथ्यतेलंगाना सरकार ने सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए लंबे समय तक टिकट के किराए का खर्च उठाने का प्रस्ताव दिया है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: तेजी से बढ़ते भारतीय शहरों में सतत शहरी गतिशीलता को बढ़ावा देने और कार्बन पदचिह्न को कम करने में सार्वजनिक परिवहन सब्सिडी की भूमिका पर चर्चा कीजिए।

  • राजकोषीय स्थिरता: रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर की लंबी अवधि की वित्तीय व्यवहार्यता के साथ सरकारी सब्सिडी का संतुलन
  • मोडल शिफ्ट: किफायती और सुलभ सबअर्बन रेल नेटवर्क के जरिए निजी वाहनों पर निर्भरता कम करना

मुख्य शब्द: सस्टेनेबल अर्बन मोबिलिटी · पब्लिक ट्रांसपोर्ट सब्सिडी · मॉडल शिफ्ट · शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर · राजकोषीय संघवाद

GS3अर्थव्यवस्था › विकास, महंगाई एवं वृहद आर्थिक संकेतकप्रीलिम्स

केंद्रीय कैबिनेट ने बढ़ती कीमतों के प्रभाव को कम करने के लिए केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) में 2% की वृद्धि को मंजूरी दी है

चर्चा में क्यों: केंद्रीय कैबिनेट ने बढ़ती कीमतों के प्रभाव को कम करने के लिए केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) में 2% की वृद्धि को मंजूरी दी है।

इस कदम से 50.46 लाख कर्मचारी और 68.27 लाख पेंशनभोगी प्रभावित होंगे, जिसका अनुमानित खर्च ₹6,791.24 करोड़ है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • तथ्यDA/DR में वृद्धि: बेसिक पे/पेंशन के मौजूदा 58% की दर पर 2% की बढ़ोतरी।
  • तथ्यकुल लाभार्थी: 50.46 लाख सरकारी कर्मचारी और 68.27 लाख पेंशनर्स।
  • तथ्यबढ़ोतरी की प्रभावी तिथि: 1 जनवरी, 2026।
  • तथ्यDA वृद्धि की कुल राजकोषीय लागत (fiscal cost): ₹6,791.24 करोड़।
मेन्स के लिए

प्रश्न: सरकारी कर्मचारियों की क्रय शक्ति को बनाए रखने में महंगाई भत्ता (DA) के महत्व और राष्ट्रीय बजट पर इसके समय-समय पर होने वाले संशोधनों के राजकोषीय निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।

  • राजकोषीय दबाव: DA/DR पर बढ़ते खर्च और राजकोषीय सुदृढ़ीकरण की ज़रूरत के बीच संतुलन
  • महंगाई इंडेक्सिंग: CPI के उतार-चढ़ाव को संतुलित करने के लिए DA का इस्तेमाल करने का तरीका

मुख्य शब्द: महंगाई भत्ता · क्रय शक्ति · राजकोषीय व्यय · महंगाई इंडेक्सिंग · सार्वजनिक वित्त

मोतीलाल ओसवाल AMC ने एक नया BFSI फंड लॉन्च करने की घोषणा की है, जो कैपिटल मार्केट इकोसिस्टम को लक्षित करता है

चर्चा में क्यों: मोतीलाल ओसवाल AMC ने एक नया BFSI फंड लॉन्च करने की घोषणा की है, जो कैपिटल मार्केट इकोसिस्टम को लक्षित करता है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब उम्मीद जताई जा रही है कि भारत और अमेरिका के बीच एक नया ट्रेड डील निवेशकों के उत्साह और विदेशी पूंजी के प्रवाह को बढ़ावा देगा।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता स्टील और एल्युमीनियम जैसी धातुओं के लिए शुल्क संरचना (duty structures) से जुड़ी अनिश्चितता को दूर करने का लक्ष्य रखता है। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज फंड विशेष रूप से AMC, ब्रोकर्स और एक्सचेंजों सहित पूंजी बाजार से जुड़े व्यवसायों को लक्षित करेगा।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यभारत-US ट्रेड डील का लक्ष्य स्टील और एल्युमिनियम सहित धातुओं के ड्यूटी स्ट्रक्चर (duty structures) को लक्षित करता है।
  • तथ्यमोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज फंड AMCs, ब्रोकर्स और एक्सचेंजेस पर ध्यान केंद्रित करता है।
  • तथ्यमार्केट वोलाटिलिटी (market volatility) के संदर्भ में बताया गया एडवांस टैक्स की डेडलाइन 15 मार्च है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: द्विपक्षीय व्यापार समझौतों और पूंजी बाजार पारिस्थितिकी तंत्र के विस्तार से भारत के विनिर्माण और निवेश परिदृश्य पर पड़ने वाले प्रभावों का विश्लेषण कीजिए।

  • ट्रेड सर्टेन्टी: मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट को स्थिर करने के लिए स्टील और एल्युमिनियम पर ड्यूटी स्ट्रक्चर हटाया
  • कैपिटल मार्केट विस्तार: निवेश के मुख्य चालक के रूप में AMCs और ब्रोकर्स जैसे इंटरमीडियरी इंफ्रास्ट्रक्चर की ग्रोथ
  • विदेशी पूंजी का प्रवाह: भारतीय इक्विटी के खराब प्रदर्शन को बदलने पर द्विपक्षीय व्यापार स्थिरता का असर

मुख्य शब्द: निवेशक सेंटीमेंट · कैपिटल मार्केट इकोसिस्टम · द्विपक्षीय व्यापार · विदेशी पूंजी का प्रवाह · मैन्युफैक्चरिंग इन्वेस्टमेंट

GS3अर्थव्यवस्था › बाहरी क्षेत्र, व्यापार एवं FDIमेन्स

फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस (FIEO) ने सरकार से ब्याज में छूट (interest subvention) की सीमा हटाने का आग्रह किया है

चर्चा में क्यों: फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस (FIEO) ने सरकार से ब्याज में छूट (interest subvention) की सीमा हटाने का आग्रह किया है, ताकि वैश्विक व्यापार में बढ़ती अनिश्चितताओं और कर्ज पर उच्च ब्याज दरों के प्रभाव को कम किया जा सके।

सरकार ने हाल ही में 25,060 करोड़ रुपये के निर्यात प्रोत्साहन मिशन (Export Promotion Mission) के तहत प्री-शिपमेंट और पोस्ट-शिपमेंट निर्यात क्रेडिट के लिए ब्याज छूट (Interest Subvention) सहायता से संबंधित दिशा-निर्देशों में संशोधन किया है। वर्तमान में, यह योजना 50% की अधिकतम सीमा (Cap) के साथ 75% ब्याज छूट प्रदान करती है, जिसे निर्यातकों द्वारा अपर्याप्त बताया जा रहा है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • तथ्यएक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन (Export Promotion Mission) का कुल परिव्यय (outlay) 25,060 करोड़ रुपये है।
  • तथ्यवर्तमान में दी जाने वाली इंटरेस्ट सबवेंशन (interest subvention) 75% है, जिसकी कैप (cap) 50% है।
  • संस्थाFIEO (Federation of Indian Export Organisations) इस मांग में निर्यातकों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था है।
  • तथ्ययह सबवेंशन (subvention) प्री-शिपमेंट और पोस्ट-शिपमेंट एक्सपोर्ट क्रेडिट (export credit) दोनों पर लागू होता है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: वैश्विक व्यापार में अस्थिरता और बढ़ती ऋण लागत के बीच भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने में ब्याज छूट (इंटरेस्ट सबवेंशन) योजनाओं की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।

  • पूंजी की लागत: हाई इंटरेस्ट रेट से MSME निर्यातकों के वर्किंग कैपिटल साइकिल पर असर
  • सब्सिडी की सीमाएं: निर्यात प्रोत्साहन मिशन के असर को कम करने वाली सब्वेंशन पर स्ट्रक्चरल कैप्स
  • ग्लोबल ट्रेड में उतार-चढ़ाव: अंतरराष्ट्रीय मांग में बदलाव से निपटने के लिए डायनेमिक फिस्कल सपोर्ट की ज़रूरत

मुख्य शब्द: ब्याज छूट · निर्यात प्रोत्साहन · वर्किंग कैपिटल · उधार की लागत · ट्रेड कॉम्पिटिटिवनेस

GS3अर्थव्यवस्था › मौद्रिक नीति, RBI एवं बैंकिंगप्रीलिम्स

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने मुद्रा को समर्थन देने के लिए तेल रिफाइनरों के डॉलर बिड्स (dollar bids) को आसान बनाने के उपाय लागू किए

चर्चा में क्यों: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने मुद्रा को समर्थन देने के लिए तेल रिफाइनरों के डॉलर बिड्स (dollar bids) को आसान बनाने के उपाय लागू किए, जिसके परिणामस्वरूप भारतीय रुपया एक सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।

RBI ने राज्य संचालित तेल रिफाइनरों से आग्रह किया है कि वे विदेशी मुद्रा की जरूरतों के लिए स्पॉट डॉलर खरीद के बजाय एक विशेष क्रेडिट लाइन का उपयोग करें।

प्रीलिम्स बिंदु (2)
  • तथ्यमार्च के अंत में अपने रिकॉर्ड निचले स्तर के बाद रुपया लगभग 2.5% मजबूत हुआ है।
  • तथ्यसरकारी तेल रिफाइनरियों द्वारा स्पॉट डॉलर की खरीद को नियंत्रित करने के लिए RBI के उपाय।
मेन्स के लिए

प्रश्न: बदलती वैश्विक ऊर्जा कीमतों और पूंजी प्रवाह के उतार-चढ़ाव के बीच मुद्रा की अस्थिरता के प्रबंधन में भारतीय रिज़र्व बैंक की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।

  • मौनेटरी इंटरवेंशन: करेंसी की स्थिरता और सरकारी ऊर्जा उद्यमों की लिक्विडिटी की जरूरतों के बीच संतुलन
  • एक्सटर्नल शॉक: घरेलू एक्सचेंज रेट पर वैश्विक ऊर्जा की ऊंची कीमतों के असर को कम करना
  • कैपिटल फ्लो मैनेजमेंट: अनिश्चित विदेशी निवेश प्रवाह के प्रति रुपये की संवेदनशीलता को दूर करना

मुख्य शब्द: करेंसी में उतार-चढ़ाव · मौनेटरी पॉलिसी · विदेशी मुद्रा प्रबंधन · पूंजी प्रवाह · लिक्विडिटी मैनेजमेंट

GS3अर्थव्यवस्था › मौद्रिक नीति, RBI एवं बैंकिंगप्रीलिम्स

Cbonds की रिपोर्ट के अनुसार, भू-राजनीतिक अनिश्चितता (Geopolitical uncertainty) और रुपये में उतार-चढ़ाव के कारण वित्त वर्ष 2026 में भारतीय कंपनियों द्वारा विदेशी बॉन्ड फंडरेजिंग (Offshore bond fundraising) में 40% की गिरावट दर्ज की गई है, जो घटकर 8.1 बिलियन डॉलर रह गई है

चर्चा में क्यों: Cbonds की रिपोर्ट के अनुसार, भू-राजनीतिक अनिश्चितता (Geopolitical uncertainty) और रुपये में उतार-चढ़ाव के कारण वित्त वर्ष 2026 में भारतीय कंपनियों द्वारा विदेशी बॉन्ड फंडरेजिंग (Offshore bond fundraising) में 40% की गिरावट दर्ज की गई है, जो घटकर 8.1 बिलियन डॉलर रह गई है।

भारतीय कंपनियों द्वारा ऑफशोर बॉन्ड (Offshore Bond) के जरिए फंड जुटाने की राशि वित्त वर्ष 2026 में घटकर 8.1 बिलियन डॉलर रह गई, जो कि लगभग 40% की गिरावट है। RBI ने उच्च हेजिंग लागत (Hedging Costs) के बावजूद पहुंच में सुधार करने के लिए एक्सटर्नल कमर्शियल बोरोइंग्स (ECBs) के नियमों में ढील दी है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • तथ्यभारतीय कंपनियों द्वारा Offshore bond fundraising की राशि FY2026 में गिरकर $8.1 बिलियन हो गई।
  • तथ्यऑफशोर बॉन्ड फंडरेजिंग (Offshore bond fundraising) में पिछले समय की तुलना में लगभग 40% की गिरावट देखी गई।
  • संस्थाभारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) वह संस्था है जो एक्सटर्नल कमर्शियल बोरोइंग्स (ECBs) को रेगुलेट करने के लिए जिम्मेदार है।
  • विज्ञान-तकनीकहेजिंग कॉस्ट (Hedging costs) और करेंसी रिस्क (Currency risk) भारतीय फर्मों के लिए ऑफशोर फंडिंग (Offshore funding) प्राप्त करने में मुख्य बाधाएं हैं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच भारतीय निगमों द्वारा विदेशी ऋण बाजारों से घरेलू ऋण बाजारों की ओर बढ़ते रुझान को प्रभावित करने वाले कारकों का विश्लेषण कीजिए।

  • करेंसी रिस्क: एक्सटर्नल कमर्शियल बोरोइंग पर हाई हेजिंग कॉस्ट से प्राइवेट सेक्टर का ऑफशोर विस्तार रुक रहा है
  • लिक्विडिटी प्रेफरेंस: भू-राजनीतिक अनिश्चितता और रुपये की अस्थिरता को कम करने के लिए घरेलू बॉन्ड इश्यूएशन की ओर झुकाव

मुख्य शब्द: एक्सटर्नल कमर्शियल बोरोइंग्स · करेंसी रिस्क · हेजिंग कॉस्ट · लिक्विडिटी मैनेजमेंट · भू-राजनीतिक अस्थिरता

GS3अर्थव्यवस्था › बुनियादी ढांचा (ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, रेलवे)प्रीलिम्स

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ₹12,000 करोड़ की दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया

चर्चा में क्यों: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ₹12,000 करोड़ की दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया।

यह परियोजना उत्तर प्रदेश के माध्यम से दिल्ली और देहरादून को जोड़ने वाला 213 किलोमीटर लंबा, छह लेन का कॉरिडोर है। इसमें वन्यजीव गलियारे (wildlife corridors) शामिल हैं और इसे प्रमुख राष्ट्रीय गलियारों और तीर्थ केंद्रों के साथ जोड़ने के लिए डिजाइन किया गया है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • तथ्यदिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट की लागत: ₹12,000 करोड़।
  • तथ्यदिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे की लंबाई: 213 किमी।
  • तथ्यएक्सप्रेसवे की विशेषताएँ: इंटीग्रेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर (integrated wildlife corridors) के साथ सिक्स-लेन कॉरिडोर।
  • स्थानयह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के शहरों के माध्यम से दिल्ली को देहरादून से जोड़ता है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: हिमालयी राज्यों में उच्च गति वाले एक्सप्रेसवे के विस्तार किस प्रकार क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण और पर्यटन विकास के उत्प्रेरक के रूप में कार्य करते हैं, चर्चा कीजिए।

  • लॉजिस्टिक्स दक्षता: यात्रा के समय में कमी से सामान और पर्यटकों की आवाजाही तेज़ होगी
  • पारिस्थितिक संतुलन: इंफ्रास्ट्रक्चर से होने वाले आवास विखंडन को कम करने के लिए वन्यजीव कॉरिडोर का एकीकरण
  • पर्यटन तालमेल: तीर्थ केंद्रों और माउंटेन टूरिज्म हब्स तक बेहतर पहुंच

मुख्य शब्द: क्षेत्रीय कनेक्टिविटी · इंफ्रास्ट्रक्चर विकास · लॉजिस्टिक्स दक्षता · पर्यटन को बढ़ावा देना · आवास विखंडन

GS3अर्थव्यवस्था › विकास, महंगाई एवं वृहद आर्थिक संकेतकप्रीलिम्स

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने कमोडिटी मार्केट (वस्तु बाजारों) और महंगाई पर मध्य पूर्व युद्ध के प्रभाव के कारण अपने 2026 के वैश्विक विकास अनुमान को घटाकर 3.1% कर दिया है

चर्चा में क्यों: अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने कमोडिटी मार्केट (वस्तु बाजारों) और महंगाई पर मध्य पूर्व युद्ध के प्रभाव के कारण अपने 2026 के वैश्विक विकास अनुमान को घटाकर 3.1% कर दिया है।

IMF ने 2026 के लिए वैश्विक विकास के अनुमान को घटाकर 3.1% कर दिया है। मुख्य अर्थशास्त्री, पियरे-ओलिवियर गोरिनचस ने चेतावनी दी है कि यदि ऊर्जा की कीमतें उच्च बनी रहती हैं, तो महंगाई 4.4% तक बढ़ सकती है और विकास की गति धीमी होकर 2.0-2.5% तक गिर सकती है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • तथ्यIMF का 2026 के लिए ग्लोबल ग्रोथ प्रोजेक्शन (global growth projection): 3.1%।
  • तथ्यIMF द्वारा अनुमानित महंगाई दर: 4.4%।
  • तथ्यमिडल ईस्ट ग्रोथ प्रोजेक्शन: IMF द्वारा आधा कर दिया गया।
  • संस्थाअंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) वह संस्था है जो ग्रोथ फोरकास्ट (growth forecasts) प्रदान करती है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक संघर्ष वैश्विक वस्तु बाजारों और उभरती बाजार अर्थव्यवस्थाओं की आर्थिक स्थिरता को किस प्रकार प्रभावित करते हैं, इसका विश्लेषण कीजिए।

  • असममित प्रभाव: विकसित अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में उभरते बाजारों पर कमोडिटी कीमतों के झटकों का असर ज्यादा होता है
  • एनर्जी ट्रांजिशन बफर: वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों और तेल के कुशल उपयोग से बढ़ी मजबूती
  • महंगाई का दबाव: एनर्जी मार्केट्स में सप्लाई-साइड रुकावटों से वैश्विक महंगाई बनी हुई है

मुख्य शब्द: कमोडिटी मार्केट · महंगाई का दबाव · उभरती बाजार अर्थव्यवस्थाएं · सप्लाई-साइड शॉक · आर्थिक मजबूती

GS3अर्थव्यवस्था › पूंजी बाज़ार एवं SEBIमेन्स

भू-राजनीतिक तनाव और व्यापक आर्थिक चिंताओं के कारण विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय बाजार से बाहर निकल रहे हैं, जिससे लगभग 18 बिलियन डॉलर की निकासी हो रही है

चर्चा में क्यों: भू-राजनीतिक तनाव और व्यापक आर्थिक चिंताओं के कारण विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय बाजार से बाहर निकल रहे हैं, जिससे लगभग 18 बिलियन डॉलर की निकासी हो रही है।

उचित मूल्यांकन (Valuations) के बावजूद संस्थागत निवेशक (Institutional investors) भारत में निवेश करने में संकोच कर रहे हैं। $18 बिलियन के इस बहिर्वाह (Outflow) के प्रमुख कारणों में ईरान-अमेरिका संघर्ष, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और अन्य उभरते बाजारों (Emerging markets) की ओर रिस्क प्रीमियम में बदलाव शामिल हैं।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यFII: Foreign Institutional Investors वे संस्थाएं हैं जो किसी दूसरे देश के फाइनेंशियल मार्केट्स (financial markets) में निवेश करती हैं।
  • तथ्यFIIs द्वारा भारतीय बाजारों से रिपोर्ट किया गया आउटफ्लो $18 बिलियन तक पहुंच गया।
  • तथ्यचालू खाता घाटा (CAD) तेल की बढ़ती कीमतों और महंगाई से प्रभावित होता है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: विदेशी संस्थागत निवेश (FII) प्रवाह में हालिया अस्थिरता में योगदान देने वाले कारकों और भारत की पूंजी खाता स्थिरता पर इसके निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।

  • मैक्रोइकोनॉमिक दबाव: तेल की बढ़ती कीमतें चालू खाता घाटा बढ़ा रही हैं और घरेलू महंगाई को बढ़ावा दे रही हैं
  • भू-राजनीतिक जोखिम: ईरान-अमेरिका संघर्ष रिस्क-अवर्स ग्लोबल इंस्टीट्यूशनल कैपिटल के लिए अनिश्चितता पैदा कर रहा है
  • कॉम्पिटिटिव पोजीशनिंग: रिस्क प्रीमियम में बदलाव से भारतीय इक्विटी के बजाय अन्य इमर्जिंग मार्केट्स को फायदा

मुख्य शब्द: पूंजी का पलायन · चालू खाता घाटा · रिस्क प्रीमियम · विदेशी संस्थागत निवेश · मैक्रोइकोनॉमिक स्टेबिलिटी

GS3अर्थव्यवस्था › उद्योग, निवेश एवं MSMEप्रीलिम्स

दिल्ली सरकार ने 2026-2030 के लिए एक ड्राफ्ट EV पॉलिसी जारी की है

चर्चा में क्यों: दिल्ली सरकार ने 2026-2030 के लिए एक ड्राफ्ट EV पॉलिसी जारी की है, जिसमें वित्त वर्ष 2029 से इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है और खरीदारों को सब्सिडी देने का प्रावधान है।

प्रस्तावित नीति के अनुसार, पात्र इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन खरीदारों को 10,000 रुपये से 30,000 रुपये के बीच सब्सिडी दी जाएगी। इसमें नीति की अवधि के दौरान पंजीकृत अधिकांश EVs के लिए रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस से छूट भी शामिल है।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • तथ्यदिल्ली की ड्राफ्ट EV पॉलिसी 2026-2030 की अवधि को कवर करती है।
  • तथ्यFY29 से इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन शुरू होगा।
  • तथ्यपात्र खरीदारों के लिए प्रस्तावित सब्सिडी 10,000 रुपये से 30,000 रुपये तक है।
  • तथ्यइस पॉलिसी में अधिकांश EVs के लिए रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस से छूट शामिल है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: दिल्ली जैसे शहरी केंद्रों में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर संक्रमण को गति देने में राज्य-आधारित राजकोषीय प्रोत्साहन और विनियामक अधिदेशों की भूमिका का विश्लेषण कीजिए।

  • राजकोषीय ट्रेड-ऑफ: शहरी वायु प्रदूषण में लंबी अवधि की कमी बनाम तत्काल सब्सिडी खर्च के बीच संतुलन
  • मार्केट डिस्टॉर्शन: स्थापित इंटरनल कम्बशन इंजन निर्माताओं और उभरते EV स्टार्टअप्स के बीच असमान प्रतिस्पर्धा की संभावना

मुख्य शब्द: राजकोषीय प्रोत्साहन · इलेक्ट्रिक मोबिलिटी · शहरी प्रदूषण · मार्केट डायनेमिक्स · रेगुलेटरी फ्रेमवर्क

GS3अर्थव्यवस्था › मौद्रिक नीति, RBI एवं बैंकिंगप्रीलिम्स + मेन्स

RBI ने चिंता व्यक्त की है कि कुछ MNC बैंक कथित तौर पर मुनाफे वाले ट्रेडों को रुपये की गिरावट के खिलाफ हेजिंग (hedging) के रूप में दिखाकर

चर्चा में क्यों: RBI ने चिंता व्यक्त की है कि कुछ MNC बैंक कथित तौर पर मुनाफे वाले ट्रेडों को रुपये की गिरावट के खिलाफ हेजिंग (hedging) के रूप में दिखाकर, आर्बिट्रेज (arbitrage) सौदों के जरिए नियामक प्रतिबंधों से बचने की कोशिश कर रहे हैं।

बहुराष्ट्रीय बैंकों (MNC banks) पर आरोप है कि वे घरेलू फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट्स (onshore forward contracts) के लिए अपने विदेशी पैरेंट कंपनियों से प्राप्त पूंजी का उपयोग अंडरलाइनर के रूप में कर रहे हैं। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) पूंजी के प्रवाह की समयसीमा, फॉरवर्ड डील के निष्पादन और भारतीय शाखाओं एवं विदेशी मुख्यालयों के बीच हुए पत्राचार की बारीकी से जांच कर रहा है।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यRBI भारत में MNC बैंकों द्वारा की जाने वाली आर्बिट्रेज (arbitrage) प्रथाओं की जांच करने वाली नियामक संस्था है।
  • विज्ञान-तकनीकMNC बैंक रुपये की गिरावट के खिलाफ हेजिंग (hedging) के लिए ऑनशोर फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट्स (Onshore forward contracts) का उपयोग एक मैकेनिज्म के रूप में कर रहे हैं।
  • संस्थाकैपिटल इनफ्लो और फॉरवर्ड डील एग्जीक्यूशन टाइमलाइन्स के लिए MNC बैंकों की जांच की जा रही है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: सीमा पार पूंजी प्रवाह की निगरानी करने और बहुराष्ट्रीय बैंकों द्वारा किए जाने वाले आर्बिट्राज (arbitrage) को रोकने में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के समक्ष आने वाली विनियामक चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।

  • रेगुलेटरी आर्बिट्रेज: ऑनशोर और ऑफशोर कैपिटल मूवमेंट के नियमों के बीच अंतर का फायदा उठाना
  • पारदर्शिता की कमी: प्रॉफिट-सीकिंग आर्बिट्रेज के मुकाबले फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट्स के इरादे को वेरिफाई करने में मुश्किल
  • कैपिटल फ्लाइट का जोखिम: अनधिकृत कैपिटल आउटफ्लो को आसान बनाने के लिए गलत हेजिंग की संभावना

मुख्य शब्द: रेगुलेटरी आर्बिट्रेज · मौनेटरी पॉलिसी · पूंजी प्रवाह · फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट्स · वित्तीय निगरानी

GS3अर्थव्यवस्था › विकास, महंगाई एवं वृहद आर्थिक संकेतकमेन्स

कर्नाटक विधानमंडल में पेश की गई एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए राज्य की 8.1% की विकास दर के बावजूद

चर्चा में क्यों: कर्नाटक विधानमंडल में पेश की गई एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए राज्य की 8.1% की विकास दर के बावजूद, क्षेत्रीय आर्थिक असमानताएँ अभी भी बनी हुई हैं।

कर्नाटक ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 8.1% की विकास दर दर्ज की है। आर्थिक गतिविधियाँ और GST संग्रह मुख्य रूप से बेंगलुरु और दक्षिण कन्नड़ एवं उडुपी जैसे तटीय क्षेत्रों में केंद्रित हैं, जबकि अन्य अधिकांश जिले इससे पीछे हैं।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यवित्त वर्ष 2025-26 के लिए कर्नाटक की ग्रोथ रेट 8.1% रही।
  • स्थानदक्षिण कन्नड़ और उडुपी को महत्वपूर्ण विकास वाले तटीय क्षेत्रों (coastal regions) के रूप में पहचाना गया है।
  • तथ्यक्षेत्रीय असमानताओं के बावजूद, कर्नाटक GST कलेक्शन में अग्रणी है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: उच्च विकास दर वाले राज्यों में असमान क्षेत्रीय आर्थिक विकास की चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए और सभी जिलों में समावेशी विकास सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक उपायों का सुझाव दीजिए।

  • स्थानिक असमानता: शहरी-तटीय केंद्रों में GST राजस्व और औद्योगिक गतिविधि का जमावड़ा
  • इंफ्रास्ट्रक्चर गैप: बेंगलुरु और आंतरिक जिलों के बीच आर्थिक संकेतकों में असमानता
  • पॉलिसी ट्रेड-ऑफ: राज्य की तेज़ समग्र ग्रोथ और संतुलित क्षेत्रीय वितरण के बीच तालमेल

मुख्य शब्द: क्षेत्रीय असमानता · समावेशी विकास · स्थानिक असमानता · आर्थिक संकेंद्रण · राजकोषीय संघवाद

GS3अर्थव्यवस्था › बुनियादी ढांचा (ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, रेलवे)प्रीलिम्स

रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रात के सफर की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए KSR बेंगलुरु और मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस के बीच वंदे भारत स्लीपर ट्रेन सेवा को मंजूरी दी है

चर्चा में क्यों: रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रात के सफर की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए KSR बेंगलुरु और मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस के बीच वंदे भारत स्लीपर ट्रेन सेवा को मंजूरी दी है।

दक्षिण पश्चिम रेलवे (SWR) इस सेमी-हाई-स्पीड ट्रेन के संचालन और रखरखाव के लिए जिम्मेदार होगी। यह सेवा भारत में दूसरी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन होगी, जो जनवरी 2026 में शुरू हुए हावड़ा-कामाख्या रूट के बाद संचालित की जाएगी।

प्रीलिम्स बिंदु (4)
  • तथ्यबेंगलुरु-मुंबई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन भारत में अपनी तरह की दूसरी ट्रेन है।
  • तथ्यपहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन सेवा जनवरी 2026 में हावड़ा और कामाख्या के बीच शुरू की गई।
  • संस्थासाउथ वेस्टर्न रेलवे (SWR) वह ज़ोन है जो बेंगलुरु-मुंबई सर्विस को चलाने और रखरखाव के लिए ज़िम्मेदार है।
  • स्थानयह ट्रेन KSR बेंगलुरु और मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस को जोड़ती है।
मेन्स के लिए

प्रश्न: वंदे भारत स्लीपर सेवा जैसी अर्ध-उच्च गति रेल गलियारों के विस्तार से भारत में क्षेत्रीय संपर्क और आर्थिक एकीकरण को मिलने वाले योगदान पर चर्चा कीजिए।

  • लॉजिस्टिक्स दक्षता: प्रमुख इंडस्ट्रियल हब्स के बीच ओवरनाइट ट्रांजिट समय में कमी
  • इंफ्रास्ट्रक्चर सिनर्जी: मौजूदा रेलवे कॉरिडोर के साथ हाई-स्पीड रेल का एकीकरण
  • इकोनॉमिक मल्टीप्लायर: कर्नाटक और महाराष्ट्र के बीच बिजनेस यात्रियों और पर्यटन के लिए बेहतर मोबिलिटी

मुख्य शब्द: क्षेत्रीय कनेक्टिविटी · सेमी-हाई-स्पीड रेल · इंफ्रास्ट्रक्चर विकास · लॉजिस्टिक्स दक्षता · अंतर-राज्यीय गतिशीलता

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केंद्रीय मत्स्य मंत्रालय ने ₹1 लाख करोड़ के निर्यात लक्ष्य को प्राप्त करने और वैश्विक बाजार में पहुंच बढ़ाने की रणनीतियों पर चर्चा करने के लिए सीफूड एक्सपोर्टर्स (seafood exporters) के साथ बैठक की

चर्चा में क्यों: केंद्रीय मत्स्य मंत्रालय ने ₹1 लाख करोड़ के निर्यात लक्ष्य को प्राप्त करने और वैश्विक बाजार में पहुंच बढ़ाने की रणनीतियों पर चर्चा करने के लिए सीफूड एक्सपोर्टर्स (seafood exporters) के साथ बैठक की।

इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय मत्स्य मंत्री राजीव रंजन सिंह ने की। मंत्रालय ने द्वीपों, EEZ और उच्च समुद्र (high seas) से समुद्री निर्यात के विस्तार के लिए वाणिज्य विभाग के समन्वय में एक केंद्रित बाजार विविधीकरण रणनीति (market diversification strategy) की घोषणा की।

प्रीलिम्स बिंदु (3)
  • तथ्यसरकार ने सीफूड इंडस्ट्री (Seafood Industry) के लिए ₹1 लाख करोड़ का एक्सपोर्ट टारगेट तय किया है।
  • संस्थासीफूड एक्सपोर्ट (Seafood export) रणनीतियों के लिए केंद्रीय मत्स्य मंत्रालय (Union Fisheries Ministry) नोडल बॉडी है।
  • तथ्यनिर्यात विस्तार के लक्ष्यों में द्वीपों से समुद्री उत्पाद, एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक ज़ोन (Exclusive Economic Zone - EEZ) और हाई सीज़ (high seas) शामिल हैं।
मेन्स के लिए

प्रश्न: वैश्विक बाजारों में विनियामक अनुपालन और पता लगाने की क्षमता (traceability) सुनिश्चित करते हुए भारत के महत्वाकांक्षी समुद्री खाद्य निर्यात लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए आवश्यक उपायों की चर्चा कीजिए।

  • ट्रेसेबिलिटी की बाधा: गहरे समुद्र से मिलने वाले समुद्री उत्पादों के लिए एंड-टू-एंड डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम की कमी
  • मार्केट कंसंट्रेशन रिस्क: कुछ पारंपरिक मार्केट्स पर ज़रूरत से ज़्यादा निर्भरता बनाम डाइवर्सिफिकेशन लक्ष्य
  • रेगुलेटरी फ्रिक्शन: घरेलू उत्पादन मानकों को अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय फूड सेफ्टी मानदंडों के साथ जोड़ना

मुख्य शब्द: मार्केट डाइवर्सिफिकेशन · ट्रेसेबिलिटी सिस्टम · वैल्यू एडिशन · निर्यात विस्तार · रेगुलेटरी कंप्लायंस

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