Saudi Arabia, Turkey और Pakistan ने Iran के खिलाफ NATO-स्टाइल क्लॉज के साथ डिफेंस पैक्ट पर साइन किया
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चर्चा में क्यों
सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने ईरान के प्रभाव का मुकाबला करने और क्षेत्रीय सुरक्षा अंतराल को दूर करने के उद्देश्य से एक रक्षा समझौता किया है, जिसमें NATO-शैली के सामूहिक रक्षा खंड (collective defense clause) का प्रावधान शामिल है।
पृष्ठभूमि
यह समझौता मक्का में हस्ताक्षरित किया गया था और इसमें एक ऐसी शर्त शामिल है जिसके अंतर्गत किसी एक सदस्य पर हमला सभी सदस्यों पर हमला माना जाएगा। इसका उद्देश्य ईरानी खतरों और अमेरिका की कथित अविश्वसनीयता का मुकाबला करने के लिए सऊदी अरब की संपदा को तुर्की और पाकिस्तान की सैन्य क्षमताओं के साथ जोड़ना है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- स्थानमक्का: वह शहर जहाँ रक्षा समझौता हस्ताक्षरित किया गया था।
- तथ्यहॉर्मुज जलडमरूमध्य: एक प्रमुख समुद्री चोकपॉइंट जो अक्सर ईरानी गतिविधियों से प्रभावित होता है।
- तथ्यNATO-शैली का खंड: एक सामूहिक रक्षा प्रावधान जहाँ एक सदस्य पर हमला सभी पर हमला माना जाता है।
- तथ्यहौथी विद्रोही: लाल सागर में शिपिंग बाधित करने में शामिल प्रॉक्सी (Proxies)।
मेन्स के लिए
Q. मध्य पूर्व में क्षेत्रीय सुरक्षा गठबंधों की ओर बढ़ता रुझान अमेरिकी वर्चस्व की बदलती गतिशीलता और क्षेत्रीय शक्ति गुटों के उदय को किस प्रकार प्रतिबिंबित करता है, इसका विश्लेषण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- erosion of US deterrence
- regional security architecture
- Sunni-led collective defense
- maritime security in Red Sea/Strait of Hormuz
कीवर्ड: collective defense · regional security · deterrence · geopolitical realignment · maritime security
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।