1 सितंबर से लद्दाख और बर्फबारी वाले इलाकों में जाति जनगणना होगी
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चर्चा में क्यों
भारत के रजिस्ट्रार जनरल ने लद्दाख और हिम-बद्ध क्षेत्रों के लिए जनगणना के दूसरे चरण की घोषणा की है, जिसमें जातियों की गणना भी शामिल है।
पृष्ठभूमि
लद्दाख और जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश एवं उत्तराखंड के हिम-आच्छादित क्षेत्रों के लिए जनगणना 1 से 30 सितंबर, 2024 तक आयोजित की जाएगी। डेटा संग्रहण के लिए संदर्भ तिथि 1 अक्टूबर, 2026 निर्धारित की गई है। जाति गणना की अनुमति अप्रैल 2022 में राजनीतिक मामलों पर कैबिनेट समिति द्वारा प्रदान की गई थी।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- तथ्यइस चरण के लिए जनगणना की संदर्भ तिथि: 1 अक्टूबर, 2026।
- स्थानहिमपात वाले क्षेत्र: जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड।
- संस्थाभारत के महानिरीक्षक (Registrar General of India): महानिरीक्षक और जनगणना आयुक्त के कार्यालय के प्रमुख।
- तथ्यस्व-गणना अवधि: 17 से 31 अगस्त।
मेन्स के लिए
Q. भारत में समावेशी नीति निर्माण और सामाजिक न्याय के संदर्भ में जनगणना में जातिगत गणना के महत्व पर चर्चा कीजिए।
उत्तर के आयाम
- Data-driven policy making
- Social justice and reservation
- Demographic accuracy
कीवर्ड: Demographic profiling · Social justice · Data-driven governance · Inclusive growth
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।