1932 में मर्करी पॉइजनिंग से 1956 में मिनामाता नाम की रहस्यमयी बीमारी हुई
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चर्चा में क्यों
मिनामाता रोग के ऐतिहासिक संदर्भ को वैश्विक पारा विनियमन और मिनामाता कन्वेंशन के लिए एक उत्प्रेरक के रूप में रेखांकित किया गया है।
पृष्ठभूमि
वर्ष 1932 में, चिसो कॉर्पोरेशन (Chisso Corporation) ने मिनामाता खाड़ी में पारा युक्त अपशिष्ट जल विसर्जित किया था। वर्ष 1956 तक, समुद्री भोजन में मिथाइलमरकरी के जैव-आवर्धन (biomagnification) के कारण उत्पन्न होने वाले एक तंत्रिका संबंधी विकार (मिनामाता रोग) की पहचान की गई।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- विज्ञान-तकनीकमिथाइलमरकरी (Methylmercury): एक शक्तिशाली न्यूरोटॉक्सिन (neurotoxin) जो समुद्री खाद्य श्रृंखलाओं में बायोमैग्निफिकेशन (biomagnification) करता है।
- अंतर्राष्ट्रीय संगठनमिनामाता कन्वेंशन: पारा से मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण की रक्षा के लिए 2013 में अपनाया गया एक वैश्विक समझौता।
- तथ्यमिनामाता रोग: गंभीर मरकरी विषाक्तता के कारण होने वाला एक न्यूरोलॉजिकल सिंड्रोम।
मेन्स के लिए
Q. औद्योगिक प्रदूषण के समाधान में मिनामाता कन्वेंशन के महत्व और वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं पर्यावरणीय सुरक्षा पर इसके प्रभाव की चर्चा कीजिए।
उत्तर के आयाम
- biomagnification process
- industrial accountability
- global regulatory framework
- prevention of heavy metal poisoning
कीवर्ड: biomagnification · neurotoxicity · industrial pollution · environmental governance · public health
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।