15 जुलाई को, भारतीय मूल के NASA अंतरिक्ष यात्री Dr Anil Menon
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चर्चा में क्यों
भारतीय मूल के NASA अंतरिक्ष यात्री डॉ. अनिल मेनन के 15 जुलाई, 2024 को अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के लिए प्रक्षेपित होने का कार्यक्रम निर्धारित है, जो मानव अंतरिक्ष उड़ान के क्षेत्र में भारत के बढ़ते प्रभाव को रेखांकित करता है।
पृष्ठभूमि
पूर्व विमान चिकित्सक डॉ. अनिल मेनन, कजाकिस्तान से सोयुज MS-29 अंतरिक्ष यान के माध्यम से प्रक्षेपित किए जाएंगे। वे 2027 में पृथ्वी पर लौटने से पूर्व अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर लगभग आठ महीने तक अनुसंधान कार्य करेंगे।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- विज्ञान-तकनीकSoyuz MS-29: एक रूसी अंतरिक्ष यान जिसका उपयोग चालक दल को International Space Station (ISS) तक पहुँचाने के लिए किया जाता है।
- पदडॉ. अनिल मेनन: भारतीय मूल के NASA अंतरिक्ष यात्री और पूर्व फ्लाइट सर्जन।
- तथ्यमिशन की अवधि: डॉ. मेनन के ISS पर लगभग आठ महीने रहने और 2027 में लौटने की योजना है।
- स्थानकजाकिस्तान: Soyuz अंतरिक्ष यान मिशनों के लिए प्राथमिक प्रक्षेपण स्थल।
मेन्स के लिए
प्रश्न: अंतरराष्ट्रीय मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशनों में भारत की बढ़ती भागीदारी के महत्व और वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत की स्थिति पर इसके निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी: रूसी लॉन्च व्हीकल पर निर्भरता और स्वतंत्र मानव अंतरिक्ष उड़ान की आकांक्षाओं के बीच संतुलन
- वैज्ञानिक सहयोग: घरेलू उपयोग के लिए बायोटेक्नोलॉजी और मैटेरियल्स साइंस को आगे बढ़ाने के लिए ISS रिसर्च के अवसरों का लाभ उठाना
- सॉफ्ट पावर प्रोजेक्शन: अंतरिक्ष अन्वेषण में प्रवासी भारतीयों की उपलब्धियों का उपयोग भारत की वैश्विक वैज्ञानिक प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए
मुख्य शब्द: मानव अंतरिक्ष उड़ान · स्पेस डिप्लोमेसी · वैज्ञानिक सहयोग · रणनीतिक स्वायत्तता · स्पेस इकोनॉमी
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।