सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि वन भूमि का उपयोग कृषि सहित गैर-वन उद्देश्यों के लिए नहीं किया जा सकता
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चर्चा में क्यों
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि वन भूमि का उपयोग कृषि सहित गैर-वन उद्देश्यों के लिए नहीं किया जा सकता। साथ ही, कोर्ट ने कर्नाटक सरकार द्वारा एक अवैध लीज (lease) को रद्द करने के फैसले को भी बरकरार रखा।
पृष्ठभूमि
सुप्रीम कोर्ट ने 134 एकड़ वन भूमि पर एक सहकारी समिति को दिए गए अवैध पट्टे (lease) को रद्द करने के कर्नाटक सरकार के फैसले को बरकरार रखा है। कोर्ट ने राज्य सरकार को इस क्षेत्र में स्वदेशी पेड़ फिर से लगाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वन भूमि को गैर-आरक्षित (de-reservation) करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- स्थानकर्नाटक सरकार ने 134 एकड़ वन भूमि पर एक अवैध लीज (lease) को रद्द कर दिया है।
- संस्थासुप्रीम कोर्ट ने वन भूमि के डी-रिज़र्वेशन (de-reservation) के लिए पूर्व अनुमति अनिवार्य कर दी है।
- तथ्यकोर्ट ने क्षेत्र में स्वदेशी पेड़ों के साथ पुनर्वनीकरण (repopulation) का आदेश दिया।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में वन भूमि को गैर-वानिकी उद्देश्यों के लिए परिवर्तित न करने के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के कानूनी और पारिस्थितिक निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- न्यायिक निगरानी: वन भूमि के डी-रिज़र्वेशन के लिए सुप्रीम कोर्ट की पूर्व अनुमति की आवश्यकता
- पारिस्थितिक अखंडता: जैव विविधता को बहाल करने के लिए स्वदेशी प्रजातियों के साथ अनिवार्य पुनर्रोपण
- रेगुलेटरी एनफोर्समेंट: संरक्षित जमीनों पर कोऑपरेटिव सोसाइटीज को दिए गए अवैध लीज ग्रांट्स पर कार्रवाई
मुख्य शब्द: जुडिशियल एक्टिविज्म · वन संरक्षण · भूमि उपयोग नीति · जैव विविधता बहाली · रेगुलेटरी कंप्लायंस
पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी पर और नोट्स
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।