ISRO ने भारत की भारी-लिफ्ट और नेविगेशन क्षमताओं को सुदृढ़ करनेके लिए प्रमुख प्रोपल्शन और इनर्शियल सिस्टम इकाइयों का नेतृत्व करनेके लिए N
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चर्चा में क्यों
ISRO ने भारत की भारी-लिफ्ट और नेविगेशन क्षमताओं को सुदृढ़ करनेके लिए प्रमुख प्रोपल्शन और इनर्शियल सिस्टम इकाइयों का नेतृत्व करनेके लिए N. Jayan और Joji J. Chaman को नियुक्त किया है।
पृष्ठभूमि
एन. जयान को लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम्स सेंटर (LPSC) का निदेशक और जोजी जे. चमन को ISRO इनर्शियल सिस्टम्स यूनिट (IISU) का निदेशक नियुक्त किया गया है। ये नियुक्तियाँ 1 जुलाई, 2024 से प्रभावी होंगी। यह निर्णय GSLV Mk III के लिए क्रायोजेनिक प्रोपल्शन के क्षेत्र में जयान के नेतृत्व और उत्कृष्ट योगदान के पश्चात लिया गया है।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- विज्ञान-तकनीकLPSC: अंतरिक्ष मिशनों के लिए लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम के विकास के लिए जिम्मेदार ISRO केंद्र।
- विज्ञान-तकनीकGSLV Mk III: भारत का भारी-लिफ्ट लॉन्च व्हीकल जो Geostationary Transfer Orbit (GTO) तक भारी पेलोड ले जाने में सक्षम है।
- विज्ञान-तकनीकIISU: ISRO की वह इकाई जो नेविगेशन और ओरिएंटेशन के लिए इनर्शियल सेंसर और स्पेस रोबोटिक्स पर केंद्रित है।
- पदN. Jayan: VSSC में क्रायोजेनिक प्रोपल्शन टेक्नोलॉजी विकास के पूर्व प्रमुख।
मेन्स के लिए
Q. अंतरिक्ष अन्वेषण में भारत के आत्मनिर्भरता के लक्ष्यों को प्राप्त करने में स्वदेशी तरल प्रणोदन (liquid propulsion) और जड़त्वीय नेविगेशन प्रणालियों (inertial navigation systems) के महत्व पर चर्चा कीजिए।
उत्तर के आयाम
- Technological sovereignty: Reducing dependence on foreign cryogenic engines for heavy-lift launch vehicles.
- Navigation precision: Enhancing orbital accuracy through indigenous inertial sensors and space robotics.
- Strategic autonomy: Strengthening the space-based infrastructure for dual-use civilian and defense applications.
कीवर्ड: Cryogenic propulsion · Space robotics · Self-reliance · Orbital mechanics · Indigenous technology
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर और नोट्स
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