ऑल इंडिया यूनियन ऑफ फॉरेस्ट वर्किंग पीपल (AIUFWP) ने असम सरकार से लुतमारी लोंगजप आरक्षित वन में निष्कासन की कार्रवाई को रोकने का आग्रह किया है
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चर्चा में क्यों
ऑल इंडिया यूनियन ऑफ फॉरेस्ट वर्किंग पीपल (AIUFWP) ने असम सरकार से लुतमारी लोंगजप आरक्षित वन में निष्कासन की कार्रवाई को रोकने का आग्रह किया है। संगठन ने दावा किया है कि ये बस्तियाँ ब्रिटिश काल की 'तौंग्या' प्रणाली के तहत स्थापित की गई थीं।
पृष्ठभूमि
AIUFWP का तर्क है कि चार ताउंग्या गाँवों के निवासी अतिक्रमणकारी नहीं, बल्कि ऐतिहासिक निवासी हैं। उनका दावा है कि ये बस्तियाँ 'अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006' के अंतर्गत संरक्षित हैं।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- अधिनियम / विधेयकअनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वन निवासी (वन अधिकार की मान्यता) अधिनियम 2006 में अधिनियमित किया गया था।
- तथ्यताउंग्या (Taungya): पूर्वोत्तर भारत में प्रचलित एक पारंपरिक झूम खेती (shifting cultivation) प्रणाली।
- स्थानलुटमारी लोंगजाप आरक्षित वन (Lutumari Longjap reserve forest) असम में स्थित है।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारत में वन संरक्षण के लक्ष्यों और स्वदेशी समुदायों के पारंपरिक वन अधिकारों की मान्यता के बीच उत्पन्न होने वाले द्वंद्व का विश्लेषण कीजिए।
सामाजिक न्याय पर और नोट्स
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