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भारत का जमीनी सत्य अभिलेख
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भाग I · स्था. 11.2025 
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IAEA के महानिदेशक ने वैश्विक परमाणु स्थिरता के लिए एक मॉडल के रूप में भारत-पाकिस्तान के उस द्विपक्षीय समझौते (1988 से प्रभावी) पर प्रकाश डाला

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चर्चा में क्यों

IAEA के महानिदेशक ने वैश्विक परमाणु स्थिरता के लिए एक मॉडल के रूप में भारत-पाकिस्तान के उस द्विपक्षीय समझौते (1988 से प्रभावी) पर प्रकाश डाला, जिसके तहत दोनों देश एक-दूसरे के परमाणु प्रतिष्ठानों को निशाना न बनाने के लिए सहमत हुए हैं।

पृष्ठभूमि

भारत और पाकिस्तान ने एक-दूसरे की परमाणु सुविधाओं पर आक्रमण से बचने के लिए वर्ष 1988 से एक द्विपक्षीय समझौता बनाए रखा है। इस समझौते के अंतर्गत दोनों राष्ट्रों के बीच परमाणु प्रतिष्ठानों की सूचियों का वार्षिक आदान-प्रदान किया जाता है।

प्रीलिम्स के लिए तथ्य

  • संस्थाIAEA: International Atomic Energy Agency, जिसका मुख्यालय वियना में है, वैश्विक परमाणु सुरक्षा की निगरानी करता है।
  • तथ्यभारत-पाकिस्तान के बीच प्रतिष्ठानों पर परमाणु गैर-आक्रामकता समझौता 1988 में स्थापित किया गया था।
  • पदराफेल ग्रोसी: अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के वर्तमान महानिदेशक।

मेन्स के लिए

प्रश्न: परमाणु-सशस्त्र प्रतिद्वंद्वियों के बीच द्विपक्षीय परमाणु गैर-आक्रामकता समझौतों के क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक अप्रसार मानदंडों में योगदान का विश्लेषण कीजिए।

पूरी खबर पढ़ें →इस नोट में गलती बताएँस्रोत: एनडीटीवी ↗यह भी: GS3 · परमाणु एवं नई ऊर्जा तकनीक

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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।