इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बरेली हिंसा के एक आरोपी की जमानत याचिकाखारिज कर दी है
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चर्चा में क्यों
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बरेली हिंसा के एक आरोपी की जमानत याचिकाखारिज कर दी है। कोर्ट ने फैसला सुनाया कि 'सर तन से जुदा' का नारा भारत की संप्रभुता और कानूनी अधिकार को चुनौती देता है।
पृष्ठभूमि
अदालत ने 'I love Mohammed' लिखे पोस्टरों से भड़के हिंसा के मामले में आरोपी मोहम्मद रिहान के मामले पर सुनवाई की। न्यायालय ने 'अल्लाहु अकबर' या 'जय श्री राम' जैसे धार्मिक नारों और सिर कलम करने के आह्वान के बीच अंतर स्पष्ट किया। अदालत ने सिर कलम करने के आह्वान को राज्य के लिए खतरा माना।
प्रीलिम्स के लिए तथ्य
- तथ्यअल्लाहाबाद हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया कि 'सर तन से जुदा' जैसे नारे भारत की संप्रभुता (sovereignty) और अखंडता को चुनौती देते हैं।
- तथ्यकोर्ट ने स्पष्ट किया कि 'नारा-ए-तकबीर', 'अल्लाहु अकबर' या 'जय श्री राम' का नारा लगाना अपराध नहीं है, जब तक कि इसका उपयोग दुर्भावनापूर्ण तरीके से न किया जाए।
मेन्स के लिए
प्रश्न: भारतीय राज्य की संप्रभुता और सांप्रदायिक सद्भाव के रखरखाव पर उग्रवादी नारों के कानूनी और सुरक्षा निहितार्थों का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर के आयाम
- कानूनी सीमा: संरक्षित धार्मिक अभिव्यक्ति और हिंसा या कट्टरपंथ के लिए उकसावे के बीच अंतर
- संप्रभुता का जोखिम: राज्य के वैध बल के एकाधिकार पर चरमपंथी बयान का प्रभाव
- सांप्रदायिक तनाव: संवेदनशील क्षेत्रों में सांप्रदायिक हिंसा रोकने और अभिव्यक्ति की आज़ादी के बीच संतुलन
मुख्य शब्द: संप्रभुता · सांप्रदायिक सद्भाव · उकसाना · कानून का शासन · धार्मिक अभिव्यक्ति
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यह नोट सत्यधीश के समाचार फ़ीड से स्वचालित रूप से तैयार किया गया है और यूपीएससी सीएसई पाठ्यक्रम से जुड़ा है। उत्तर में उपयोग करने से पहले तथ्यों का मूल रिपोर्ट या पीआईबी से मिलान करें।